सर्दी के मौसम में बच्चों व नवजातों को ठंड से बचाएगा मां का दूध
- मां के दूध से बच्चों को बीमारी से लड़ने की शक्ति मिलती है
By amit kumar
M v online bihar news/बक्सर, 15 जनवरी | जिला में ठंड में लगातार वृद्धि हो रही है। पिछले दो दिनों से धूप नहीं खिलने से कनकनी में भी इजाफा हुआ है। जो शिशुओं व बच्चों के लिए परेशानी का सबब बन सकती है। ऐसे में उचित देखभाल से ही उन्हें सुरक्षित रखा जा सकता है। सर्दी से नवजात शिशु ठंड की चपेट में आकर निमोनिया से ग्रस्त हो सकते हैं। ऐसे में बच्चों को गर्म कपड़े पहनाकर रखें। साथ ही, बच्चों को गर्म कमरे में ही रखें। इससे बच्चों को निमोनिया होने की संभावना कम हो जाती है। वहीं, मां का दूध शिशुओं के लिए अमृत के समान है। दूसरी ओर, यदि बच्चे की सांस तेज हो जाए तो भी बच्चों को निमोनिया हो सकता है। ऐसी स्थिति में बच्चे को तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सक से चेकअप कराएं।
लापरवाही के कारण बच्चों को लगती है ठंड :
सदर अस्पताल के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. रवि भूषण श्रीवास्तव ने बताया सर्दी के मौसम में अकसर लापरवाही के चलते नवजात बीमार पड़ जाते हैं। कई बार बच्चों को ठंड लग जाती है। इस कारण बच्चे निमोनिया की चपेट में आ जाते हैं। समय पर इलाज न होने पर निमोनिया से समस्या घातक सिद्ध हो हो सकती सकता है। ठंड होने पर बच्चों को मां का दूध पिलाना जरूरी है। इससे बच्चों बच्चाें को में बीमारी से लड़ने की शक्ति मिलती है। सांस तेज होने पर भी दूध पिलाना जरूरी है। सर्दी के मौसम में नवजात के डायपर को बदलते रहना चाहिए। जल्द डायपर न बदलने से नवजात को सर्दी- जुकाम के साथ अन्य प्रकार के कई संक्रमण हो सकते हैं। हल्के गुनगुने पानी में कपड़ा भिगोकर बच्चे के शरीर को पोंछ दें। बच्चे को गर्म कपड़े ही पहनाएं।
ठंढ महसूस होने पर बच्चों की करें मालिश :
डॉ. श्रीवास्तव ने बताया ठंड में छह महीने से कम उम्र के नवजात के हर समय हाथ-पैर, पेट और तलवे को हर समय छूकर देखते रहना चाहिए। जरा सी भी ठंड महसूस हो तो तुरंत मालिश करें। ताकि, नवजात के शरीर में गर्मी आ जाए। वहीं, ठंड में अगर बच्चा ऊपर का दूध नहीं पीता तो दूध को हल्का गर्म करके दें। इसके बाद दूध न पीए तो डॉक्टर को दिखाएं। हो सकता है कि ठंड लगने से कोई भीतरी समस्या हो गई हो। साथ ही, कंगारू मदर केयर वह प्रक्रिया है जो नवजात को मां के शरीर से गर्मी प्रदान करती है। इसके सहारे शिशु को मां अपने सीने से चिपकाकर रखती है। मां के शरीर से मिलने वाली ऊर्जा नवजात के भीतर रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है।
वजन कम होने पर कराएं खून की जांच :
नवजात या एक साल की उम्र तक का बच्चा कमजोर है और उसका औसत वजन भी कम है तो उसके खून की जांच जरूरी है। नवजात को मां का दूध पिलाना चाहिए। अगर मां को दिक्कत है तो महिला रोग विशेषज्ञ से परेशानी बतानी चाहिए। बच्चे या नवजात को गोद में लेते वक्त विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। गोद में लेते वक्त बच्चे के सिर और गर्दन का विशेष ध्यान रखना चाहिए। क्योंकि जन्म के बाद नवजात का सिर और गर्दन बहुत नाज़ुक होता होती है। झटके में उठाने की वजह से उसके सिर और गर्दन की मांसपेशियों को नुकसान हो सकता है।
सांस बढ़ने पर तुरंत कराएं चेकअप :
अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. नरेश कुमार ने बताया ठंड होने के बाद बच्चे की सांस तेज हो सकती है। ऐसे में तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सक से बच्चे का चेकअप करवाएं। समय पर बच्चे का चेकअप न होने पर बीमारी बढ़ सकती है। निमोनिया से बच्चों में चेस्ट इंफेक्शन बढ़ सकता है। इसके अलावा ठंड से ग्रस्त मां को भी नवजात को ठंड से बचाने के लिए सावधानियां बरतने की जरूरत है। मां को सर्दी जुकाम होने पर उसे स्वच्छता का ध्यान रखना जरूरी है। इससे नवजात को ठंड होने की संभावना कम रहेगी।

