anish बक्सर जिले का एक ऐसा शक्तिपीठ जहां कुआं के पानी से स्नान करने पर खत्म होता है कुष्ठ रोग... - . "body"

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बक्सर जिले का एक ऐसा शक्तिपीठ जहां कुआं के पानी से स्नान करने पर खत्म होता है कुष्ठ रोग...


by admin

m v online bihar news/बक्सर/सिमरी/खबर जरा हट के हम बताते चले की इस धरती पर सभी शक्ति पीठो में से एक ऐसा शक्ति पीठ जिसके बारे में आज आप सभी पाठको को रूबरू करवा रहे है ! जो बक्सर जिले के सिमरी प्रखंड क्षेत्र के नियाजिपुर ग्राम में स्थित है हालांकि यह शक्ति पीठ खाफी पुराना है ! और इससे लोगो को खाफी आस्था जुडी हुई है,तो आइए इस के बारे में पूरी वस्तृत रूप से जानते है, बात करें तो नवरात्रि का समय चल रहा है और भक्तों का यहां पर काफी भीड़ देखा जा रहा है इस मंदिर में दूर-दूर से भक्त अपनी मन्नत को मांगने के लिए आया करते हैं। वही मंदिर समिति के द्वारा सरकार के दिए गए कोविड-19 गाइडलाइन का पूर्ण रूप से पालन किया जा रहा है।



यह शक्ति पीठ कैसे और कब बना...

इसके बारे में मुख्य पुजारी रामचंद्र दुबे के बड़े भाई लक्षुमन दुबे ( लहरी बाबा ) से पूछा तो उन्होंने इस के बारे में हमें बताते हुए यह कहा की यह शक्ति पीठ माँ दुर्गे की है जो की इसकी शुरुआत सन 1985 ई० में श्री काशीचौसठी मठ के श्री 108 दण्डी स्वामी श्री विश्वनाथ आश्रम जी महाराज के द्वरा इसकी नेव निर्मित कराई गयी ! जिसके बाद तक़रीबन दो साल के बाद सन 1987 ई० के फाल्गुन मास के अंजोर पंचमी को माँ दुर्गे की बैदिक मंत्रो और सहस्त्र चंडी महायज्ञ के साथ माँ के स्वरूप का स्थापना हुआ, वही उन्होंने कहा की जिस यज्ञ के मुख्य पुरोहित ऋषिदेव त्रिपाठी थे ! जो की ( b.h.u ) में आज के समय के वेदाचार्य है ! 


क्या है मंदिर के अंदर बने कुएं का महत्व...

सबसे बड़ी बात तो यह है की उस शक्ति पीठ पर एक कुआ है जिसके पानी पी लेने से सभी शारीरिक बिमारो से छुटकारा मिलती है ऐसा वहा के लोगो का कहना है,और लोग इसे मानते भी है ! जब हम ने ग्रामीणों से इसके बारे में पूछा तो उन्होंने यह बताते हुए कहा की जिस समय से यह शक्ति पीठ बना उसी समय से अब तक यहाँ पर दीप के साथ-साथ रमायण और रुद्राभिषेक हो रहा है ! वही कहे की इस शक्ति पीठ पर जो कोई अता है,और माँ से अपनी मनत मागता है उसकी मनोकामना माँ पूरी करती है ! 


मंदिर के बाहर विशाल वटवृक्ष का महत्व...

मंदिर के बाहर बना वटवृक्ष इस मंदिर का एक तो खूबसूरती बनाता है दूसरे अपने आप में कई पुरानी यादें और पुराने अस्तित्व को संजो करके रखा हुआ है। जबकि वहां उपस्थित लोगों ने बताएं कि यह मंदिर जब से बना था। उसी समय से यह वटवृक्ष यहां पर लगा हुआ है और मंदिर से पूजन अर्चन करने के बाद श्रद्धालु इस वट वृक्ष के नीचे बैठकर सुकून महसूस करते हैं।


नवरात्रि में होता है भीड...

नवरात्री के समय में यहा भक्तो की काफी भीड़ लगती है जहा तक की दुसरे राज्य व जिले से भी लोग यहाँ अपनी मनत मागने आते है! वही विवेक पाठक ने कहा की इस कोरोना जैसी भयानक महामारी से बचाव के लिए जो सरकार का निर्देश है उसे स्वीकार करते हुए इस वार की नवरात्री की पूजा की जाएगी! चन्दन पाठक,मुनु पाठक,छोटे दुबे,गोलू पाठक,चुन्नू पाठक,अन्य ग्रामीण उपस्थित थे ! वही मंदिर के बाहर हरिशंकरी पेड़ है जिसके साथ काफी धार्मिक मन्यता जुडी हुई है !

