जल जीवन हरियाली योजना का सिमरी प्रखंड में हुआ बंदरबांट
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M v online Bihar news/बक्सर/केंद्र सरकार और बिहार सरकार के संयुक्त रूप से चलाई जा रही जलजीवन हरियाली योजना पूरी तरह से असफल दिखाई दे रही है। इस कार्यक्रम के तहत बक्सर के सभी प्रखण्ड में मनरेगा योजना के तहत वृक्षारोपण सहित तलाब खुदाई सहित अन्य कार्य योजना को उतारने का प्रयास किया गया। लेकिन सरकारी बाबु अपनी आकांठ को भरने के लिए पंचायत प्रतिनिधियों के साथ इस योजना में जमकर लूट खसूट कर रहे है। वही इस योजना के महता की बात करे तो एक पेड़ साल में 20 किलो धूल सोखता है और 700 किलो जीवनदायनी प्राण वायु (ऑक्सीजन) छोड़ता है जबकि 20 हजार किलो कार्बन डाइऑक्साइड को ग्रहण भी करता है ।
गर्मियों में एक पेड़ के पास सामान्य से लगभग 4 डिग्री कम तापमान रहता है। इस तरह घर के पास 10 पेड़ लगे हों आस पास के मनुष्यों की उम्र सात साल तक बढ़ जाती है । पर्यावरण संतुलन, पर्याप्त जल और हरित आवरण बढ़ाने के लिए राज्य में जल-जीवन-हरियाली अभियान शुरू किया गया है। 2022 तक तीन वर्षों में जल जीवन हरियाली योजना में करीब 24 हजार 524 करोड़ खर्च होगा । यह योजना सभी प्रखंडों व पंचायतों के लिए है। मनरेगा के तहत पिछले दो वर्षों में अभियान चला कर 1 करोड़ पौधे लगाए गए। पर्यावरण, वन व जलवायु परिवर्तन विभाग के साथ मिल कर 2019-20 में लगभग 1 करोड़ 25 लाख पौधे लगाए गए।
यह है धरातल का काम
लेकिन बात करें सिमरी प्रखंड की तो यहाँ मनरेगा पंचायत प्रतिनिधि और सम्बंधित सरकारी बाबु के लिए कामधेनु साबित हो रहा है। यहां जलजीवन हरियाली योजना कुछ पंचायत में देखने को मिल रहा जबकि कई पंचायत में तो वृक्षारोपण और तलाब खुदाई कागजो पर ही कर दिया गया है । धरातल की हकीकत कुछ और ही बया कर रही है ,मनरेगा योजना के तहत पूरे 20 पंचायत के सिमरी प्रखण्ड में करीब चालीस हजार के करीब जाबकार्ड धारक है परन्तु किसी को सौ दिन का कार्य इस विभाग से नही मिलता है । प्रतिनिधि और सरकारी बाबु को पैसों की इतनी भूख रहती है कि मजदूरों के हक के पैसे भी मशीनों से काम करवाकर उठा लेते है । जाच किया जाए तो इस प्रखण्ड में कुछ मजदूर ऐसे मिलेंगे जो कभी अपने खेतों में भी कुदाल नही उठाए होंगे । यह धरातल की हकीकत है । जिसे बिहार न्यूज़ ने पड़ताल कर के देखा है अब अपने पाठकों को दिखाना चाहते है।
-सीमेंटेड पिलड और तार से होता है धिराव
मनरेगा योजना के तहत 20 पंचायत में वृक्षारोपण के नाम पर खाना पूर्ति किया गया है। निजी जमीन हो या सरकारी जमीन जहां पर भी वृक्षारोपण हुआ है उसकी स्थित कुछ इस तरह है ,बिहार न्यूज़ ने अपने कैमरे में जो तस्वीर को खिंचा है वो सिमरी प्रखण्ड के ही पंचायत की तस्वीर है जो चीख चीख कर यह कह रही है यहाँ तो केवल वृक्षारोपण के नाम पर केवल लूट खसूट हुआ है। न जमीन पर पेड़ है न हरियाली यहां तो कुछ और ही है मनरेगा के बोर्ड दिखाई तो दिया लेकिन एक भी पौधे नही दिखे । हैरान होने की बात नही है इस खेत मे गेंहू के फसल को उगाया गया था ,यही नही दूसरी योजना को देखा गया तो वहां कुछ और ही मिला पेड़ के बदले प्याज यही हकीकत है मनरेगा का और जल जीवन हरियाली का । जब इसके बारे में मनरेगा विभाग के अधिकारियों से पूछा जाता है तो वह इसके बारे में आखिर क्यों कुछ नहीं हुआ ,प्रश्न पूछने वाले मीडिया से ही उतर पाने की चेस्टा करते है । वही इस जीवन हरियाली योजना की सफलता के लिए ग्रामीण विकास, पर्यावरण वन व जलवायु परिवर्तन, जल संसाधन, राजस्व व भूमि सुधार, लघु जल संसाधन, नगर विकास, पीएसईडी, कृषि, भवन, जल संसाधन, पशुपालन, शिक्षा, स्वास्थ्य, पंचायती राज, ऊर्जा, व सूचना व जनसंपर्क सहित 15 विभाग शामिल हैं।
यह योजना है शामिल
आहर, पोखर, छोटी नदियों, पुराने कुंआ को सुदृढ़ किया जाएगा। चापाकल, कुंआ सरकारी भवन में जल संचय के लिए रेन वाटर हारवेस्टिंग वृक्षारोपण आदि शामिल है।





