बक्सर जिले का पहला स्कूल जो रेलवे के डिब्बे में हुआ तब्दील,लोगों के बीच बना आकर्षण का केंद्र
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m v online bihar news/बक्सर जिले के अंतर्गत आने वाले सिमरी प्रखंड के खरहाटाड मध्य विद्यालय में एक अनोखी पहल देखने को मिली। जहां पूरे विद्यालय को ट्रेन के डिब्बों में तब्दील किया गया है। एक तरफ पूरे बिहार में जहां सरकारी विद्यालयों में दृढ़ संकल्प की कमी से विद्यालयों की स्थिति बदतर है ,वही एक ऐसा भी विद्यालय है जहां के शिक्षक तथा प्रधानाध्यापक की अच्छी सोच के कारण एक नए कार्य को अंजाम दिया गया। जिससे पूरे विद्यालय का माहौल ही परिवर्तित हो चुका है। जहां एक तरफ सरकारी विद्यालयों में छात्र आने से कतराते हैं वहीं इस विद्यालय में छात्र अपना नामांकन दर्ज कराने के लिए लाइन लगाते हैं तथा प्रतिदिन विद्यालय में अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हैं।
इस विद्यालय का निरीक्षण हमारी टीम ने किया तो पाया की विद्यालय का परिवेश पूरी तरह से बदला हुआ है तथा छात्र अपनी पढ़ाई पर ध्यान देते हुए कक्षाओं में बैठे हुए मिले। साथ ही साथ सभी विद्यार्थियों तथा कर्मचारियों द्वारा करोना गाइडलाइंस का पालन करते हुए पाया गया।
अखिलेश्वर कुमार चौबे प्रधानाध्यापक उत्क्रमित उच्च विद्यालय खरहाटाड
बच्चों को खेल खूब भाता है। रेलगाड़ी देखते ही गांव के बच्चे दौड़ पड़ते हैं। विद्यालय में बच्चों की उपस्थिति बढ़ाने के लिए शिक्षा विभाग ने दो वर्ष पूर्व अनूठा प्रयोग किया। यहां के सिमरी प्रखंड के उत्क्रमित उच्च विद्यालय खरहाटाड़ को रेलगाड़ी का आकार दिया गया। जिसका नतीजा हैरतअंगेज रहा।
स्कूल आने वाले बच्चों की संख्या दोगुनी से अधिक हो गई। जहां विद्यालय में 300 बच्चे उपस्थित होते थे। वही आज 600 से ज्यादा की संख्या में उपस्थित हो रहे हैं। बच्चे बेहद खुश भी हैं, बताते नहीं थकते कि हर दिन रेलगाड़ी में बैठकर पढ़ते हैं। दरअसल बच्चों की कक्षाओं को ट्रेन की बोगी जैसा बनाया गया है।
विद्यालय पहली नजर में किसी प्लेटफॉर्म पर खड़ी रेलगाड़ी की तरह दिखता हैं। इस रेलगाड़ी की बोगियां (कक्षाएं) बच्चों से खचाखच भरी रहती हैं। विद्यालय के प्रधानाध्यापक का कक्ष रेलगाड़ी के सबसे आगे लगे इंजन की तरह है।

