anish तेज आवाज में गाने व इयरफोन से प्रभावित होती है सुनने की क्षमता - . "body"

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तेज आवाज में गाने व इयरफोन से प्रभावित होती है सुनने की क्षमता 


3 मार्च को वर्ल्ड हियरिंग डे, कानों की करायें जरूरी जांच 

प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर कानों की जांच की व्यवस्था 

बहरापन दूर करने के लिए  स्वास्थ्य विभाग लोगों को कर रहा जागरूक

•       स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने बहरेपन की रोकथाम के लिए दिये संदेश

By amit kumar

M v online Bihar news/बक्सर / 2 फरवरी:  जिले  में 3 मार्च को वर्ल्ड हियरिंग डे का आयोजन किया जायेगा. इस मौके पर जिले में स्वास्थ्य विभाग द्वारा बहरापन की समस्या को दूर करने के लिए लोगों को जागरूक किया जाना है. इस मौके पर प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर श्रवण क्षमता की जांच के साथ लोगों को बहरापन से बचने के लिए आवश्यक जानकारी दी जायेगी. स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा  पंपलेट  के माध्यम से लोगों को श्रवण संबंधी समस्याओं की पहचान करने और आवश्यक सावधानी बरतने के संदेश देते हुए जागरूक किया गया है.  

12 जिलों में हियरिंग डे तहत कार्यक्रम का होगा आयोजन:

वहीं इस दिवस के आयोजन के संबंध में राज्य स्वास्थ्य समिति की नेशनल प्रोग्राम फॉर प्रीवेंशन एंड कंट्रोल  ऑफ़ डीफनेस कार्यक्रम के राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ मोहम्मद सज्जाद अहमद ने  सिविल सर्जन को पत्र के माध्यम से आवश्यक निर्देश भेजे हैं. पत्र में कहा गया है बहरेपन की बढ़ती समस्या को देखते हुए 3 मार्च को वर्ल्ड हियरिंग डे आयोजित किया जाना है.  जिले में श्रवण दोष से बचाव एवं श्रवण की देखभाल के लिए आमजन को जागरूक करते हुए प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर श्रवण दोष से संबंधित मरीजों के ईलाज की सुविधा प्रदान किया जाये. इस कार्यक्रम का आयोजन बक्सर सहित अन्य 11 जिलों में किया जाना है, जिसमें   वैशाली, मुजफ्फरपुर, पुर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, जुमई, गया , कैमूर , बांका, गोपालगंज, रोहतास व पूर्णिया जिला शामिल हैं. 

7.6 प्रतिशत व्यस्क व 2 प्रतिशत बच्चे बहरेपन के शिकार

नेशनल प्रोग्राम फॉर प्रीवेंशन एंड कंट्रोल ऑफ़ डीफनेस कार्यक्रम के तहत अनुवांशिक अथवा अक्वायर्ड बहरापन से निपटने के लिए बहरापन जैसी बीमारी का समय रहते उपचार किया जाना आवश्यक है. इस बीमारी से बच्चों और व्यस्क की एक बड़ी आबादी प्रभावित हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन 2018 के  आंकड़ों  के अनुसार भारत में लगभग 63 लाख लोग श्रवण दोष से ग्रसित हैं. इनमें 7.6 प्रतिशत व्यस्क तथा 2 प्रतिशत बच्चे बहरेपन  के  शिकार हैं. 

श्रवण दोष के लक्षण की पहचान की जानकारी: 

सुनने में कठिनाई 

कान में भनभनाहट

कान में दर्द 

कान का बहना 

अन्य लोगों के ठीक से नहीं बोलने का आभास 

शोर में बात समझने में कठिनाई 


बहरेपन की रोकथाम के लिए संदेश:

गर्भावस्था के दौरान चिकित्सक की सलाह के बिना दवा लेने से नवजात बच्चों में श्रवण दोष हो सकता है. कोई भी दवा लेने से पहले हमेशा चिकित्सक की सलाह लें. 

नियमित रूप से बच्चों का टीकाकरण करायें. गलसुआ और खसरा जैसे रोग बच्चों में बहरापन  का कारण बन सकती है. 

अन्य बच्चों के साथ घुलने मिलने के लिए श्रवण दोष बाले बच्चे को प्रोत्साहित करें. यह मनोवैज्ञानिक एवं संचार कौशल विकसित करने में मदद करेगा. 

अप्रशिक्षित व्यक्तियों अथवा सड़क के किनारे नीम—हकीम के द्वारा कान साफ कराने से बचें. 

कान से रिसाव या रक्त या बार—बार दर्द का होना गंभीर है. ऐसा होने पर चिकित्सीय सलाह लें. 

अपने कानों को तेज ध्वनि जैसे टीवी, रेडियो, इयरफोन, पटाखों एवं संगीत की तेज आवाज से बचायें. 

अपने कानों को चोट से बचायें. इससे कान के परदों को नुकसान हो सकता है. 

अपने कानों को गंदे पानी के प्रवेश से बचायें एवं अपने कानों में तेल या कोई नुकीली वस्तु, माचिस की तीली अथवा इयरबड्स का प्रयोग नहीं करें. 

60 साल की आयु के बाद वर्ष में एक बार श्रवण जांच अवश्य करायें. विशेष रूप से यदि आप बातचीत के दौरान शब्दों की पुनरावृति के लिए कहते हैं. 

विद्यालय जाने वाले बच्चे अगर कम दूरी से भी शिक्षक की आवाज पर ध्यान केंद्रित नहीं कर पा रहे हैं तो चिकित्सक से परामर्श लें.

