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पंच सरपंच संघ के बिहार प्रदेश अध्यक्ष अमोद कुमार निराला ने सरकार पर साधा निशाना राजस्व कर्मियों का किया समर्थन

BY ADMIN

MV BIHAR NEWS

पटना 19 मार्च । महीनों से आम जनता के साथ त्रिस्तरीय एव ग्राम कचहरी प्रतिनिधि तंग तबाह परेशान हैं अंचल कार्यालय बंद है जो ग्रामीण प्रशासन की रीढ़ है। राजस्व से जुड़े लगभग सभी कार्य — चाहे वह जमाबंदी हो, दाखिल-खारिज हो, भूमि विवाद हो, आय निवास ईडब्लूएस आदि सभी तरह के प्रमाण पत्र निर्गत करना हो या आपदा प्रबंधन — इन सभी की शुरुआत और अंत अंचल कार्यालय से ही होता है।जो गलत नीति निर्धारण के कारण वर्तमान में अंचल अधिकारी एवं राजस्व अधिकारी हड़ताल पर हैं, जिसके कारण अंचल कार्यालयों का कार्य ठप है। इसका सीधा और व्यापक असर आम जनता पर पड़ रहा है।


आज स्थिति यह है कि लोगों के जमाबंदी, दाखिल-खारिज, भूमि सुधार, भूमि बिक्री जैसे महत्वपूर्ण कार्य रुके हुए हैं। कई परिवार अपनी बेटियों बहन की शादी या अन्य जरूरी कार्यों के लिए जमीन का क्रय-विक्रय करना चाहते हैं, लेकिन छोटे-छोटे राजस्व मामलों के उलझन से लंबित रहने के कारण वे परेशान हैं। RTPS के अंतर्गत प्रमाण पत्र निर्गत नहीं हो पा रहे हैं।आगामी  पंचायत चुनाव मद्देनजर कई स्थानीय योजनाएं और विकासात्मक कार्य एनओसी नहीं मिलने के कारण प्रभावित हैं 


सबसे गंभीर प्रभाव भूमि विवादों पर पड़ा है। जिससे ग्राम कचहरियो में आंचल का मामला सरपंच कैसे देखेगे पहले अंचल अधिकारी के स्तर पर जनता दरबार लगता था, लेकिन अब सुनवाई नहीं होने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में आपसी विवाद, मारपीट और अपराध की घटनाएं बढ़ रही हैं। ग्राम कचहरी पर भी अत्यधिक दबाव बढा है।


अंचल अधिकारी आपदा प्रबंधन नोडल अधिकारी हैं। फसल कटनी, आगजनी दुर्घटना जैसी घटनाएं होने पर अंचल सक्रिय प्रशासन का होना अत्यंत आवश्यक है। वर्तमान में उस व्यवस्था में भी बाधा उत्पन्न हो गई हैं अब मैं एक अत्यंत महत्वपूर्ण और मूलभूत मुद्दे की ओर ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं —समस्या केवल अंचल स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि अनुमंडल और जिला स्तर तक भी व्याप्त है।

अनुमंडल भूमि सुधार समाहर्ता तथा जिला स्तर पर एडीएम के यहां जो अपीलीय कार्यवाही होती है, वहां पर अनुभवी और योग्य राजस्व अधिकारियों का होनज़रूरी है परिणामस्वरूप, वहां पर मामलों का उचित और गुणवत्तापूर्ण यदि कोई व्यक्ति अंचल अधिकारी के निर्णय से असंतुष्ट है, तो उसे एक सशक्त और प्रभावी अपीलीय मंच मिलना ही चाहिए।लेकिन वर्तमान स्थिति में उसे न्याय के लिए भटकना पड़ता है यही कारण है कि निचले स्तर पर असंतोष बढ़ रहा है और लोगों का प्रशासनिक एवं न्यायिक व्यवस्था पर विश्वास प्रभावित हो रहा है।


