anish FRK की कमी के कारण बाधित धान ख़रीददारी के मुद्दे पर माननीय प्रधानमंत्री जी को बक्सर सांसद सुधाकर सिंह ने लिखा पत्र, - . "body"

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FRK की कमी के कारण बाधित धान ख़रीददारी के मुद्दे पर माननीय प्रधानमंत्री जी को बक्सर सांसद सुधाकर सिंह ने लिखा पत्र

BY ADMIN

M V BIHAR NEWS

PATNA/बिहार में इन दिनों FRK (फोर्टिफ़ाइड राइस कर्नेल) की गंभीर कमी के कारण धान की खरीद प्रक्रिया लगभग ठप हो चुकी है। राज्य के कई ज़िलों से लगातार यह शिकायतें मिल रही हैं कि जैसे ही FRK का स्टॉक समाप्त हुआ, PACS और अन्य क्रय केंद्रों पर धान की तौल और खरीद रोक दी गई। इसका सीधा दुष्परिणाम यह हुआ है कि किसान अपनी उपज लेकर दर-दर भटकने को मजबूर हैं और गहरे आर्थिक संकट में फँसते जा रहे हैं।

यह स्थिति केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि केंद्र और राज्य—दोनों सरकारों की संयुक्त विफलता को उजागर करती है। केंद्र सरकार ने फोर्टिफ़िकेशन नीति के तहत FRK को अनिवार्य तो कर दिया, लेकिन उसकी समय पर और पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने की कोई ठोस व्यवस्था नहीं की। वहीं बिहार सरकार भी यह सुनिश्चित करने में पूरी तरह असफल रही कि पूरे खरीद मौसम के दौरान FRK की निर्बाध उपलब्धता बनी रहे।

इस गंभीर विषय पर कल दिनांक 03.02.2026 को मेरी उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के सचिव से मुलाक़ात हुई। सचिव द्वारा यह आश्वासन दिया गया कि 15 फरवरी तक FRK की उपलब्धता सुनिश्चित कर दी जाएगी। लेकिन मेरा सवाल है कि तब तक किसानों को जो नुकसान होगा, उसकी भरपाई कौन करेगा? जिन किसानों का धान क्रय केंद्रों पर पड़ा है, जिनके सिर पर कर्ज़, पारिवारिक खर्च और अगली फसल की तैयारी का दबाव है—उनकी चिंता कौन करेगा?


उल्लेखनीय है कि बिहार में इस वर्ष धान खरीद का लक्ष्य 36.85 लाख टन निर्धारित किया गया था, जबकि अब तक केवल 18.76 लाख टन धान की ही खरीद हो पाई है। पहले जानबूझकर धान खरीद का लक्ष्य कम रखा गया और फिर जो लक्ष्य तय किया गया, उसे पूरा करने के लिए आवश्यक संसाधन और व्यवस्थाएँ तक उपलब्ध नहीं कराई गईं। यह कहना गलत नहीं होगा कि केंद्र सरकार ने बिहार के साथ लगातार दोयम दर्जे का व्यवहार अपनाया है। चाहे किसानों की आय का प्रश्न हो, MSP पर खरीद की व्यवस्था हो या FRK जैसी अनिवार्य शर्तों की पूर्ति—हर मोर्चे पर बिहार को नज़रअंदाज़ किया गया है। इसका सीधा खामियाजा बिहार के अन्नदाता भुगत रहे हैं।

किसान ने समय पर बुआई की, कठिन परिस्थितियों में फसल तैयार की और पूरी उम्मीद के साथ धान लेकर क्रय केंद्र पहुँचा। इसके बावजूद यदि सरकारी अव्यवस्था और नीतिगत असंवेदनशीलता के कारण उसकी उपज नहीं खरीदी जा रही है, तो इसमें किसान का कोई दोष नहीं है। FRK की कमी कोई प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि पूरी तरह प्रशासनिक और नीतिगत विफलता का परिणाम है।

यह भी स्पष्ट है कि FRK एक मल्टी-विटामिन पोषक तत्व है, जिसे धान कुटाई के दौरान प्रति क्विंटल चावल में एक किलो की मात्रा में मिलाया जाता है। चावल में FRK मिलाने के बाद ही उसे FRK-टैग दिया जाता है। सरकार की ओर से FRK की आपूर्ति के लिए उत्तर प्रदेश की एक कंपनी को टैग किया गया है। यह कंपनी एसएफसी को FRK उपलब्ध कराती है और एसएफसी के माध्यम से मिलरों तक पहुँचाया जाता है। दुर्भाग्यवश, टैग की गई कंपनी द्वारा एसएफसी को FRK की आपूर्ति नहीं की जा रही है, जिससे पूरी धान खरीद श्रृंखला टूट गई है।


अतः मैं केंद्र और राज्य सरकार से यह माँग करता हूँ कि FRK की पर्याप्त आपूर्ति तत्काल सुनिश्चित की जाए, धान खरीद की अवधि बढ़ाई जाए और जिन किसानों की खरीद FRK की कमी के कारण नहीं हो सकी है, उन्हें आर्थिक सुरक्षा एवं उचित मुआवज़ा दिया जाए। किसान किसी तरह की रियायत नहीं, बल्कि अपने श्रम का न्यायपूर्ण मूल्य चाहता है। यदि इस गंभीर समस्या का समाधान शीघ्र नहीं किया गया, तो यह मुद्दा आने वाले दिनों में किसानों के व्यापक असंतोष और बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी केंद्र और राज्य सरकारों की होगी।

