anish कुष्ठ रोग से ग्रसित मरीजों के परिजनों को दी जा रही है रिफैम्पिसिन कैप की खुराक - . "body"

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 कुष्ठ रोग से ग्रसित मरीजों के परिजनों को दी जा रही है रिफैम्पिसिन कैप की खुराक



- कुष्ठ रोग के प्रसार की संभावना को खत्म करने में जुटा स्वास्थ्य विभाग

- पांच फरवरी तक जिले में संचालित किया जाएगा सिंगल डोज रिफैम्पिसिन कैम्प

- समाज से भेदभाव मिटाने के लिए अधिकारियों व कर्मियों ने ली शपथ, निकाली गई रैली


By amit kumar

M v online bihar news/बक्सर/30 जनवरी | कुष्ठ रोग को जिले से समाप्त करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने अब कमर कस ली है। इस क्रम में सदर प्रखंड स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में सिंगल डोज रिफैम्पिसिन कैम्प का आयोजन किया गया। कैम्प का उद्घाटन डॉ. शालीग्राम पांडेय एवं पटना से आये डॉ. चंद्रमणि और डॉ. शम्भूनाथ तिवारी ने संयुक्त रूप से कुष्ठ रोगियों के परिजनों को दवा खिलाकर किया। इस क्रम में सात चिह्नित मरीजों के 87 परिजनों और नजदीकी लोगों को रिफैम्पिसिन कैप की दवा खिलाई गई। जिले में यह शिविर पांच फरवरी तक लगाया जाएगा। कुष्ठ रोग के चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. शालीग्राम पांडेय ने बताया इस शिविर के दौरान अप्रैल 2020 से अब तक पंजीकृत रोगियों के परिजनों को एक खुराक रिफैम्पिसिन कैप खिलाने से उनमें कुष्ठ के प्रसार होने की संभावना खत्म हो जाएगी। शिविर में सदर पीएचसी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. सुधीर कुमार, बीसीएम प्रिंस सिंह, डीएनटी/पीएमडब्लू एसएम साहिल, पीएमडब्लू नागेश पांडेय तथा संस्थान के अन्य कर्मचारी मौजूद रहे।

कुष्ठ रोग के लक्षण पता चलने में 5 साल का लगता है समय :

डॉ. चंद्रमणि ने बताया कुष्ठ या कोढ़ रोग एक संक्रामक रोग है जो माइको बैक्टीरियम लेप्रै बैक्टीरिया के कारण होता है। जो कुष्ठ रोग से ग्रसित मरीज से दूसरे स्वास्थ्य व्यक्ति में फैलता है। यह बैक्टीरिया शरीर में बहुत धीमी गति से विकसित होती है। इसलिए इस रोग के लक्षणों के चिह्नित होने में कभी-कभी लगभग 5 साल का समय लग जाता है। हालांकि इस रोग के लक्षण मुख्यतः त्वचा पर घाव या दाग के रूप दिखते हैं। लेकिन समय रहते इलाज नहीं करने पर यह नसों, सांस की नली और आंखों को स्थायी रूप से प्रभावित करता है। यह रोग किसी भी उम्र में हो सकता है। कुष्ठ रोग इलाज योग्य है, किन्तु इसके लिए शुरुआती लक्षणों को पहचान कर ससमय इलाज और दवा की पूरी खुराक लेना अनिवार्य है।


छह माह से लेकर एक साल तक चलता है इलाज :

डॉ. शम्भूनाथ तिवारी ने बताया कुष्ठ रोग का काफ़ी समय से इलाज मौजूद है। सरकार की तरफ से मुफ़्त में इलाज मुहैया करवायी जाती है। इसका इलाज छह महीने से लेकर एक साल तक चलता है। खाने की कुछ दवाइयां ही इसका इलाज है, जिनका कोर्स पूरा करना होता है। अगर हाथ और पैरों में उत्पन्न हुई विकृति की बात करें तो उसका भी आधुनिक सर्जरी के द्वारा इलाज मुमकिन है। जिन कामों को करने के लिए फाइन कंट्रोल चाहिए वो भी किया जा सकता है। अगर आपको कुष्ठ रोग के लक्षण दिखाई दे रहे हैं तो आज ही कुष्ठ रोग विशेषज्ञ के पास जाएं। जिले में कुष्ठ रोगियों का इलाज बिलकुल निःशुल्क है। कुष्ठ रोगी को ढूंढ कर लाने वाले को 250 रुपये तथा रोगी को दवा खिलाने वाली आशा कार्यकर्ता को भी प्रोत्साहन राशि के तौर पर 400- से 600 रुपये तक दिये जाने का प्रावधान है।