माननीय उच्च न्यायालय ने भी कहा है कि

इन महत्वपूर्ण पदों पर योग्यता प्राप्त एवं अनुभवयुक्त राजस्व अधिकारियों की नियुक्ति चाहिए। यह निर्णय इसलिए भी महत्वपूर्ण है ताकि अपीलीय प्राधिकार मजबूत हो, निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित हो और आम जनता का न्याय व्यवस्था से बेहतर न्याय मिले विश्वास बना रहे

अंचल, अनुमंडल और जिला — तीनों स्तरों पर राजस्व प्रशासन को मजबूत बनाने की ज़रूरत है 

उक्त बाते बिहार प्रदेश पंच सरपंच संघ प्रदेश अध्यक्ष अमोद कुमार निराला ने कहा कि मुख्यमंत्री एव उपमुख्य मंत्री,राजस्व एवं भुमि सुधार मंत्री ईमानदार है पर सुननें में आया है कि बसा के पदाधिकारी उनके पी ए है जो मामला को समाप्त कराने में सायद अर्चन ला रहे होंगे मेरा सुझाव है की राजस्व अधिकारी को राजस्व और बसा अधिकारियों को भूमि सुधार दे दे सायद मामला समाप्त हो जाएगी 

अधिकारियों की जायज मांगों पर संवेदनशीलता और प्राथमिकता के साथ शीघ्र निर्णय ले जन हित में हड़ताल को समाप्त कराए,और ऐसी सुदृढ़ प्रशासनिक व्यवस्था स्थापित हो जो आम जनता को समय पर सेवा और न्याय मिले ।क्योंकि सबसे ज्यादा प्रभावित आम नागरिक और हम जनप्रतिनिधि है।

पंच सरपंच संघ के बिहार प्रदेश अध्यक्ष अमोद कुमार निराला ने सरकार पर साधा निशाना राजस्व कर्मियों का किया समर्थन

पिता गृह रक्षा वाहिनी बक्सर में तैनात, बेटा शराब के साथ गिरफ्तार


* गृह रक्षा वाहिनी में कार्यरत एक कर्मी के बेटा शराब के साथ गिरफ्तार 

* शराबबंदी कानून के बीच बक्सर में सामने आया चौंकाने वाला मामला

बिहार में शराबबंदी कानून के बीच पुलिस को एक बड़ी सफलता मिली है। जहा गृह रक्षा वाहिनी संघ के अध्यक्ष के बेटे को शराब के साथ गिरफ्तार किया गया है। मिली जानकारी के अनुसार, पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी की नदी के किनारे से शराब लेकर तीन युवक मोटरसाइकिल के साथ जाने वाले है ! सूचना के आधार पर छापेमारी की गई, जहां से युवक को शराब के साथ गिरफ्तार कर लिया गया।

बक्सर, संवाददाता। बिहार में लागू पूर्ण शराबबंदी कानून के बीच बक्सर जिले के राजपुर थाना से एक हैरान करने वाली खबर सामने आई है। जहा गृह रक्षा वाहिनी में कार्यरत एक कर्मी के बेटे को पुलिस ने अवैध शराब के साथ गिरफ्तार किया है। इस घटना के बाद इलाके में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं और कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल भी उठने लगे हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि तीन वयक्ति पिठू बैग में शराब लेकर कर्मनाशा नदी के किनारे पर खड़े है जो मोटरसाइकिल से शराब केर साथ जाने वाले है | सूचना मिलते ही स्थानीय थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 


