anish बारिश की नमी और बाढ़ की गंदगी बढ़ा सकती है अस्थमा,संक्रमण के मद्देनजर रहें सतर्क - . "body"

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 बारिश की नमी और बाढ़ की गंदगी बढ़ा सकती है अस्थमा,संक्रमण के मद्देनजर रहें सतर्क 


- नमी से दूर और स्वच्छता का साथ, लाये सेहत की सौगात 

By amit kumar

M v online bihar news/बक्सर,  बरसात के जमे पानी से घर- बाहर सब तरफ नमी और सीलन बढ़ गयी है| यह जमा हुआ पानी अपने साथ गंदगी और मच्छर भी लाता है। ऐसा माहौल अस्थमा के मरीजों के लिए असुरक्षित है। इस साल के संक्रमण प्रसार के लक्षणों में ऑक्सीज़न की कमी सबसे ज्यादा गंभीर थी जिससे कई लोगों को मृत्यु भी हो गयी है। अतएव इससे पहले  यह मौसम अस्थमा को बढ़ाकर अटैक या कोविड-19 संक्रमण के दायरे में लाए, सावधानी बरतें और सुरक्षित रहें।

अस्थमा के मरीज को अपनी स्थिति को लेकर सतर्कता जरूरी

जिला सिविल सर्जन डॉ. जितेंद्र नाथ ने बताया वर्तमान में मौसम में बढ़ी हुई नमी और उसके कारण फंगस में काफी बढ़ोत्तरी हुई है। इससे अस्थमा के अटैक की संभावना बढ़ जाती है। बारिश के कारण हवा में प्रदूषण का स्तर भी बढ़ जाता है। कोरोना के कारण पहले ही स्थिति गंभीर है। यह स्थिति अस्थमा के रोगियों के लिए नुकसानदेह है। साथ ही, मानसून के कुछ वायरल इंफेक्शन भी बढ़ जाते हैं। इससे भी अस्थमा की समस्या बढ़ती है।

अस्थमा रोगी  दवा के नियमित सेवन में न करें लापरवाही: 

अधिकांश अस्थमा के मरीजों को उनकी दवा या इन्हेलर नियमित तौर पर लेना होता है।  नियमित दवाई लेने से कुछ समय बाद (यदि गंभीर नहीं हुआ तो) किसी-किसी मरीज में अस्थमा के लक्षण भी धीरे धीरे खत्म हो जाते हैं। इसलिए डॉक्टर ने अगर नियमित दवा खाने और इन्हेलर इस्तेमाल की सलाह दी है तो तो लापरवाही न बरतें और इस पर अमल करें। कोरोना काल  को देखते हुये हम यदि अपनी  सेहत को लेकर ज्यादा जोखिम ना उठाएँ तो वही बेहतर विकल्प है। अतएव दवा का एक भी डोज ना छूटने पाये इसका खास ध्यान रखें। 


सुबह की ताजी शुद्ध हवा और हल्का भोजन हैं  बेहतर औषधि :  

सिविल सर्जन ने बताया सुबह की ताजी और शुद्ध हवा सबके लिए उपकारी है। विशेष तौर पर अस्थमा रोगियों को तो शुद्ध हवा सबसे ज्यादा आवश्यक है। इसलिए बाहर निकलना संभव नहीं तब भी बालकनी या छत पर टहलें और खुली और ताजी हवा को अंदर लें (इन्हेल) करें। साथ ही  पर्याप्त रोशनी, ताजे और शुद्ध पेयजल का भरपूर इस्तेमाल करना चाहिए। अस्थमा के मरीजों को  देर से पचने वाले भोजन की अपेक्षा हल्का और भूख भर भोजन करना चाहिए ताकि सांस लेने में परेशानी ना हो। ऐसे मरीज भोजन धीरे-धीरे एवं खूब चबाकर खाएं और ज्यादा से ज्यादा पानी पीयें। शरीर में एसिड पैदा करने वाली चीजें जैसे कार्बोहाइड्रेटस, फैट्स और प्रोटीन का इस्तेमाल कम मात्रा में करके हरी सब्जियां, अंकुरित अनाज और सलाद अवश्य शामिल करें। 

रखें इन बातों का ध्यान, न होंगे अस्थमा से परेशान  : 

