anish टीबी मरीजों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए विभाग सजग - . "body"

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 टीबी मरीजों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए विभाग सजग


- 'टीबी हारेगा देश जीतेगा' अभियान के तहत लोगों को किया जा रहा जागरूक

- वर्ष 2025 तक टीबी को पूरी तरह समाप्त करने का रखा गया है लक्ष्य

- टीबी के एक्टिव मामलों की खोज के लिए चलाए जा रहे हैं अभियान

By amit kumar

M v online bihar news/बक्सर, 25 फरवरी | टीबी के मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा मुहैया कराने के लिए विभाग सजग है। सरकार ने 2025 तक देश को टीबी रोग से मुक्त करने का लक्ष्य रखा है। इसके तहत बक्सर जिले में जिला यक्षमा विभाग टीबी के खिलाफ मजबूती से काम चल रहा है। टीबी की दवा नियमित रूप व अवधि तक खाने से यह पूर्णत: ठीक हो सकता है। इसके लिए प्राइवेट चिकित्सक के साथ डीएफवाई, अक्षया प्रोजेक्ट एवं टीबी चैंपियन अपना सहयोग देते हुए इस बीमारी का सफाया करने में अपना योगदान कर रहे हैं ताकि, ज्यादा से ज्यादा इस बीमारी के पहचान के बारे में जानकारी मिल सकें। दूसरी ओर, इस बीमारी को जड़ से खत्म करने के लिए लोगों को भी जागरूक होना होगा। टीबी के लक्षण दिखने पर तत्काल इसकी जांच करानी चाहिए जिससे यह पता चलेगा  कि उनको टीबी है या नहीं।

निक्षय पोर्टल से मिल रही सुविधा :

प्रभारी अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी सह सीडीओ डॉ. नरेंद्र कुमार ने कहा  निक्षय पोर्टल में मरीजों का नाम जोड़ने के बाद टीबी रोगियों को सात अंकों की एक डिजिटल आईडी मिल रही है। इससे मरीजों का पता लगाने में विभाग को काफी सुविधा हो रही है। इससे विभाग को यह भी पता चल रहा है कि मरीज समय पर दवा लिया या नहीं। इसके अलावा इस आईडी के जारी होने के बाद रोगी देश में कहीं से भी अपना दवा ले सकेंगे। साथ ही, टीबी का इलाज कराने के लिए सरकार उनको प्रोत्साहन राशि भी मुहैया करा रही है। ताकि, अधिक से अधिक लोग इस योजना के लाभ उठा सकें।


नए मरीजों की हो रही खोज :

डॉ. नरेंद्र कुमार ने बताया जिले में टीबी मरीजों की खोज की जा रही है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग सजग है। सदर अस्पताल से लेकर अन्य स्वास्थ्य केंद्रों में शिविर लगाकर लोगों की जांच की जाती रही है। इसके अलावा ईंट-भट्ठों, झुग्गी झोपड़ियों, धूल-मिट्टी से भरे कार्य स्थलों आदि पर समय जांच शिविर भी लगाए जाते हैं। अगर जांच में टीबी रोग के लक्षण पाएं जाते हैं, तो इसका इलाज शुरु किया जाता है। साथ ही, उसकी पूरी जानकारी निक्षय-2 पोर्टल पर दी जाती है। उसके बाद टीबी के मरीजों को उचित खुराक उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार की तरफ से निक्षय पोषण योजना चलायी गई है। जिसमें टीबी के मरीजों को उचित पोषण के लिए 500 रुपये प्रत्येक महीने दिए जाते हैं। यह राशि उनके खाते में सीधे पहुंचती है। 

एमडीआर टीबी हो सकता है गंभीर : 

डॉ. नरेंद्र कुमार ने बताया एमडीआर टीबी होने पर सामान्य टीबी की कई दवाएं एक साथ प्रतिरोधी हो जाती हैं। टीबी की दवाओं का सही से कोर्स नहीं करने एवं बिना चिकित्सक की सलाह पर टीबी की दवाएं खाने से ही सामान्यता एमडीआर-टीबी होने की संभावना बढ़ जाती है। लेकिन, उचित इलाज व दवाओं के सेवन से जिले के कई मरीज टीबी चैंपियन बन चुके हैं। बक्सर जिले में टीबी रोगियों के लिए चलाई जा रही इस योजना के तहत 41 मरीजों का इलाज चल रहा है।