सुचना पर पहुंची पुलिस 

नदी के किनारे पहुंची जहा देखी की तीनो व्यक्ति पिठू बैग में कुछ रखकर अपना अपना मोटरसाइ‌किल चालु कर ग्राम निकृष के तरफ चले आ रहे है उक्त तीनो व्यक्ति ने पुलिस गाड़ी तथा पुलिस को देखकर मोटरसाइ‌किल गिराकर तथा अपना बैग फैककर भागने लगे ! भाग रहे तीनो व्यक्ति को पुलिस के द्वारा खदेड़कर पकड़ने का प्रयास किया परन्तु भाग रहे तीनो व्यक्ति में से दो व्यक्ति 1 ब्रजेश चौधरी उम्र 31 वर्ष पे० कामेश्वर चौधरी सा० भेलिपुर थाना इटाढ़ी 2. शन्नी देवल चौहान उम्र 20 वर्ष पे० कैशनाथ चौधरी सा० भेलिपुर थाना ईटाढ़ी को पकड़ा गया तथा सुग्रीव चौहान पे० कमला प्रसाद सा० भेलिपुर थाना ईटाढ़ी जो नदी किनारे लगे झाडी का फायदा उठाकर भागने में सफल रहा ! पकड़ाये दोनों काला एवं लाल रंग का होंडा SP125 मोटरसाइकिल रजि० BR44N8404 चेचिस न० ME4JC831GMG216856 के पास फेका काला बैग में देशी शराब 200 ML कुल मात्रा 12.800 लीटर,काला एवं लाल रंग का C.TIIX मोटरसाइकिल रजि० BR44N7994 चेचिस न MD2B85AXSMPA01536 के चालक के द्वारा फेके गये भूरा रंग का बैग में रखा देशी शराब 200ML कुल मात्रा 17.600 लीटर तथा  काला रंग का हीरो सुपर स्पेलैडर भोटरसाइकिल रजि० न० BIR44K4389 के चालक के द्वारा फेंके गए हरा रंग का चैग में रखा 8PM अंग्रेजी शराब 180ML कुल 15.660 लीटर तलाशी के दौरान दोनों युवको के पास से शराब बरामद की गई, जिसके बाद उसे मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया गया। घटना 18/26 की है 


गृह रक्षा वाहिनी में तैनात एक कर्मी का बेटा 

सूत्रों से मिल रही जानकारी के अनुसार गिरफ्तार दोनों युवको में से एक युवक की पहचान गृह रक्षा वाहिनी में तैनात एक कर्मी के बेटे के रूप में हुई है। तथा अन्य दो उसी के गांव का निवासी बताया जाता है ! युवक लंबे समय से इस गतिविधि में शामिल था या नहीं, इसकी जांच की जा रही है। पुलिस अब इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि शराब कहां से लाई गई और इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क तो सक्रिय नहीं है। हलाकि ब्रजेश चौधरी के खिलाफ 31-12-2020 में जिला पदाधिकारी तथा इनके पिता कामेश्वर चौधरी के खिलाफ जिला समादेश्टा ( गृह रक्षा वाहिनी ) में राजेश पासवान के द्वारा शिकायत दर्ज करवाई गई है ! 


थानाध्यक्ष ने दी जानकारी

इस घटना के बारे में  जब थाने से संपर्क स्थापित किया गया तो राजपुर थानाध्यक्ष के दवारा बताया गया की FIRदर्ज कर लिया गया है और शराबबंदी कानून के तहत सख्ती से कार्रवाई जारी किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। "कानून सबके लिए बराबर है। चाहे आरोपी किसी भी परिवार या विभाग से जुड़ा हो, नियमों का उल्लंघन करने पर कार्रवाई तय है,"

कहते है स्थानीय 

इस घटना ने एक बार फिर शराबबंदी कानून के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर बहस छेड़ दी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन की सख्ती के बावजूद अवैध शराब का कारोबार पूरी तरह खत्म नहीं हो पाया है। वहीं, कुछ लोगों का यह भी कहना है कि कानून व्यवस्था से जुड़े परिवार के सदस्य का इस तरह पकड़ा जाना बेहद चिंताजनक है। फिलहाल पुलिस ने युवक के खिलाफ उत्पाद अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया है और आगे की जांच जारी है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि यह मामला केवल व्यक्तिगत स्तर तक सीमित है या इसके पीछे कोई संगठित तंत्र काम कर रहा था। 

पिता गृह रक्षा वाहिनी बक्सर में तैनात, बेटा शराब के साथ गिरफ्तार

बदलेगा बक्सर रेलवे स्टेशन की सूरत दिखेगा एयरपोट जैसा नजारा जाने कब से होगा काम शुरू

