anish टीबी के दवा सेवन में अनियमितता से बढ़ जाती है एमडीआर की संभावना - . "body"

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टीबी के दवा सेवन में अनियमितता से बढ़ जाती है एमडीआर की संभावना


- दवा से टीबी का पूर्ण इलाज है संभव, 2025 तक टीबी उन्मूलन का है लक्ष्य 

- सीबीनेट जैसी नई मशीन की सहायता से जिले में होती है टीबी की नि:शुल्क जांच

by amit kumar

m v online bihar news/बक्सर, 15 फरवरी | सरकार ने वर्ष 2025 तक यक्षमा (टीबी/ट्यूबर क्लोसिस) को जड़ से खत्म करने का निर्णय ले लिया है। सरकार के इस लक्ष्य को पूरी तरह से सफल बनाने के लिए लोगों के सहयोग की भी आवश्यकता है। लेकिन, इसके लिए लोगों को टीबी के संबंध में जागरूक और सजग होना पड़ेगा। जब तक लोगों को इसके विषय में पूरी जानकारी नहीं हो पाएगी, तब तक समाज से टीबी को पूरी तरह से मुक्त नहीं किया जा सकेगा। इस क्रम में जिला यक्षमा विभाग लोगों को जागरूक करने व उन्हें टीबी की व्यापक जानकारी देने की तैयारी कर रहा है। ताकि, लोगों में इस गंभीर बीमारी के प्रति समझ जागृत हो सके। अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी सह जिला यक्षमा पदाधिकारी डॉ. नरेश कुमार ने बताया टीबी लाइलाज रोग नहीं है। इसका संपूर्ण और निःशुल्क इलाज सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध है। हालांकि दवा का पूरा डोज लेना जरूरी है। ऐसा नहीं करने पर एमडीआर (मल्टी ड्रग रेसिस्टेंट) टीबी की संभावना बढ़ जाती है। 

दवा का नियमित सेवन करना जरूरी :

डॉ. नरेश कुमार ने बताया टीबी का इलाज पूरी तरह मुमकिन है। सरकारी अस्पताल और डॉट्स केंद्रों में इसका नि:शुल्क इलाज होता है। लेकिन इसकी दवा का नियमित सेवन करना होगा। टीबी की दवा का अनियमित सेवन करना, बिना चिकित्सीय परामर्श के दुकानों से टीबी की दवा लेना एवं टीबी की दवा खाने से पहले ड्रग सेंसटिविटी जांच नहीं होने से भी एमडीआर टीबी होने की का संभावना ख़तरा बढ़ जाती ता है। सीबीनेट जैसी नई मशीन की सहायता से टीबी की जांच नि:शुल्क की जा रही है। टीबी पीड़ितों के बेहतर पोषण के लिए सरकार 500 रुपये की सहायता राशि भी दे रही है। लेकिन इसके लिए टीबी पीड़ितों को टीबी अस्पताल में पंजीकरण कराना जरूरी रुरी है।

बेहतर पोषण से हो सकता है बचाव :

बेहतर पोषण से रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत कर टीबी जैसे गंभीर रोग से बचा जा सकता है। इसके लिए खासकर प्रोटीन युक्त आहार का सेवन करना चाहिए। सोयाबीन, दालें, मछली, अंडा, पनीर आदि में प्रोटीन की काफ़ी मात्रा होती है, जो शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करती ता है। कमजोर इम्युनिटी से टीबी के बैक्टीरिया के सक्रिय होने की संभावना अधिक होती है। टीबी की का बैक्टीरिया शरीर में ही होती ता है, लेकिन अच्छी इम्युनिटी से इसे सक्रिय होने से रोका जा सकता है।

ये लक्षण हों तो जरूर करवाएं अपनी जांच :

दो हफ्ते से ज्यादा लगातार खांसी, खांसी के साथ बलगम का आना, कभी-कभी बलगम के साथ खून का आना, भूख कम लगना, लगातार वजन कम होना, शाम या रात के वक्त बुखार आना, सर्दी में भी पसीना आना, सांस उखड़ना या सांस लेते हुए सीने में दर्द होना इत्यादि टीबी के लक्षण हो सकते हैं। टीबी बैक्टीरिया से होने वाली बीमारी है। यह आमतौर पर फेफड़ों से शुरू होती है। लेकिन यह ब्रेन, यूटरस, मुंह, लिवर, किडनी, गला, हड्डी आदि  हिस्से में हो सकती है। टीबी की का बैक्टीरिया का खांसने और छींकने के दौरान मुंह-नाक से इसका संक्रमण फैलता है।