कुष्ठ रोग को मिटाने के लिए ली गई शपथ

महात्मा गांधी की पुण्य तिथि के अवसर पर जिले में राष्ट्रीय कुष्ठ रोग दिवस मनाया गया। इस क्रम में जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में शपथ ग्रहण कार्यक्रम और रैली का आयोजन हुआ। इस संबंध में प्रभारी एसीएमओ डॉ. नरेश कुमार ने बताया शनिवार को सभी प्रखंड चिकित्सा केन्द्रों पर कुष्ठ रोग दिवस मनाया गया। इसके लिए सभी प्रखण्ड चिकित्सा पदाधिकारियों को यह जिम्मेदारी दी गई थी। वहीं, सभी आशा, एएनएम और स्वास्थ्य कर्मियों ने कुष्ठ रोग जागरूकता से संबन्धित पोस्टर एवं बैनर के जरिए एक रैली का आयोजन कर समाज में कुष्ठ रोगियों के साथ हो रहे भेदभाव और गलत अवधारणाओं को दूर करने हेतु शपथ ग्रहण कर जागरूक किया। इस मौके पर डॉ. नरेश कुमार की अध्यक्षता में सदर अस्पताल परिसर में शपथ ग्रहण कार्यक्रम का आयोजन हुआ। जिसमें सभी स्वास्थ्य अधिकारियों व कर्मियों ने कुष्ठ रोगियों के प्रति समाज मे होने वाले भेदभाव को मिटाने का संकल्प लिया।

कुष्ठ रोग से ग्रसित मरीजों के परिजनों को दी जा रही है रिफैम्पिसिन कैप की खुराक

 कुष्ठ रोग से ग्रसित मरीजों के परिजनों को दी जा रही है रिफैम्पिसिन कैप की खुराक



- कुष्ठ रोग के प्रसार की संभावना को खत्म करने में जुटा स्वास्थ्य विभाग

- पांच फरवरी तक जिले में संचालित किया जाएगा सिंगल डोज रिफैम्पिसिन कैम्प

- समाज से भेदभाव मिटाने के लिए अधिकारियों व कर्मियों ने ली शपथ, निकाली गई रैली


By amit kumar

M v online bihar news/बक्सर/30 जनवरी | कुष्ठ रोग को जिले से समाप्त करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने अब कमर कस ली है। इस क्रम में सदर प्रखंड स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में सिंगल डोज रिफैम्पिसिन कैम्प का आयोजन किया गया। कैम्प का उद्घाटन डॉ. शालीग्राम पांडेय एवं पटना से आये डॉ. चंद्रमणि और डॉ. शम्भूनाथ तिवारी ने संयुक्त रूप से कुष्ठ रोगियों के परिजनों को दवा खिलाकर किया। इस क्रम में सात चिह्नित मरीजों के 87 परिजनों और नजदीकी लोगों को रिफैम्पिसिन कैप की दवा खिलाई गई। जिले में यह शिविर पांच फरवरी तक लगाया जाएगा। कुष्ठ रोग के चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. शालीग्राम पांडेय ने बताया इस शिविर के दौरान अप्रैल 2020 से अब तक पंजीकृत रोगियों के परिजनों को एक खुराक रिफैम्पिसिन कैप खिलाने से उनमें कुष्ठ के प्रसार होने की संभावना खत्म हो जाएगी। शिविर में सदर पीएचसी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. सुधीर कुमार, बीसीएम प्रिंस सिंह, डीएनटी/पीएमडब्लू एसएम साहिल, पीएमडब्लू नागेश पांडेय तथा संस्थान के अन्य कर्मचारी मौजूद रहे।