BY ADMIN

M V ONLINE BIHAR NEWS 

बक्सर / जो महर्षी विस्वामित्र की नगरी है राम की शिक्षा स्थली है वामन की जन्मभूमि है अब उस बक्सर के रेलवेस्टेशन को बेहतर बनाने जा रही है केन्द्र सरकार बताते चले की अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत बिहार के बक्सर रेलवे स्टेशन का व्यापक आधुनिकीकरण प्रस्तावित है। करीब 130 करोड़ रुपये की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) रेलवे बोर्ड को अंतिम मंजूरी के लिए भेजी गई है। स्वीकृति मिलते ही बक्सर स्टेशन को आधुनिक सुविधाओं से लैस ‘सिटी सेंटर’ के रूप में विकसित किया जाएगा।


दिया जाएगा एयरपोर्ट जैसा आधुनिक लुक 

प्रस्तावित योजना के अनुसार स्टेशन भवन को आकर्षक, आधुनिक और एयरपोर्ट जैसा स्वरूप दिया जाएगा। डिजाइन में स्थानीय सांस्कृतिक विरासत की झलक भी शामिल की जाएगी, ताकि क्षेत्रीय पहचान बनी रहे। स्टेशन परिसर में सर्कुलेटिंग एरिया का विस्तार, प्लेटफॉर्म का चौड़ीकरण और वर्ल्ड-क्लास वेटिंग हॉल का निर्माण किया जाएगा। फुट ओवरब्रिज को पहले से अधिक चौड़ा और सुरक्षित बनाया जाएगा।

हाईटेक सुरक्षा के साथ बेहतर प्रबंधन

पूरे स्टेशन परिसर में सीसीटीवी निगरानी व्यवस्था स्थापित की जाएगी। एक अत्याधुनिक कंट्रोल रूम भी बनाया जाएगा, जिससे सुरक्षा और संचालन की मॉनिटरिंग रियल टाइम में हो सके। और सुरक्षा की भरपूर इंतजाम रहेगा।


जाम से मिलेगी मुक्ती,पार्किंग की सुविधा

स्टेशन के आसपास पर्याप्त रेलवे भूमि उपलब्ध होना इस परियोजना का बड़ा लाभ माना जा रहा है। दक्षिण दिशा में खुला क्षेत्र, इटाढ़ी रेलवे गुमटी से लेकर पांडेयपट्टी तक उपलब्ध भूमि के कारण बड़े स्तर पर विकास संभव है। जहा पार्किंग को बसनाने की बात आ रही है ताकि आने वाले लोगो को जाम से निजात मिल सके 

योजना के तहत:

दोपहिया और चारपहिया वाहनों के लिए विशाल पार्किंग

बेहतर एंट्री और एग्जिट पॉइंट

सर्कुलेटिंग एरिया का वैज्ञानिक विकास

इससे स्टेशन के बाहर लगने वाले जाम से राहत मिलने की उम्मीद है।

भविष्य की व्यावसायिक संभावनाएं

खाली भूमि पर भविष्य में फूड कोर्ट, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स और बजट होटल विकसित किए जाने की संभावना जताई जा रही है। इससे रेलवे के राजस्व में वृद्धि होगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। और यात्रा करने वाले यात्रियों को सहूलियत भी मिलेगी।


पर्यटन और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा

बक्सर धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण शहर है। श्रीराम सर्किट से जुड़े इस क्षेत्र में विश्वामित्र की नगरी होने के कारण पर्यटन की बड़ी संभावनाएं हैं। स्टेशन के आधुनिकीकरण से पर्यटकों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है इसके साथ ही भदौरा–गहमर के बीच रेल लाइन को गाजीपुर से जोड़ने की प्रस्तावित योजना से बक्सर का यूपी के गंगा पार क्षेत्रों से सीधा संपर्क मजबूत होगा। इससे व्यापार और आवागमन को नया आयाम मिलेगा।


जिले से सटे क्षेत्रों को लाभ

इस विकास योजना का लाभ केवल बक्सर तक सीमित नहीं रहेगा। रघुनाथपुर, डुमरांव, चौसा और दिलदारनगर जैसे आसपास के स्टेशनों के यात्रियों को भी बेहतर कनेक्टिविटी और सुविधाओं का फायदा मिलेगा। जिससे यात्रियों को यात्रा करने में सहूलियत मिलेगी। बक्सर स्टेशन का यह कायाकल्प क्षेत्रीय रेल नेटवर्क को नई पहचान देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

