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लॉक डाउन की मार झेलने के बाद गांव पर ही मूंग की खेती कर किसानों के प्रेरणा स्रोत बने गोपाल जी तिवारी


By admin

M v online bihar news/buxar/बिहार में जहां एक तरफ कोरोना जैसी वैश्विक महामारी से बिहार ही नहीं बल्कि पूरे भारत के लोगों का जीना हराम कर दिया है। जबकि इस महामारी से भयभीत होकर के लोग शाहर को छोड़ गांव की तरफ रुख कर रहे हैं । और गांव में ही अपना और अपने परिवार की भरण पोषण की सुविधा करने में जुट रहे हैं। एक ऐसा ही कहानी बक्सर जिले के सिमरी प्रखंड अंतर्गत पढ़ने वाले आशा पंडरी गांव के रहने वाले गोपाल जी तिवारी की है।


क्या थी इनकी कहानी

पूरे भारत में कोरोना ने दस्तक दिया और लोग शाहर को छोड़ गांव की तरफ पलायन करने लगे। तो शहर में काम करने वाले गोपाल जी तिवारी पिता -लल्लू तिवारी ने इस महामारी का मार पिछले साल झेले हुए थे। जिसके बाद उन्होंने अपने मन में ठाना की अब मुझे शहर में नहीं जाना है। क्या हम अपने गांव की मिट्टी पर सोना नहीं उगा सकते यही बात सोच कर के उन्होंने गांव में ही रहने का फैसला किया और अपने गांव के पुश्तैनी जमीन पर ऑर्गेनिक मूंग की खेती करना शुरू कर दिया और आज वह तकरीबन 1 एकड़ में मूंग की खेती किए हुए हैं। और लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुके हैं।


क्या कहे वो

जब हमने उनसे बात की तो उन्होंने बताया कि हम शहर में काम कर रहे थे तभी लॉकडाउन लगा और हमें कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा हालांकि बड़ी मशक्कत के बाद मैं गांव पहुंचा और गांव पर ही रहने का फैसला किया एक दिन मैंने सोचा कि क्या पंजाब और हरियाणा जैसे मेरी खेत की मिट्टी नहीं बन सकती और उसी दिन मैंने ठान लिया कि अब मुझे शहर नहीं जाना है जिसके बाद मैं अपनी पुश्तैनी जमीन पर ऑर्गेनिक मूंग की खेती करना शुरू किया और आज 1 एकड़ में खेती कर रहा हूं । हालांकि सरकार की तरफ से हमें कोई सरकारी अनुदान नहीं मिला है।

लॉक डाउन की मार झेलने के बाद गांव पर ही मूंग की खेती कर किसानों के प्रेरणा स्रोत बने गोपाल जी तिवारी



लॉक डाउन की मार झेलने के बाद गांव पर ही मूंग की खेती कर किसानों के प्रेरणा स्रोत बने गोपाल जी तिवारी


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M v online bihar news/buxar/बिहार में जहां एक तरफ कोरोना जैसी वैश्विक महामारी से बिहार ही नहीं बल्कि पूरे भारत के लोगों का जीना हराम कर दिया है। जबकि इस महामारी से भयभीत होकर के लोग शाहर को छोड़ गांव की तरफ रुख कर रहे हैं । और गांव में ही अपना और अपने परिवार की भरण पोषण की सुविधा करने में जुट रहे हैं। एक ऐसा ही कहानी बक्सर जिले के सिमरी प्रखंड अंतर्गत पढ़ने वाले आशा पंडरी गांव के रहने वाले गोपाल जी तिवारी की है।


क्या थी इनकी कहानी

पूरे भारत में कोरोना ने दस्तक दिया और लोग शाहर को छोड़ गांव की तरफ पलायन करने लगे। तो शहर में काम करने वाले गोपाल जी तिवारी पिता -लल्लू तिवारी ने इस महामारी का मार पिछले साल झेले हुए थे। जिसके बाद उन्होंने अपने मन में ठाना की अब मुझे शहर में नहीं जाना है। क्या हम अपने गांव की मिट्टी पर सोना नहीं उगा सकते यही बात सोच कर के उन्होंने गांव में ही रहने का फैसला किया और अपने गांव के पुश्तैनी जमीन पर ऑर्गेनिक मूंग की खेती करना शुरू कर दिया और आज वह तकरीबन 1 एकड़ में मूंग की खेती किए हुए हैं। और लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुके हैं।


क्या कहे वो

जब हमने उनसे बात की तो उन्होंने बताया कि हम शहर में काम कर रहे थे तभी लॉकडाउन लगा और हमें कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा हालांकि बड़ी मशक्कत के बाद मैं गांव पहुंचा और गांव पर ही रहने का फैसला किया एक दिन मैंने सोचा कि क्या पंजाब और हरियाणा जैसे मेरी खेत की मिट्टी नहीं बन सकती और उसी दिन मैंने ठान लिया कि अब मुझे शहर नहीं जाना है जिसके बाद मैं अपनी पुश्तैनी जमीन पर ऑर्गेनिक मूंग की खेती करना शुरू किया और आज 1 एकड़ में खेती कर रहा हूं । हालांकि सरकार की तरफ से हमें कोई सरकारी अनुदान नहीं मिला है।