कुष्ठ रोग के लक्षण पता चलने में 5 साल का लगता है समय :

डॉ. चंद्रमणि ने बताया कुष्ठ या कोढ़ रोग एक संक्रामक रोग है जो माइको बैक्टीरियम लेप्रै बैक्टीरिया के कारण होता है। जो कुष्ठ रोग से ग्रसित मरीज से दूसरे स्वास्थ्य व्यक्ति में फैलता है। यह बैक्टीरिया शरीर में बहुत धीमी गति से विकसित होती है। इसलिए इस रोग के लक्षणों के चिह्नित होने में कभी-कभी लगभग 5 साल का समय लग जाता है। हालांकि इस रोग के लक्षण मुख्यतः त्वचा पर घाव या दाग के रूप दिखते हैं। लेकिन समय रहते इलाज नहीं करने पर यह नसों, सांस की नली और आंखों को स्थायी रूप से प्रभावित करता है। यह रोग किसी भी उम्र में हो सकता है। कुष्ठ रोग इलाज योग्य है, किन्तु इसके लिए शुरुआती लक्षणों को पहचान कर ससमय इलाज और दवा की पूरी खुराक लेना अनिवार्य है।


छह माह से लेकर एक साल तक चलता है इलाज :

डॉ. शम्भूनाथ तिवारी ने बताया कुष्ठ रोग का काफ़ी समय से इलाज मौजूद है। सरकार की तरफ से मुफ़्त में इलाज मुहैया करवायी जाती है। इसका इलाज छह महीने से लेकर एक साल तक चलता है। खाने की कुछ दवाइयां ही इसका इलाज है, जिनका कोर्स पूरा करना होता है। अगर हाथ और पैरों में उत्पन्न हुई विकृति की बात करें तो उसका भी आधुनिक सर्जरी के द्वारा इलाज मुमकिन है। जिन कामों को करने के लिए फाइन कंट्रोल चाहिए वो भी किया जा सकता है। अगर आपको कुष्ठ रोग के लक्षण दिखाई दे रहे हैं तो आज ही कुष्ठ रोग विशेषज्ञ के पास जाएं। जिले में कुष्ठ रोगियों का इलाज बिलकुल निःशुल्क है। कुष्ठ रोगी को ढूंढ कर लाने वाले को 250 रुपये तथा रोगी को दवा खिलाने वाली आशा कार्यकर्ता को भी प्रोत्साहन राशि के तौर पर 400- से 600 रुपये तक दिये जाने का प्रावधान है।

कुष्ठ रोग को मिटाने के लिए ली गई शपथ

महात्मा गांधी की पुण्य तिथि के अवसर पर जिले में राष्ट्रीय कुष्ठ रोग दिवस मनाया गया। इस क्रम में जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में शपथ ग्रहण कार्यक्रम और रैली का आयोजन हुआ। इस संबंध में प्रभारी एसीएमओ डॉ. नरेश कुमार ने बताया शनिवार को सभी प्रखंड चिकित्सा केन्द्रों पर कुष्ठ रोग दिवस मनाया गया। इसके लिए सभी प्रखण्ड चिकित्सा पदाधिकारियों को यह जिम्मेदारी दी गई थी। वहीं, सभी आशा, एएनएम और स्वास्थ्य कर्मियों ने कुष्ठ रोग जागरूकता से संबन्धित पोस्टर एवं बैनर के जरिए एक रैली का आयोजन कर समाज में कुष्ठ रोगियों के साथ हो रहे भेदभाव और गलत अवधारणाओं को दूर करने हेतु शपथ ग्रहण कर जागरूक किया। इस मौके पर डॉ. नरेश कुमार की अध्यक्षता में सदर अस्पताल परिसर में शपथ ग्रहण कार्यक्रम का आयोजन हुआ। जिसमें सभी स्वास्थ्य अधिकारियों व कर्मियों ने कुष्ठ रोगियों के प्रति समाज मे होने वाले भेदभाव को मिटाने का संकल्प लिया।