anish कोरोना के नए स्ट्रेन से भी बचाव को मास्क व नियमित दूरी है जरूरी - . "body"

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 कोरोना के नए स्ट्रेन से भी बचाव को मास्क व नियमित दूरी है जरूरी



- नए वैरिएंट से डरने की नहीं है जरूरत , साबुन से हाथों की करनी होगी नियमित सफाई

By amit kumar

M v online Bihar news/बक्सर | जिला समेत पूरे देश में तीसरे चरण का टीकाकरण चल रहा है। लेकिन, इस बीच देश के कई हिस्सों में कोरोना संक्रमण प्रसार हो रहा है। कोरोना का यह प्रसार उसके नए स्ट्रेन के कारण हो रहा है। जो कि कोविड-19 का म्युटेटेड रूप है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) समेत सभी स्वास्थ्य संगठनों ने कोरोना वायरस के आगमन समय से ही इसके बचाव के तरीकों में हाथ धोने की प्रक्रिया को काफी असरदार माना था। जो कोरोना के नए स्ट्रेन में भी कारगर साबित होगा। अब वायरस के नया स्ट्रेन के संक्रमण की संभावना को कम करने के लिए छह फीट की दूरी रखने के साथ-साथ मास्क के प्रयोग पर भी काफी बल दिया जा रहा है। 


कोरोना वायरस के लक्षण नए मिले कोरोना स्ट्रेन से अलग :

जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी (डीआईओ) डॉ. राज किशोर सिंह ने कहा कोरोना के नए रूप को लेकर चर्चाएं तेज हैं । इन सबके बीच एक राहत भरी खबर भी है। वह यह कि कोरोना के इस नए रुप से भी बचाव के जो तरीके हैं, वह हाथ धोना और सोशल डिस्टेंसिंग ही है। हम इस कोरोना के नए स्ट्रेन से बचने के लिए भी उन्हीं बातों व नियमों का अनुसरण करें, जो हमने संक्रमण से बचने के लिए पूरे कोरोना काल में किया  है। उन्होंने बताया कि रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना वायरस के लक्षण नए मिले कोरोना स्ट्रेन से अलग थे। शुरुआती दौर में कोरोना के जो लक्षण थे उनमें बुखार आना, लगातार खांसी होना और स्वाद के साथ-साथ गंध खोने की शिकायत शामिल थी । लेकिन, कोरोना के नए स्ट्रेन के लक्षण इससे अलग हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि नए स्ट्रेन की उत्पत्ति कोरोना में उत्परिवर्तन (म्युटेशन) की वजह से हुई है।


नए स्ट्रेन में मिले सात अहम लक्षण :

डीआईओ डॉ. सिंह ने बताया ब्रिटेन की राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा (एनएचएस) ने नए स्ट्रेन के सात अहम लक्षणों के बारे में बताया है। जिसमें शरीर में दर्द एवं पीड़ा, गले में खरास , आंख आना, सिरदर्द, डायरिया, त्वचा पर चकता (रैशेज) पड़ना, पैर की उंगलियों का रंग बिगड़ना, कोरोना के नए स्ट्रेन के मुख्य लक्षण हैं। अंतर्राष्ट्रीय  शोधकर्ताओं के साथ साथ डब्ल्यू एचओ ने भी इसकी पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि हमें कोरोना के साथ ही जीना होगा, लेकिन बचाव के साथ। यह ठीक उसी तरह है जैसे पोलियो और फ्लू के वायरस के साथ हम न चाहते हुए भी रह रहे हैं, लेकिन हमने इन पर काफी हद तक काबू पा लिया है। 


डीआईओ डॉ. सिंह ने बताया वैक्सीन लगाने के बाद हमारे शरीर में कोरोना वायरस के खिलाफ एंटीबाडी  तैयार हो जाएगी। शरीर में तैयार हुई एंटीबाडी  को जब भी कोरोना का नया वैरिअंट मिलेगा, तब बिना एंटीबाडी  वाले शरीर की तुलना में पहले से शरीर में मौजूद एंटीबाडी  वायरस से लड़ाई में काफी हद तक सक्षम होगी। लेकिन, उसे रोकने में यह पूरी तरह से सक्षम नहीं होगा। वैसे यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि वायरस में जो म्यूटेशन हुआ है उसकी वजह से उसके जीनोम में किस स्तर तक बदलाव हुआ है। अगर बदलाव बड़ा है तब परेशानी हो सकती है, लेकिन इस तरह की गुंजाइश काफी कम होती है। इसलिए हमें पूर्व की ही तरह कोविड-19 के खिलाफ निर्धारित किये गए नियमों का सख्ती से पालन करना होगा।