टीबी के दवा सेवन में अनियमितता से बढ़ जाती है एमडीआर की संभावना

टीबी के दवा सेवन में अनियमितता से बढ़ जाती है एमडीआर की संभावना


- दवा से टीबी का पूर्ण इलाज है संभव, 2025 तक टीबी उन्मूलन का है लक्ष्य 

- सीबीनेट जैसी नई मशीन की सहायता से जिले में होती है टीबी की नि:शुल्क जांच

by amit kumar

m v online bihar news/बक्सर, 15 फरवरी | सरकार ने वर्ष 2025 तक यक्षमा (टीबी/ट्यूबर क्लोसिस) को जड़ से खत्म करने का निर्णय ले लिया है। सरकार के इस लक्ष्य को पूरी तरह से सफल बनाने के लिए लोगों के सहयोग की भी आवश्यकता है। लेकिन, इसके लिए लोगों को टीबी के संबंध में जागरूक और सजग होना पड़ेगा। जब तक लोगों को इसके विषय में पूरी जानकारी नहीं हो पाएगी, तब तक समाज से टीबी को पूरी तरह से मुक्त नहीं किया जा सकेगा। इस क्रम में जिला यक्षमा विभाग लोगों को जागरूक करने व उन्हें टीबी की व्यापक जानकारी देने की तैयारी कर रहा है। ताकि, लोगों में इस गंभीर बीमारी के प्रति समझ जागृत हो सके। अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी सह जिला यक्षमा पदाधिकारी डॉ. नरेश कुमार ने बताया टीबी लाइलाज रोग नहीं है। इसका संपूर्ण और निःशुल्क इलाज सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध है। हालांकि दवा का पूरा डोज लेना जरूरी है। ऐसा नहीं करने पर एमडीआर (मल्टी ड्रग रेसिस्टेंट) टीबी की संभावना बढ़ जाती है। 

दवा का नियमित सेवन करना जरूरी :

डॉ. नरेश कुमार ने बताया टीबी का इलाज पूरी तरह मुमकिन है। सरकारी अस्पताल और डॉट्स केंद्रों में इसका नि:शुल्क इलाज होता है। लेकिन इसकी दवा का नियमित सेवन करना होगा। टीबी की दवा का अनियमित सेवन करना, बिना चिकित्सीय परामर्श के दुकानों से टीबी की दवा लेना एवं टीबी की दवा खाने से पहले ड्रग सेंसटिविटी जांच नहीं होने से भी एमडीआर टीबी होने की का संभावना ख़तरा बढ़ जाती ता है। सीबीनेट जैसी नई मशीन की सहायता से टीबी की जांच नि:शुल्क की जा रही है। टीबी पीड़ितों के बेहतर पोषण के लिए सरकार 500 रुपये की सहायता राशि भी दे रही है। लेकिन इसके लिए टीबी पीड़ितों को टीबी अस्पताल में पंजीकरण कराना जरूरी रुरी है।

बेहतर पोषण से हो सकता है बचाव :

बेहतर पोषण से रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत कर टीबी जैसे गंभीर रोग से बचा जा सकता है। इसके लिए खासकर प्रोटीन युक्त आहार का सेवन करना चाहिए। सोयाबीन, दालें, मछली, अंडा, पनीर आदि में प्रोटीन की काफ़ी मात्रा होती है, जो शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करती ता है। कमजोर इम्युनिटी से टीबी के बैक्टीरिया के सक्रिय होने की संभावना अधिक होती है। टीबी की का बैक्टीरिया शरीर में ही होती ता है, लेकिन अच्छी इम्युनिटी से इसे सक्रिय होने से रोका जा सकता है।

ये लक्षण हों तो जरूर करवाएं अपनी जांच :

दो हफ्ते से ज्यादा लगातार खांसी, खांसी के साथ बलगम का आना, कभी-कभी बलगम के साथ खून का आना, भूख कम लगना, लगातार वजन कम होना, शाम या रात के वक्त बुखार आना, सर्दी में भी पसीना आना, सांस उखड़ना या सांस लेते हुए सीने में दर्द होना इत्यादि टीबी के लक्षण हो सकते हैं। टीबी बैक्टीरिया से होने वाली बीमारी है। यह आमतौर पर फेफड़ों से शुरू होती है। लेकिन यह ब्रेन, यूटरस, मुंह, लिवर, किडनी, गला, हड्डी आदि  हिस्से में हो सकती है। टीबी की का बैक्टीरिया का खांसने और छींकने के दौरान मुंह-नाक से इसका संक्रमण फैलता है।