टीबी मरीजों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए विभाग सजग

 टीबी मरीजों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए विभाग सजग


- 'टीबी हारेगा देश जीतेगा' अभियान के तहत लोगों को किया जा रहा जागरूक

- वर्ष 2025 तक टीबी को पूरी तरह समाप्त करने का रखा गया है लक्ष्य

- टीबी के एक्टिव मामलों की खोज के लिए चलाए जा रहे हैं अभियान

By amit kumar

M v online bihar news/बक्सर, 25 फरवरी | टीबी के मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा मुहैया कराने के लिए विभाग सजग है। सरकार ने 2025 तक देश को टीबी रोग से मुक्त करने का लक्ष्य रखा है। इसके तहत बक्सर जिले में जिला यक्षमा विभाग टीबी के खिलाफ मजबूती से काम चल रहा है। टीबी की दवा नियमित रूप व अवधि तक खाने से यह पूर्णत: ठीक हो सकता है। इसके लिए प्राइवेट चिकित्सक के साथ डीएफवाई, अक्षया प्रोजेक्ट एवं टीबी चैंपियन अपना सहयोग देते हुए इस बीमारी का सफाया करने में अपना योगदान कर रहे हैं ताकि, ज्यादा से ज्यादा इस बीमारी के पहचान के बारे में जानकारी मिल सकें। दूसरी ओर, इस बीमारी को जड़ से खत्म करने के लिए लोगों को भी जागरूक होना होगा। टीबी के लक्षण दिखने पर तत्काल इसकी जांच करानी चाहिए जिससे यह पता चलेगा  कि उनको टीबी है या नहीं।

निक्षय पोर्टल से मिल रही सुविधा :

प्रभारी अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी सह सीडीओ डॉ. नरेंद्र कुमार ने कहा  निक्षय पोर्टल में मरीजों का नाम जोड़ने के बाद टीबी रोगियों को सात अंकों की एक डिजिटल आईडी मिल रही है। इससे मरीजों का पता लगाने में विभाग को काफी सुविधा हो रही है। इससे विभाग को यह भी पता चल रहा है कि मरीज समय पर दवा लिया या नहीं। इसके अलावा इस आईडी के जारी होने के बाद रोगी देश में कहीं से भी अपना दवा ले सकेंगे। साथ ही, टीबी का इलाज कराने के लिए सरकार उनको प्रोत्साहन राशि भी मुहैया करा रही है। ताकि, अधिक से अधिक लोग इस योजना के लाभ उठा सकें।


नए मरीजों की हो रही खोज :

डॉ. नरेंद्र कुमार ने बताया जिले में टीबी मरीजों की खोज की जा रही है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग सजग है। सदर अस्पताल से लेकर अन्य स्वास्थ्य केंद्रों में शिविर लगाकर लोगों की जांच की जाती रही है। इसके अलावा ईंट-भट्ठों, झुग्गी झोपड़ियों, धूल-मिट्टी से भरे कार्य स्थलों आदि पर समय जांच शिविर भी लगाए जाते हैं। अगर जांच में टीबी रोग के लक्षण पाएं जाते हैं, तो इसका इलाज शुरु किया जाता है। साथ ही, उसकी पूरी जानकारी निक्षय-2 पोर्टल पर दी जाती है। उसके बाद टीबी के मरीजों को उचित खुराक उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार की तरफ से निक्षय पोषण योजना चलायी गई है। जिसमें टीबी के मरीजों को उचित पोषण के लिए 500 रुपये प्रत्येक महीने दिए जाते हैं। यह राशि उनके खाते में सीधे पहुंचती है। 

एमडीआर टीबी हो सकता है गंभीर : 

डॉ. नरेंद्र कुमार ने बताया एमडीआर टीबी होने पर सामान्य टीबी की कई दवाएं एक साथ प्रतिरोधी हो जाती हैं। टीबी की दवाओं का सही से कोर्स नहीं करने एवं बिना चिकित्सक की सलाह पर टीबी की दवाएं खाने से ही सामान्यता एमडीआर-टीबी होने की संभावना बढ़ जाती है। लेकिन, उचित इलाज व दवाओं के सेवन से जिले के कई मरीज टीबी चैंपियन बन चुके हैं। बक्सर जिले में टीबी रोगियों के लिए चलाई जा रही इस योजना के तहत 41 मरीजों का इलाज चल रहा है।