बदलेगा बक्सर रेलवे स्टेशन की सूरत दिखेगा एयरपोट जैसा नजारा जाने कब से होगा काम शुरू

FRK की कमी के कारण बाधित धान ख़रीददारी के मुद्दे पर माननीय प्रधानमंत्री जी को बक्सर सांसद सुधाकर सिंह ने लिखा पत्र

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M V BIHAR NEWS

PATNA/बिहार में इन दिनों FRK (फोर्टिफ़ाइड राइस कर्नेल) की गंभीर कमी के कारण धान की खरीद प्रक्रिया लगभग ठप हो चुकी है। राज्य के कई ज़िलों से लगातार यह शिकायतें मिल रही हैं कि जैसे ही FRK का स्टॉक समाप्त हुआ, PACS और अन्य क्रय केंद्रों पर धान की तौल और खरीद रोक दी गई। इसका सीधा दुष्परिणाम यह हुआ है कि किसान अपनी उपज लेकर दर-दर भटकने को मजबूर हैं और गहरे आर्थिक संकट में फँसते जा रहे हैं।

यह स्थिति केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि केंद्र और राज्य—दोनों सरकारों की संयुक्त विफलता को उजागर करती है। केंद्र सरकार ने फोर्टिफ़िकेशन नीति के तहत FRK को अनिवार्य तो कर दिया, लेकिन उसकी समय पर और पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने की कोई ठोस व्यवस्था नहीं की। वहीं बिहार सरकार भी यह सुनिश्चित करने में पूरी तरह असफल रही कि पूरे खरीद मौसम के दौरान FRK की निर्बाध उपलब्धता बनी रहे।

इस गंभीर विषय पर कल दिनांक 03.02.2026 को मेरी उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के सचिव से मुलाक़ात हुई। सचिव द्वारा यह आश्वासन दिया गया कि 15 फरवरी तक FRK की उपलब्धता सुनिश्चित कर दी जाएगी। लेकिन मेरा सवाल है कि तब तक किसानों को जो नुकसान होगा, उसकी भरपाई कौन करेगा? जिन किसानों का धान क्रय केंद्रों पर पड़ा है, जिनके सिर पर कर्ज़, पारिवारिक खर्च और अगली फसल की तैयारी का दबाव है—उनकी चिंता कौन करेगा?


उल्लेखनीय है कि बिहार में इस वर्ष धान खरीद का लक्ष्य 36.85 लाख टन निर्धारित किया गया था, जबकि अब तक केवल 18.76 लाख टन धान की ही खरीद हो पाई है। पहले जानबूझकर धान खरीद का लक्ष्य कम रखा गया और फिर जो लक्ष्य तय किया गया, उसे पूरा करने के लिए आवश्यक संसाधन और व्यवस्थाएँ तक उपलब्ध नहीं कराई गईं। यह कहना गलत नहीं होगा कि केंद्र सरकार ने बिहार के साथ लगातार दोयम दर्जे का व्यवहार अपनाया है। चाहे किसानों की आय का प्रश्न हो, MSP पर खरीद की व्यवस्था हो या FRK जैसी अनिवार्य शर्तों की पूर्ति—हर मोर्चे पर बिहार को नज़रअंदाज़ किया गया है। इसका सीधा खामियाजा बिहार के अन्नदाता भुगत रहे हैं।

किसान ने समय पर बुआई की, कठिन परिस्थितियों में फसल तैयार की और पूरी उम्मीद के साथ धान लेकर क्रय केंद्र पहुँचा। इसके बावजूद यदि सरकारी अव्यवस्था और नीतिगत असंवेदनशीलता के कारण उसकी उपज नहीं खरीदी जा रही है, तो इसमें किसान का कोई दोष नहीं है। FRK की कमी कोई प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि पूरी तरह प्रशासनिक और नीतिगत विफलता का परिणाम है।

