anish गर्मी बढ़ने के साथ ही बढ़ी डायरिया की संभावना, अधिक से अधिक करें तरल पदार्थ का सेवन - . "body"

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गर्मी बढ़ने के साथ ही बढ़ी डायरिया की संभावना, अधिक से अधिक करें तरल पदार्थ का सेवन


- गृह भ्रमण के दौरान आशाएं घर-घर जाकर लोगों को दस्त के विषय में करेंगी जागरूक

By amit kumar

M v online Bihar news/बक्सर, 02 मार्च | जिले में धीरे धीरे गर्मी बढ़ने लगी है। चिलचिलाती धूप के कारण दोपहर में सड़कों और लोगों का आवागमन कम होने लगा है। मौसम में इस बदलाव के साथ ही डायरिया की संभावना भी बढ़ने लगी है। इन महीनों डायरिया से ग्रसित होने वाले बच्चों की संख्या बढ़ने लगती है। इसे देखते हुए स्वास्थ्य विभाग लोगों को जागरूक करने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए सामुदायिक स्तर पर दस्त को लेकर लोगों को जागरूक करने की प्रमुख ज़िम्मेदारी आशाओं को दी गयी है। इस क्रम में गृह भ्रमण के दौरान आशाएं घर-घर जाकर लोगों को दस्त के विषय में जागरूक भी करेंगी। जिला के अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी सह सीडीओ डॉ. नरेश कुमार ने बताया कि डायरिया से होने वाली शिशु एवं बाल मृत्यु दर में कमी लाने, सामुदायिक स्तर पर ओआरएस एवं जिंक के प्रयोग से ही जिले को डाइरिया से मुक्त किया जा सकता है। भोजन और पानी को ढक कर रखना और साफ सफाई का ख्याल रखना बहुत जरूरी है, ताकि डाइरिया से बचा जा सके।

पांच वर्ष तक के बच्चों के अभिभावकों को किया जाएगा जागरूक :

एसीएमओ डॉ. नरेश कुमार ने बताया आशा अपने क्षेत्र के सभी पांच वर्ष से छोटे बच्चों के अभिभावकों को दस्त के बारे में जानकरी देंगी एवं इसकी  रोकथाम के लिए ओरल रिहाइड्रेशन सौलूशन (ओआरएस) के इस्तेमाल के लिए प्रेरित करेंगी । साथ ही, संबंधित स्वास्थ्य केन्द्रों के एएनएम एवं अन्य स्वास्थ्य कर्मी दस्त के लक्षणों एवं इसकी रोकथाम के विषय में लोगों को जागरूक करेंगे। उन्होंने बताया कि 45 फीट से कम गहरे बने हुए चापाकलों का पानी संक्रमित होता है। जिसके पानी के सेवन करने से दस्त होने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए 45 फीट से अधिक गहरे बने हुए चापाकलों का ही पानी बच्चों को देना चाहिए। इसके अलावा संग्रहित पानी के जैविक संक्रमण को समाप्त करने के लिए क्लोरीन का इस्तेमाल करना चाहिए।

लक्षणों की  नहीं करें अनदेखी  :

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार बच्चों में 24 घंटे के दौरान तीन या उससे अधिक बार पानी जैसा दस्त आना डायरिया है। डायरिया जीवाणु व विषाणु  संक्रमण के कारण तो होता ही है परंतु सबसे सामान्य कारण है प्रदूषित पानी, खान-पान में गड़बड़ी और आंत में संक्रमण। डायरिया से  शरीर में पानी की कमी हो जाती है जिसे डीहाईड्रेशन कहते हैं। इससे शरीर में कमजोरी आ जाती है और अगर समय पर इलाज न मिले तो पीड़ित की मृत्यु भी हो सकती है। डायरिया के ये लक्ष्ण अगर किसी बच्चे में दिखाई दे  तो उसे तत्काल स्वास्थ्य केंद्र पर ले जाना चाहिए।

डायरिया के लक्षण :

- पानी जैसा लगातार मल का होना 

- बार बार उल्टी होना 

- अत्यधिक प्यास का लगना 

- पानी न पी पाना 

- दस्त के साथ बुखार का होना 

- मल में खून आना

गर्मी बढ़ने के साथ ही बढ़ी डायरिया की संभावना, अधिक से अधिक करें तरल पदार्थ का सेवन