मानसिक तनाव से बचें अन्यथा अस्थमा अटैक की संभावना बढ़ जाएगी 

अपने घर को नमी और गंदगी से मुक्त करें और सूखा रखें 

शौचालय को नियमित साफ और सीलन मुक्त रखें 

घर में यदि एक्जॉस्ट फैन है तो उसका उपयोग कर घर में नमी न होने दें 

नियमित अनुलोम- विलोम जैसे प्राणायाम करें ताकि शरीर में ऑक्सीज़न की कमी न हो 

सोते समय मोटे तकिया का इस्तेमाल करें ताकि अस्थमा की समस्या से राहत मिले

बारिश की नमी और बाढ़ की गंदगी बढ़ा सकती है अस्थमा,संक्रमण के मद्देनजर रहें सतर्क

 बारिश की नमी और बाढ़ की गंदगी बढ़ा सकती है अस्थमा,संक्रमण के मद्देनजर रहें सतर्क 


- नमी से दूर और स्वच्छता का साथ, लाये सेहत की सौगात 

By amit kumar

M v online bihar news/बक्सर,  बरसात के जमे पानी से घर- बाहर सब तरफ नमी और सीलन बढ़ गयी है| यह जमा हुआ पानी अपने साथ गंदगी और मच्छर भी लाता है। ऐसा माहौल अस्थमा के मरीजों के लिए असुरक्षित है। इस साल के संक्रमण प्रसार के लक्षणों में ऑक्सीज़न की कमी सबसे ज्यादा गंभीर थी जिससे कई लोगों को मृत्यु भी हो गयी है। अतएव इससे पहले  यह मौसम अस्थमा को बढ़ाकर अटैक या कोविड-19 संक्रमण के दायरे में लाए, सावधानी बरतें और सुरक्षित रहें।

अस्थमा के मरीज को अपनी स्थिति को लेकर सतर्कता जरूरी

जिला सिविल सर्जन डॉ. जितेंद्र नाथ ने बताया वर्तमान में मौसम में बढ़ी हुई नमी और उसके कारण फंगस में काफी बढ़ोत्तरी हुई है। इससे अस्थमा के अटैक की संभावना बढ़ जाती है। बारिश के कारण हवा में प्रदूषण का स्तर भी बढ़ जाता है। कोरोना के कारण पहले ही स्थिति गंभीर है। यह स्थिति अस्थमा के रोगियों के लिए नुकसानदेह है। साथ ही, मानसून के कुछ वायरल इंफेक्शन भी बढ़ जाते हैं। इससे भी अस्थमा की समस्या बढ़ती है।

अस्थमा रोगी  दवा के नियमित सेवन में न करें लापरवाही: 

अधिकांश अस्थमा के मरीजों को उनकी दवा या इन्हेलर नियमित तौर पर लेना होता है।  नियमित दवाई लेने से कुछ समय बाद (यदि गंभीर नहीं हुआ तो) किसी-किसी मरीज में अस्थमा के लक्षण भी धीरे धीरे खत्म हो जाते हैं। इसलिए डॉक्टर ने अगर नियमित दवा खाने और इन्हेलर इस्तेमाल की सलाह दी है तो तो लापरवाही न बरतें और इस पर अमल करें। कोरोना काल  को देखते हुये हम यदि अपनी  सेहत को लेकर ज्यादा जोखिम ना उठाएँ तो वही बेहतर विकल्प है। अतएव दवा का एक भी डोज ना छूटने पाये इसका खास ध्यान रखें। 


सुबह की ताजी शुद्ध हवा और हल्का भोजन हैं  बेहतर औषधि :  

सिविल सर्जन ने बताया सुबह की ताजी और शुद्ध हवा सबके लिए उपकारी है। विशेष तौर पर अस्थमा रोगियों को तो शुद्ध हवा सबसे ज्यादा आवश्यक है। इसलिए बाहर निकलना संभव नहीं तब भी बालकनी या छत पर टहलें और खुली और ताजी हवा को अंदर लें (इन्हेल) करें। साथ ही  पर्याप्त रोशनी, ताजे और शुद्ध पेयजल का भरपूर इस्तेमाल करना चाहिए। अस्थमा के मरीजों को  देर से पचने वाले भोजन की अपेक्षा हल्का और भूख भर भोजन करना चाहिए ताकि सांस लेने में परेशानी ना हो। ऐसे मरीज भोजन धीरे-धीरे एवं खूब चबाकर खाएं और ज्यादा से ज्यादा पानी पीयें। शरीर में एसिड पैदा करने वाली चीजें जैसे कार्बोहाइड्रेटस, फैट्स और प्रोटीन का इस्तेमाल कम मात्रा में करके हरी सब्जियां, अंकुरित अनाज और सलाद अवश्य शामिल करें। 

रखें इन बातों का ध्यान, न होंगे अस्थमा से परेशान  : 

मानसिक तनाव से बचें अन्यथा अस्थमा अटैक की संभावना बढ़ जाएगी 

अपने घर को नमी और गंदगी से मुक्त करें और सूखा रखें 

शौचालय को नियमित साफ और सीलन मुक्त रखें 

घर में यदि एक्जॉस्ट फैन है तो उसका उपयोग कर घर में नमी न होने दें 

नियमित अनुलोम- विलोम जैसे प्राणायाम करें ताकि शरीर में ऑक्सीज़न की कमी न हो 

सोते समय मोटे तकिया का इस्तेमाल करें ताकि अस्थमा की समस्या से राहत मिले