यह भी स्पष्ट है कि FRK एक मल्टी-विटामिन पोषक तत्व है, जिसे धान कुटाई के दौरान प्रति क्विंटल चावल में एक किलो की मात्रा में मिलाया जाता है। चावल में FRK मिलाने के बाद ही उसे FRK-टैग दिया जाता है। सरकार की ओर से FRK की आपूर्ति के लिए उत्तर प्रदेश की एक कंपनी को टैग किया गया है। यह कंपनी एसएफसी को FRK उपलब्ध कराती है और एसएफसी के माध्यम से मिलरों तक पहुँचाया जाता है। दुर्भाग्यवश, टैग की गई कंपनी द्वारा एसएफसी को FRK की आपूर्ति नहीं की जा रही है, जिससे पूरी धान खरीद श्रृंखला टूट गई है।


अतः मैं केंद्र और राज्य सरकार से यह माँग करता हूँ कि FRK की पर्याप्त आपूर्ति तत्काल सुनिश्चित की जाए, धान खरीद की अवधि बढ़ाई जाए और जिन किसानों की खरीद FRK की कमी के कारण नहीं हो सकी है, उन्हें आर्थिक सुरक्षा एवं उचित मुआवज़ा दिया जाए। किसान किसी तरह की रियायत नहीं, बल्कि अपने श्रम का न्यायपूर्ण मूल्य चाहता है। यदि इस गंभीर समस्या का समाधान शीघ्र नहीं किया गया, तो यह मुद्दा आने वाले दिनों में किसानों के व्यापक असंतोष और बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी केंद्र और राज्य सरकारों की होगी।

FRK की कमी के कारण बाधित धान ख़रीददारी के मुद्दे पर माननीय प्रधानमंत्री जी को बक्सर सांसद सुधाकर सिंह ने लिखा पत्र,

माता-पिता के आशीर्वाद से सजा बाल मेले का शानदार संसार, एस.एस. कॉन्वेंट स्कूल में बच्चों ने खिलाया लज़ीज़ व्यंजन और दिखाया व्यापारिक समझ

                 

BY ADMIN 

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बक्सर / सदर प्रखंड अंतर्गत कमरपुर पंचायत के कृतपुरा गांव स्थित एस.एस. कॉन्वेंट स्कूल परिसर उस समय उल्लास, रचनात्मकता और भावनाओं से सराबोर हो उठा, जब विद्यालय में भव्य बाल मेला का आयोजन किया गया। इस मेले का उद्घाटन विद्यालय की निर्देशिका वंदना राय के बुजुर्ग सासु मां और ससुर,  श्रीमती बनारसी देवी एवं श्री विजय कुमार राय  ने संयुक्त रूप से किया।

फीता कटते ही वातावरण भावुक हो गया, जब पृष्ठभूमि में गूंज उठा गीत - “हे मात-पिता तुम्हें वंदन, जो मुझे इस दुनिया में लाया…” इस भावनात्मक क्षण ने भारतीय परंपरा में माता-पिता के सर्वोच्च स्थान को जीवंत कर दिया। विद्यालय प्रबंधन द्वारा माता-पिता को सर्वोपरि मानते हुए उन्हीं के करकमलों से उद्घाटन कराया जाना कार्यक्रम की सबसे खास और प्रेरणादायी झलक रही।


उद्घाटन के पश्चात अतिथियों ने बच्चों द्वारा लगाए गए विभिन्न स्टॉलों का निरीक्षण किया, उनके हाथों बने व्यंजनों का स्वाद लिया और बच्चों से शुद्धता व स्वच्छता से जुड़े सवाल भी किए। मेले की रौनक देखते ही बनती थी। बच्चों ने पानीपुरी, चाउमीन, बर्गर, मंचूरियन, समोसा, जलेबी, गाजर का हलवा, बिस्कुट, चिप्स, चॉकलेट आदि के आकर्षक स्टॉल लगाए थे। इन सबके बीच चाउमीन की मांग सबसे अधिक रही। खास बात यह रही कि बच्चे स्वयं ही खरीद-बिक्री की जिम्मेदारी संभालते नजर आए, जिससे उनमें आत्मविश्वास और व्यावहारिक समझ स्पष्ट दिखी।