FRK की कमी के कारण बाधित धान ख़रीददारी के मुद्दे पर माननीय प्रधानमंत्री जी को बक्सर सांसद सुधाकर सिंह ने लिखा पत्र,

FRK की कमी के कारण बाधित धान ख़रीददारी के मुद्दे पर माननीय प्रधानमंत्री जी को बक्सर सांसद सुधाकर सिंह ने लिखा पत्र

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PATNA/बिहार में इन दिनों FRK (फोर्टिफ़ाइड राइस कर्नेल) की गंभीर कमी के कारण धान की खरीद प्रक्रिया लगभग ठप हो चुकी है। राज्य के कई ज़िलों से लगातार यह शिकायतें मिल रही हैं कि जैसे ही FRK का स्टॉक समाप्त हुआ, PACS और अन्य क्रय केंद्रों पर धान की तौल और खरीद रोक दी गई। इसका सीधा दुष्परिणाम यह हुआ है कि किसान अपनी उपज लेकर दर-दर भटकने को मजबूर हैं और गहरे आर्थिक संकट में फँसते जा रहे हैं।

यह स्थिति केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि केंद्र और राज्य—दोनों सरकारों की संयुक्त विफलता को उजागर करती है। केंद्र सरकार ने फोर्टिफ़िकेशन नीति के तहत FRK को अनिवार्य तो कर दिया, लेकिन उसकी समय पर और पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने की कोई ठोस व्यवस्था नहीं की। वहीं बिहार सरकार भी यह सुनिश्चित करने में पूरी तरह असफल रही कि पूरे खरीद मौसम के दौरान FRK की निर्बाध उपलब्धता बनी रहे।

इस गंभीर विषय पर कल दिनांक 03.02.2026 को मेरी उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के सचिव से मुलाक़ात हुई। सचिव द्वारा यह आश्वासन दिया गया कि 15 फरवरी तक FRK की उपलब्धता सुनिश्चित कर दी जाएगी। लेकिन मेरा सवाल है कि तब तक किसानों को जो नुकसान होगा, उसकी भरपाई कौन करेगा? जिन किसानों का धान क्रय केंद्रों पर पड़ा है, जिनके सिर पर कर्ज़, पारिवारिक खर्च और अगली फसल की तैयारी का दबाव है—उनकी चिंता कौन करेगा?


उल्लेखनीय है कि बिहार में इस वर्ष धान खरीद का लक्ष्य 36.85 लाख टन निर्धारित किया गया था, जबकि अब तक केवल 18.76 लाख टन धान की ही खरीद हो पाई है। पहले जानबूझकर धान खरीद का लक्ष्य कम रखा गया और फिर जो लक्ष्य तय किया गया, उसे पूरा करने के लिए आवश्यक संसाधन और व्यवस्थाएँ तक उपलब्ध नहीं कराई गईं। यह कहना गलत नहीं होगा कि केंद्र सरकार ने बिहार के साथ लगातार दोयम दर्जे का व्यवहार अपनाया है। चाहे किसानों की आय का प्रश्न हो, MSP पर खरीद की व्यवस्था हो या FRK जैसी अनिवार्य शर्तों की पूर्ति—हर मोर्चे पर बिहार को नज़रअंदाज़ किया गया है। इसका सीधा खामियाजा बिहार के अन्नदाता भुगत रहे हैं।

किसान ने समय पर बुआई की, कठिन परिस्थितियों में फसल तैयार की और पूरी उम्मीद के साथ धान लेकर क्रय केंद्र पहुँचा। इसके बावजूद यदि सरकारी अव्यवस्था और नीतिगत असंवेदनशीलता के कारण उसकी उपज नहीं खरीदी जा रही है, तो इसमें किसान का कोई दोष नहीं है। FRK की कमी कोई प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि पूरी तरह प्रशासनिक और नीतिगत विफलता का परिणाम है।

यह भी स्पष्ट है कि FRK एक मल्टी-विटामिन पोषक तत्व है, जिसे धान कुटाई के दौरान प्रति क्विंटल चावल में एक किलो की मात्रा में मिलाया जाता है। चावल में FRK मिलाने के बाद ही उसे FRK-टैग दिया जाता है। सरकार की ओर से FRK की आपूर्ति के लिए उत्तर प्रदेश की एक कंपनी को टैग किया गया है। यह कंपनी एसएफसी को FRK उपलब्ध कराती है और एसएफसी के माध्यम से मिलरों तक पहुँचाया जाता है। दुर्भाग्यवश, टैग की गई कंपनी द्वारा एसएफसी को FRK की आपूर्ति नहीं की जा रही है, जिससे पूरी धान खरीद श्रृंखला टूट गई है।


अतः मैं केंद्र और राज्य सरकार से यह माँग करता हूँ कि FRK की पर्याप्त आपूर्ति तत्काल सुनिश्चित की जाए, धान खरीद की अवधि बढ़ाई जाए और जिन किसानों की खरीद FRK की कमी के कारण नहीं हो सकी है, उन्हें आर्थिक सुरक्षा एवं उचित मुआवज़ा दिया जाए। किसान किसी तरह की रियायत नहीं, बल्कि अपने श्रम का न्यायपूर्ण मूल्य चाहता है। यदि इस गंभीर समस्या का समाधान शीघ्र नहीं किया गया, तो यह मुद्दा आने वाले दिनों में किसानों के व्यापक असंतोष और बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी केंद्र और राज्य सरकारों की होगी।