बक्सर जिले का एक ऐसा शक्तिपीठ जहां कुआं के पानी से स्नान करने पर खत्म होता है कुष्ठ रोग...

बक्सर जिले का एक ऐसा शक्तिपीठ जहां कुआं के पानी से स्नान करने पर खत्म होता है कुष्ठ रोग...


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m v online bihar news/बक्सर/सिमरी/खबर जरा हट के हम बताते चले की इस धरती पर सभी शक्ति पीठो में से एक ऐसा शक्ति पीठ जिसके बारे में आज आप सभी पाठको को रूबरू करवा रहे है ! जो बक्सर जिले के सिमरी प्रखंड क्षेत्र के नियाजिपुर ग्राम में स्थित है हालांकि यह शक्ति पीठ खाफी पुराना है ! और इससे लोगो को खाफी आस्था जुडी हुई है,तो आइए इस के बारे में पूरी वस्तृत रूप से जानते है, बात करें तो नवरात्रि का समय चल रहा है और भक्तों का यहां पर काफी भीड़ देखा जा रहा है इस मंदिर में दूर-दूर से भक्त अपनी मन्नत को मांगने के लिए आया करते हैं। वही मंदिर समिति के द्वारा सरकार के दिए गए कोविड-19 गाइडलाइन का पूर्ण रूप से पालन किया जा रहा है।



यह शक्ति पीठ कैसे और कब बना...

इसके बारे में मुख्य पुजारी रामचंद्र दुबे के बड़े भाई लक्षुमन दुबे ( लहरी बाबा ) से पूछा तो उन्होंने इस के बारे में हमें बताते हुए यह कहा की यह शक्ति पीठ माँ दुर्गे की है जो की इसकी शुरुआत सन 1985 ई० में श्री काशीचौसठी मठ के श्री 108 दण्डी स्वामी श्री विश्वनाथ आश्रम जी महाराज के द्वरा इसकी नेव निर्मित कराई गयी ! जिसके बाद तक़रीबन दो साल के बाद सन 1987 ई० के फाल्गुन मास के अंजोर पंचमी को माँ दुर्गे की बैदिक मंत्रो और सहस्त्र चंडी महायज्ञ के साथ माँ के स्वरूप का स्थापना हुआ, वही उन्होंने कहा की जिस यज्ञ के मुख्य पुरोहित ऋषिदेव त्रिपाठी थे ! जो की ( b.h.u ) में आज के समय के वेदाचार्य है ! 


क्या है मंदिर के अंदर बने कुएं का महत्व...

सबसे बड़ी बात तो यह है की उस शक्ति पीठ पर एक कुआ है जिसके पानी पी लेने से सभी शारीरिक बिमारो से छुटकारा मिलती है ऐसा वहा के लोगो का कहना है,और लोग इसे मानते भी है ! जब हम ने ग्रामीणों से इसके बारे में पूछा तो उन्होंने यह बताते हुए कहा की जिस समय से यह शक्ति पीठ बना उसी समय से अब तक यहाँ पर दीप के साथ-साथ रमायण और रुद्राभिषेक हो रहा है ! वही कहे की इस शक्ति पीठ पर जो कोई अता है,और माँ से अपनी मनत मागता है उसकी मनोकामना माँ पूरी करती है ! 


मंदिर के बाहर विशाल वटवृक्ष का महत्व...

मंदिर के बाहर बना वटवृक्ष इस मंदिर का एक तो खूबसूरती बनाता है दूसरे अपने आप में कई पुरानी यादें और पुराने अस्तित्व को संजो करके रखा हुआ है। जबकि वहां उपस्थित लोगों ने बताएं कि यह मंदिर जब से बना था। उसी समय से यह वटवृक्ष यहां पर लगा हुआ है और मंदिर से पूजन अर्चन करने के बाद श्रद्धालु इस वट वृक्ष के नीचे बैठकर सुकून महसूस करते हैं।


नवरात्रि में होता है भीड...

नवरात्री के समय में यहा भक्तो की काफी भीड़ लगती है जहा तक की दुसरे राज्य व जिले से भी लोग यहाँ अपनी मनत मागने आते है! वही विवेक पाठक ने कहा की इस कोरोना जैसी भयानक महामारी से बचाव के लिए जो सरकार का निर्देश है उसे स्वीकार करते हुए इस वार की नवरात्री की पूजा की जाएगी! चन्दन पाठक,मुनु पाठक,छोटे दुबे,गोलू पाठक,चुन्नू पाठक,अन्य ग्रामीण उपस्थित थे ! वही मंदिर के बाहर हरिशंकरी पेड़ है जिसके साथ काफी धार्मिक मन्यता जुडी हुई है !