                                         

विद्यालय की निर्देशिका वंदना राय ने बताया कि बाल मेले के आयोजन का मुख्य उद्देश्य बच्चों का सर्वांगीण विकास करना है, ताकि वे पढ़ाई के साथ-साथ मनोरंजन और बाजार की बुनियादी समझ भी हासिल कर सकें। वहीं प्रधानाध्यापक त्रिलोचन कुमार ने कहा कि बच्चों के अंदर कलात्मक और रचनात्मक विकास के लिए ऐसे आयोजन अत्यंत आवश्यक हैं और बाल मेला इसका बेहतरीन उदाहरण है।

                                     

खाने-पीने के स्टॉलों के साथ-साथ मेले में बच्चों के मनोरंजन के लिए मिकी माउस स्लाइडिंग, जंपिंग यार्ड, प्लेन स्लाइडर, झूला जैसी व्यवस्थाएं की गई थीं। इसके अलावा रंग-बिरंगे गुब्बारे, बांसुरी और तरह-तरह के खिलौनों ने मेले की रंगत को और बढ़ा दिया। छोटे से लेकर बड़े खिलौनों तक की खूब बिक्री हुई और बच्चों के चेहरों पर खुशी साफ झलकती रही।

कार्यक्रम का प्रबंधन संभाल रहीं उप निर्देशिका जिज्ञासा कुमारी ने बताया कि उम्मीद से कहीं अधिक संख्या में अभिभावक मेले में शामिल हुए। उन्होंने कार्यक्रम की सफलता का श्रेय विद्यालय परिवार, बच्चों और अभिभावकों की सामूहिक मेहनत को दिया।


बाल मेले में खुशी कुमारी, मानवी राय, साक्षी कुमारी, मोनालिका, अनुराधा, लक्ष्मी, प्रतिज्ञा, सपना, अदिति सिंह, कुमार प्रगति, अनमोल कुमार, पियूष पाठक सहित कई बच्चों ने स्टॉलों की जिम्मेदारी निभाई। शिक्षकों में लालसा मिश्रा, नूतन राय, नीलम कुमारी, प्रीति कुमारी, प्रिया कुमारी, मधु कुमारी, मिस तनु, प्रमोद कुमार, नितीश कुमार, बैजनाथ पांडेय, अनुज कुमार सहित अन्य शिक्षक-शिक्षिकाएं मौजूद रहीं।

                                       

कुल मिलाकर एस.एस. कॉन्वेंट स्कूल का यह बाल मेला न सिर्फ बच्चों की प्रतिभा और आत्मनिर्भरता का मंच बना, बल्कि माता-पिता के प्रति सम्मान, संस्कार और भावनात्मक जुड़ाव का भी सुंदर संदेश दे गया।

माता-पिता के आशीर्वाद से सजा बाल मेले का शानदार संसार, एस.एस. कॉन्वेंट स्कूल में बच्चों ने खिलाया लज़ीज़ व्यंजन और दिखाया व्यापारिक समझ

मवेशी के लिए चारा लाने गई किशोरी की करंट से झुलसकर मौत, परिजनों में मचा कोहराम।

BY AMIT KUMAR
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मुजफ्फरपुर/ जिले में एक दर्दनाक हादसे में 12 वर्षीय किशोरी की बिजली के करंट की चपेट में आने से मौत हो गई। घटना के बाद मौके पर स्थानीय ग्रामीणों और परिजनों ने जमकर हंगामा करते हुए बिजली विभाग को जिम्मेदार ठहराया और नारेबाजी की। मामला कटरा थाना क्षेत्र के तेहवारा पंचायत अंतर्गत धनवाड़ा मोहना गांव का है। मृतका की पहचान रंजीता कुमारी के रूप में हुई है।