गर्मी बढ़ने के साथ ही बढ़ी डायरिया की संभावना, अधिक से अधिक करें तरल पदार्थ का सेवन


- गृह भ्रमण के दौरान आशाएं घर-घर जाकर लोगों को दस्त के विषय में करेंगी जागरूक

By amit kumar

M v online Bihar news/बक्सर, 02 मार्च | जिले में धीरे धीरे गर्मी बढ़ने लगी है। चिलचिलाती धूप के कारण दोपहर में सड़कों और लोगों का आवागमन कम होने लगा है। मौसम में इस बदलाव के साथ ही डायरिया की संभावना भी बढ़ने लगी है। इन महीनों डायरिया से ग्रसित होने वाले बच्चों की संख्या बढ़ने लगती है। इसे देखते हुए स्वास्थ्य विभाग लोगों को जागरूक करने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए सामुदायिक स्तर पर दस्त को लेकर लोगों को जागरूक करने की प्रमुख ज़िम्मेदारी आशाओं को दी गयी है। इस क्रम में गृह भ्रमण के दौरान आशाएं घर-घर जाकर लोगों को दस्त के विषय में जागरूक भी करेंगी। जिला के अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी सह सीडीओ डॉ. नरेश कुमार ने बताया कि डायरिया से होने वाली शिशु एवं बाल मृत्यु दर में कमी लाने, सामुदायिक स्तर पर ओआरएस एवं जिंक के प्रयोग से ही जिले को डाइरिया से मुक्त किया जा सकता है। भोजन और पानी को ढक कर रखना और साफ सफाई का ख्याल रखना बहुत जरूरी है, ताकि डाइरिया से बचा जा सके।

पांच वर्ष तक के बच्चों के अभिभावकों को किया जाएगा जागरूक :

एसीएमओ डॉ. नरेश कुमार ने बताया आशा अपने क्षेत्र के सभी पांच वर्ष से छोटे बच्चों के अभिभावकों को दस्त के बारे में जानकरी देंगी एवं इसकी  रोकथाम के लिए ओरल रिहाइड्रेशन सौलूशन (ओआरएस) के इस्तेमाल के लिए प्रेरित करेंगी । साथ ही, संबंधित स्वास्थ्य केन्द्रों के एएनएम एवं अन्य स्वास्थ्य कर्मी दस्त के लक्षणों एवं इसकी रोकथाम के विषय में लोगों को जागरूक करेंगे। उन्होंने बताया कि 45 फीट से कम गहरे बने हुए चापाकलों का पानी संक्रमित होता है। जिसके पानी के सेवन करने से दस्त होने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए 45 फीट से अधिक गहरे बने हुए चापाकलों का ही पानी बच्चों को देना चाहिए। इसके अलावा संग्रहित पानी के जैविक संक्रमण को समाप्त करने के लिए क्लोरीन का इस्तेमाल करना चाहिए।

लक्षणों की  नहीं करें अनदेखी  :

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार बच्चों में 24 घंटे के दौरान तीन या उससे अधिक बार पानी जैसा दस्त आना डायरिया है। डायरिया जीवाणु व विषाणु  संक्रमण के कारण तो होता ही है परंतु सबसे सामान्य कारण है प्रदूषित पानी, खान-पान में गड़बड़ी और आंत में संक्रमण। डायरिया से  शरीर में पानी की कमी हो जाती है जिसे डीहाईड्रेशन कहते हैं। इससे शरीर में कमजोरी आ जाती है और अगर समय पर इलाज न मिले तो पीड़ित की मृत्यु भी हो सकती है। डायरिया के ये लक्ष्ण अगर किसी बच्चे में दिखाई दे  तो उसे तत्काल स्वास्थ्य केंद्र पर ले जाना चाहिए।

डायरिया के लक्षण :

- पानी जैसा लगातार मल का होना 

- बार बार उल्टी होना 

- अत्यधिक प्यास का लगना 

- पानी न पी पाना 

- दस्त के साथ बुखार का होना 

- मल में खून आना