कोरोना के नए स्ट्रेन से भी बचाव को मास्क व नियमित दूरी है जरूरी

 कोरोना के नए स्ट्रेन से भी बचाव को मास्क व नियमित दूरी है जरूरी



- नए वैरिएंट से डरने की नहीं है जरूरत , साबुन से हाथों की करनी होगी नियमित सफाई

By amit kumar

M v online Bihar news/बक्सर | जिला समेत पूरे देश में तीसरे चरण का टीकाकरण चल रहा है। लेकिन, इस बीच देश के कई हिस्सों में कोरोना संक्रमण प्रसार हो रहा है। कोरोना का यह प्रसार उसके नए स्ट्रेन के कारण हो रहा है। जो कि कोविड-19 का म्युटेटेड रूप है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) समेत सभी स्वास्थ्य संगठनों ने कोरोना वायरस के आगमन समय से ही इसके बचाव के तरीकों में हाथ धोने की प्रक्रिया को काफी असरदार माना था। जो कोरोना के नए स्ट्रेन में भी कारगर साबित होगा। अब वायरस के नया स्ट्रेन के संक्रमण की संभावना को कम करने के लिए छह फीट की दूरी रखने के साथ-साथ मास्क के प्रयोग पर भी काफी बल दिया जा रहा है। 


कोरोना वायरस के लक्षण नए मिले कोरोना स्ट्रेन से अलग :

जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी (डीआईओ) डॉ. राज किशोर सिंह ने कहा कोरोना के नए रूप को लेकर चर्चाएं तेज हैं । इन सबके बीच एक राहत भरी खबर भी है। वह यह कि कोरोना के इस नए रुप से भी बचाव के जो तरीके हैं, वह हाथ धोना और सोशल डिस्टेंसिंग ही है। हम इस कोरोना के नए स्ट्रेन से बचने के लिए भी उन्हीं बातों व नियमों का अनुसरण करें, जो हमने संक्रमण से बचने के लिए पूरे कोरोना काल में किया  है। उन्होंने बताया कि रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना वायरस के लक्षण नए मिले कोरोना स्ट्रेन से अलग थे। शुरुआती दौर में कोरोना के जो लक्षण थे उनमें बुखार आना, लगातार खांसी होना और स्वाद के साथ-साथ गंध खोने की शिकायत शामिल थी । लेकिन, कोरोना के नए स्ट्रेन के लक्षण इससे अलग हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि नए स्ट्रेन की उत्पत्ति कोरोना में उत्परिवर्तन (म्युटेशन) की वजह से हुई है।


नए स्ट्रेन में मिले सात अहम लक्षण :

डीआईओ डॉ. सिंह ने बताया ब्रिटेन की राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा (एनएचएस) ने नए स्ट्रेन के सात अहम लक्षणों के बारे में बताया है। जिसमें शरीर में दर्द एवं पीड़ा, गले में खरास , आंख आना, सिरदर्द, डायरिया, त्वचा पर चकता (रैशेज) पड़ना, पैर की उंगलियों का रंग बिगड़ना, कोरोना के नए स्ट्रेन के मुख्य लक्षण हैं। अंतर्राष्ट्रीय  शोधकर्ताओं के साथ साथ डब्ल्यू एचओ ने भी इसकी पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि हमें कोरोना के साथ ही जीना होगा, लेकिन बचाव के साथ। यह ठीक उसी तरह है जैसे पोलियो और फ्लू के वायरस के साथ हम न चाहते हुए भी रह रहे हैं, लेकिन हमने इन पर काफी हद तक काबू पा लिया है। 


डीआईओ डॉ. सिंह ने बताया वैक्सीन लगाने के बाद हमारे शरीर में कोरोना वायरस के खिलाफ एंटीबाडी  तैयार हो जाएगी। शरीर में तैयार हुई एंटीबाडी  को जब भी कोरोना का नया वैरिअंट मिलेगा, तब बिना एंटीबाडी  वाले शरीर की तुलना में पहले से शरीर में मौजूद एंटीबाडी  वायरस से लड़ाई में काफी हद तक सक्षम होगी। लेकिन, उसे रोकने में यह पूरी तरह से सक्षम नहीं होगा। वैसे यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि वायरस में जो म्यूटेशन हुआ है उसकी वजह से उसके जीनोम में किस स्तर तक बदलाव हुआ है। अगर बदलाव बड़ा है तब परेशानी हो सकती है, लेकिन इस तरह की गुंजाइश काफी कम होती है। इसलिए हमें पूर्व की ही तरह कोविड-19 के खिलाफ निर्धारित किये गए नियमों का सख्ती से पालन करना होगा।