anish बच्चों का पूर्ण टीकाकरण और पौष्टिक आहार , चमकी/दिमागी बुखार जैसे कई रोगों पर वार - . "body"

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 बच्चों का पूर्ण टीकाकरण और पौष्टिक आहार , चमकी/दिमागी बुखार जैसे कई रोगों पर वार 



- गंदा पानी और गंदगी रोग के जीवाणु के कारण , आस-पास रखें सफाई 

By amit kumar

M v online bihar news/बक्सर, 23 जून|  कोरोना संक्रमण की संभावित लहर ने सभी को चिंतित  किया हुआ है। ऐसे समय में बारिश के  गंदे पानी में पनपे मच्छरों से बच्चों को  जैपनीज इंसेफलाइटिस या चमकी बुखार जैसे  दूसरे रोग से ग्रस्त होने की संभावना भी बढ़ गयी है। ऐसे में  माता-पिता को  उनके प्रति सतर्क रहने  और सेहत तथा खानपान का ख्याल रखने की जरूरत काफी बढ़ जाती है। 

दिमागी बुखार का कारण : 

जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ शैलेन्द्र कुमार ने बताया चमकी या दिमागी बुखार मौसम के बदलाव और क्यूलेक्स नामक मच्छर के काटने से वायरस के   शरीर में प्रवेश करने से होता है । इससे बच्चे के दिमाग पर असर पड़ता है औरपूरी तरह अचेत हो जाता है तथा शरीर में रह रहकर झटके आते हैं। बच्चे को बुखार आने से उसके शारीरिक और मानसिक स्थिति पर गौर करें और यदि ये लक्षण नजर आए –


अचानक फ्लू जैसे तेज  बुखार आना 

ठंड लगना या शरीर में कंपकपी होना

शरीर पर लाल चकते पड़ना 

शरीर  और हाथ पैर में थकान और अकड़न होना 

उल्टी या चक्कर जैसा महसूस होना 

आँखें चढ़ जाना या उलट जाना 


तो इसे चमकी बुखार के लक्षण मानें और बिना देर किए डॉक्टर की सलाह लें। देर न करें क्योंकि यह बुखार बच्चे के लिए काफी नुकसानदायक हैऔर  इलाज के अभाव में उसकी जान भी जा सकती है।

बेहतर खान-पान एवं टीकाकरण से बचाव है संभव :चमकी बुखार से बचाने के लिए अपने बच्चों का टीकाकरण जरूर करवाएँ। इसका  पहला टीका 9 से 12 महीने तक के बच्चों को एवं बूस्टर डोज यानि दूसरी  ख़ुराक1 से 2 वर्ष में दी  जाती  है। इसके अलावा  बच्चों के खान-पान  का पूरा ध्यान रखें क्योंकि खाली पेट रहने से  बच्चों में इसके गिरफ्त में आने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए उनके आहार में पौष्टिक वस्तुओं को शामिल करें। 

बचाव के लिए क्या करें: 

बुखार आने पर शरीर को कपड़े से पोंछें ताकि बुखार उतर सके

चमकी या झटके आने पर नाक या मुँह बिलकुल बंद ना करें 

चमकी बुखार आने से बच्चों में शुगर लेवल कम जाता है इसलिए कोई मीठी चीज जैसे गुड या चीनी का शर्बत दें 

बच्चों को कभी भी खाली पेट न रहने दें विशेष तौर पर रात को खाली पेट नहीं सोने दें

बाहर के जंक फूड की अपेक्षा घर के बने ताजा गरम खाने को प्राथमिकता दें 

बच्चों के सोने के दौरान मच्छरदानी का इस्तेमाल किया जाना चाहिए. शाम के स्वयं में मच्छरों से बचने के लिए फूल आस्तीन वाले कपड़े पहनें 

बच्चे के शारीरिक साफ सफाई का ध्यान रखें और सौचालय के इस्तेमाल के बाद साबुन पानी का इस्तेमाल से हाथों को जीवाणु मुक्त रखने का अभ्यास डालें 

आसपास जलजमाव या गंदगी न पनपने दें और साफ सफाई रखें 

बुखार आने पर तुरंत मुफ्त एबुंलेंस सेवा 102 को डायल करें और नजदीकी सरकारी अस्पताल ले जाएँ या किसी भी डॉक्टर से तुरंत सलाह लें