तेज आवाज में गाने व इयरफोन से प्रभावित होती है सुनने की क्षमता

तेज आवाज में गाने व इयरफोन से प्रभावित होती है सुनने की क्षमता 


3 मार्च को वर्ल्ड हियरिंग डे, कानों की करायें जरूरी जांच 

प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर कानों की जांच की व्यवस्था 

बहरापन दूर करने के लिए  स्वास्थ्य विभाग लोगों को कर रहा जागरूक

•       स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने बहरेपन की रोकथाम के लिए दिये संदेश

By amit kumar

M v online Bihar news/बक्सर / 2 फरवरी:  जिले  में 3 मार्च को वर्ल्ड हियरिंग डे का आयोजन किया जायेगा. इस मौके पर जिले में स्वास्थ्य विभाग द्वारा बहरापन की समस्या को दूर करने के लिए लोगों को जागरूक किया जाना है. इस मौके पर प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर श्रवण क्षमता की जांच के साथ लोगों को बहरापन से बचने के लिए आवश्यक जानकारी दी जायेगी. स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा  पंपलेट  के माध्यम से लोगों को श्रवण संबंधी समस्याओं की पहचान करने और आवश्यक सावधानी बरतने के संदेश देते हुए जागरूक किया गया है.  

12 जिलों में हियरिंग डे तहत कार्यक्रम का होगा आयोजन:

वहीं इस दिवस के आयोजन के संबंध में राज्य स्वास्थ्य समिति की नेशनल प्रोग्राम फॉर प्रीवेंशन एंड कंट्रोल  ऑफ़ डीफनेस कार्यक्रम के राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ मोहम्मद सज्जाद अहमद ने  सिविल सर्जन को पत्र के माध्यम से आवश्यक निर्देश भेजे हैं. पत्र में कहा गया है बहरेपन की बढ़ती समस्या को देखते हुए 3 मार्च को वर्ल्ड हियरिंग डे आयोजित किया जाना है.  जिले में श्रवण दोष से बचाव एवं श्रवण की देखभाल के लिए आमजन को जागरूक करते हुए प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर श्रवण दोष से संबंधित मरीजों के ईलाज की सुविधा प्रदान किया जाये. इस कार्यक्रम का आयोजन बक्सर सहित अन्य 11 जिलों में किया जाना है, जिसमें   वैशाली, मुजफ्फरपुर, पुर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, जुमई, गया , कैमूर , बांका, गोपालगंज, रोहतास व पूर्णिया जिला शामिल हैं. 

7.6 प्रतिशत व्यस्क व 2 प्रतिशत बच्चे बहरेपन के शिकार

नेशनल प्रोग्राम फॉर प्रीवेंशन एंड कंट्रोल ऑफ़ डीफनेस कार्यक्रम के तहत अनुवांशिक अथवा अक्वायर्ड बहरापन से निपटने के लिए बहरापन जैसी बीमारी का समय रहते उपचार किया जाना आवश्यक है. इस बीमारी से बच्चों और व्यस्क की एक बड़ी आबादी प्रभावित हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन 2018 के  आंकड़ों  के अनुसार भारत में लगभग 63 लाख लोग श्रवण दोष से ग्रसित हैं. इनमें 7.6 प्रतिशत व्यस्क तथा 2 प्रतिशत बच्चे बहरेपन  के  शिकार हैं. 

श्रवण दोष के लक्षण की पहचान की जानकारी: 

सुनने में कठिनाई 

कान में भनभनाहट

कान में दर्द 

कान का बहना 

अन्य लोगों के ठीक से नहीं बोलने का आभास 

शोर में बात समझने में कठिनाई 


बहरेपन की रोकथाम के लिए संदेश:

गर्भावस्था के दौरान चिकित्सक की सलाह के बिना दवा लेने से नवजात बच्चों में श्रवण दोष हो सकता है. कोई भी दवा लेने से पहले हमेशा चिकित्सक की सलाह लें. 

नियमित रूप से बच्चों का टीकाकरण करायें. गलसुआ और खसरा जैसे रोग बच्चों में बहरापन  का कारण बन सकती है. 

अन्य बच्चों के साथ घुलने मिलने के लिए श्रवण दोष बाले बच्चे को प्रोत्साहित करें. यह मनोवैज्ञानिक एवं संचार कौशल विकसित करने में मदद करेगा. 

अप्रशिक्षित व्यक्तियों अथवा सड़क के किनारे नीम—हकीम के द्वारा कान साफ कराने से बचें. 

कान से रिसाव या रक्त या बार—बार दर्द का होना गंभीर है. ऐसा होने पर चिकित्सीय सलाह लें. 

अपने कानों को तेज ध्वनि जैसे टीवी, रेडियो, इयरफोन, पटाखों एवं संगीत की तेज आवाज से बचायें. 

अपने कानों को चोट से बचायें. इससे कान के परदों को नुकसान हो सकता है. 

अपने कानों को गंदे पानी के प्रवेश से बचायें एवं अपने कानों में तेल या कोई नुकीली वस्तु, माचिस की तीली अथवा इयरबड्स का प्रयोग नहीं करें. 

60 साल की आयु के बाद वर्ष में एक बार श्रवण जांच अवश्य करायें. विशेष रूप से यदि आप बातचीत के दौरान शब्दों की पुनरावृति के लिए कहते हैं. 

विद्यालय जाने वाले बच्चे अगर कम दूरी से भी शिक्षक की आवाज पर ध्यान केंद्रित नहीं कर पा रहे हैं तो चिकित्सक से परामर्श लें.