जानकारी के अनुसार, रंजीता अपने मवेशियों के लिए चारा लाने खेत की ओर गई थी। इसी दौरान खेत के ऊपर से गुजर रहे बिजली के तार की चपेट में आ गई। बताया जा रहा है कि जंगल और झाड़ियों के कारण तार दिखाई नहीं दिया और उसके हाथ में मौजूद बांस की लग्घी बिजली के तार से सट गई, जिससे उसे जोरदार करंट लगा और वह बुरी तरह झुलस गई।
रंजीता की चीख-पुकार सुनकर ग्रामीण और परिजन मौके पर पहुंचे और आनन-फानन में उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरे गांव में मातम का माहौल है। परिजनों ने आरोप लगाया कि उनकी बच्ची की मौत के लिए बिजली विभाग जिम्मेदार है।

घटना की सूचना मिलने पर कटरा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और जांच में जुट गई। पुलिस ने बताया कि करंट से मौत की सूचना पर जांच शुरू कर दी गई है। परिजनों को समझा-बुझाकर शांत कराया गया. और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम की प्रक्रिया की जा रही है।

मवेशी के लिए चारा लाने गई किशोरी की करंट से झुलसकर मौत, परिजनों में मचा कोहराम।

मुखिया हो तो ऐसा! निजी खर्च से बनाया 10 लाख का रोड, बांटे 500 कंबल—बेबसों के बने सहारा 

BY ADMIN

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बक्सर/राजपुर –मगराव आज के समय मे हर काम के लिए लोभ हर किसी को राहत है। लेकिन बक्सर जिले में एक ऐसा भी पंचायत है जिस पंचायत के प्रतिनिधि के ऊपर यह कहावत फिट बैठती है। मुखिया हो तो ऐसा! जब जनता के लिए काम करने की बात आई तो ( आनंद प्रकाश सिंह ) ने किसी सरकारी फंड का इंतज़ार नहीं किया। उन्होंने अपने निजी पैसों से करीब 10 लाख रुपये खर्च कर पक्की सड़क का निर्माण करवा दिया। 


यही नहीं उनके द्वारा  बीते तकरीबन 11 वर्षों से कठोर सर्दी में गरीब और बेसहारा लोगों की पीड़ा समझते हुए कंबल वितरण किया जा रहा है। वही 14 जनवरी को भी 500 कंबल वितरित किए, जिससे जरूरतमंदों के चेहरों पर उम्मीद की किरण दिखाई दी। इस नेक पहल के बाद गांव के लोग मुखिया की जमकर सराहना कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जब दूसरों ने वादे किए, उनके मुखिया ने उन्हें पूरा कर दिखाया। 

कार्यक्रम के दौरान स्थानीय गणमान्य लोग, पंचायत प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। लोगों ने ऐसे जनप्रतिनिधि पर गर्व जताते हुए कहा कि “ये पहली बार है जब हमने देखा कि कोई मुखिया अपने पैसों से सड़क बनवाता है । और 500 कंबल वितरण किए जो कई परिवारों को राहत दी है। “वादे बहुत सुने थे, लेकिन काम करने वाले ऐसे मुखिया कम मिलते हैं।” सरकारी योजनाएँ आने में समय लगाती हैं, लेकिन मुखिया जी ने पहल करके मिसाल पेश कर दी।” अगर पंचायतें ऐसे नेतृत्व में काम करती रहीं तो विकास अपने आप गांव तक पहुँच जाएगा।” ऐसा नेता हर गांव में होने चाहिए।”

वही इस कार्य को करने वाले मुखिया ने कहा की जनता ने मुझे सेवा का अवसर दिया है, इसलिए यह मेरा कर्तव्य है कि उनके हर सुख-दुख में साथ रहूँ।” सड़क का निर्माण किसी दिखावे के लिए नहीं, बल्कि गांव की जरूरत थी—इसलिए हमने तुरंत काम पूरा किया।” गरीबी और ठंड को समझना होगा। अगर हम सब थोड़ा-थोड़ा भी मदद करें तो कोई बेसहारा नहीं रहेगा।”

“अगर हर पंचायत में ऐसे लोग हों तो गांवों की तस्वीर बदलते देर नहीं लगेगी।”

मुखिया हो तो ऐसा! निजी खर्च से बनाया 10 लाख का रोड, बांटे 500 कंबल—बेबसों के बने सहारा”

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