बच्चों का पूर्ण टीकाकरण और पौष्टिक आहार , चमकी/दिमागी बुखार जैसे कई रोगों पर वार

 बच्चों का पूर्ण टीकाकरण और पौष्टिक आहार , चमकी/दिमागी बुखार जैसे कई रोगों पर वार 



- गंदा पानी और गंदगी रोग के जीवाणु के कारण , आस-पास रखें सफाई 

By amit kumar

M v online bihar news/बक्सर, 23 जून|  कोरोना संक्रमण की संभावित लहर ने सभी को चिंतित  किया हुआ है। ऐसे समय में बारिश के  गंदे पानी में पनपे मच्छरों से बच्चों को  जैपनीज इंसेफलाइटिस या चमकी बुखार जैसे  दूसरे रोग से ग्रस्त होने की संभावना भी बढ़ गयी है। ऐसे में  माता-पिता को  उनके प्रति सतर्क रहने  और सेहत तथा खानपान का ख्याल रखने की जरूरत काफी बढ़ जाती है। 

दिमागी बुखार का कारण : 

जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ शैलेन्द्र कुमार ने बताया चमकी या दिमागी बुखार मौसम के बदलाव और क्यूलेक्स नामक मच्छर के काटने से वायरस के   शरीर में प्रवेश करने से होता है । इससे बच्चे के दिमाग पर असर पड़ता है औरपूरी तरह अचेत हो जाता है तथा शरीर में रह रहकर झटके आते हैं। बच्चे को बुखार आने से उसके शारीरिक और मानसिक स्थिति पर गौर करें और यदि ये लक्षण नजर आए –


अचानक फ्लू जैसे तेज  बुखार आना 

ठंड लगना या शरीर में कंपकपी होना

शरीर पर लाल चकते पड़ना 

शरीर  और हाथ पैर में थकान और अकड़न होना 

उल्टी या चक्कर जैसा महसूस होना 

आँखें चढ़ जाना या उलट जाना 


तो इसे चमकी बुखार के लक्षण मानें और बिना देर किए डॉक्टर की सलाह लें। देर न करें क्योंकि यह बुखार बच्चे के लिए काफी नुकसानदायक हैऔर  इलाज के अभाव में उसकी जान भी जा सकती है।

बेहतर खान-पान एवं टीकाकरण से बचाव है संभव :चमकी बुखार से बचाने के लिए अपने बच्चों का टीकाकरण जरूर करवाएँ। इसका  पहला टीका 9 से 12 महीने तक के बच्चों को एवं बूस्टर डोज यानि दूसरी  ख़ुराक1 से 2 वर्ष में दी  जाती  है। इसके अलावा  बच्चों के खान-पान  का पूरा ध्यान रखें क्योंकि खाली पेट रहने से  बच्चों में इसके गिरफ्त में आने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए उनके आहार में पौष्टिक वस्तुओं को शामिल करें। 

बचाव के लिए क्या करें: 

बुखार आने पर शरीर को कपड़े से पोंछें ताकि बुखार उतर सके

चमकी या झटके आने पर नाक या मुँह बिलकुल बंद ना करें 

चमकी बुखार आने से बच्चों में शुगर लेवल कम जाता है इसलिए कोई मीठी चीज जैसे गुड या चीनी का शर्बत दें 

बच्चों को कभी भी खाली पेट न रहने दें विशेष तौर पर रात को खाली पेट नहीं सोने दें

बाहर के जंक फूड की अपेक्षा घर के बने ताजा गरम खाने को प्राथमिकता दें 

बच्चों के सोने के दौरान मच्छरदानी का इस्तेमाल किया जाना चाहिए. शाम के स्वयं में मच्छरों से बचने के लिए फूल आस्तीन वाले कपड़े पहनें 

बच्चे के शारीरिक साफ सफाई का ध्यान रखें और सौचालय के इस्तेमाल के बाद साबुन पानी का इस्तेमाल से हाथों को जीवाणु मुक्त रखने का अभ्यास डालें 

आसपास जलजमाव या गंदगी न पनपने दें और साफ सफाई रखें 

बुखार आने पर तुरंत मुफ्त एबुंलेंस सेवा 102 को डायल करें और नजदीकी सरकारी अस्पताल ले जाएँ या किसी भी डॉक्टर से तुरंत सलाह लें