बक्सर जिला में 6 माह से ऊपर के शिशुओं का किया गया अन्नप्राशन
• ऊपरी आहार है सुपोषण की कुंजी, सेविकाओं ने बताए ऊपरी आहार के महत्त्व
by amit kumar
m v online bihar news/बक्सर, 19 जनवरी | कुपोषण पर लगाम लगाने के लिए सरकार द्वारा कई कदम उठाये जा रहे हैं। सभी को पोषित करने तथा पोषण का सन्देश घर घर पहुंचाने के लिए सितंबर माह को पोषण माह के रूप में मनाया जाता है। इसी क्रम में मंगलवार को जिले के आंगनबाड़ी केन्द्रों पर 6 माह से ऊपर के शिशुओं का अन्नप्राशन किया गया। जिले के क्रियाशील आंगनबाड़ी केन्द्रों पर अन्नप्राशन दिवस का आयोजन किया गया। पोषक क्षेत्र के शिशुओं को खीर खिलाकर इसकी शुरुआत की गयी तथा धात्री माताओं को भी पूरक पोषाहार के विषय में एवं साफ़- सफाई के बारे में जानकारी दी गयी।
स्तनपान के साथ पूरक पोषाहार बहुत जरूरी :जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (आईसीडीएस) तरणी कुमारी ने बताया बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए 6 माह तक सिर्फ स्तनपान एवं इसके बाद स्तनपान के साथ पूरक पोषाहार बहुत जरूरी है। उन्होंने इस दौरान घर एवं मां-शिशु की साफ़-सफाई की जरूरत पर जोर दिया गया। उन्होंने बताया अनुपूरक आहार शिशु के आने वाले जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। 6 माह से 23 माह तक के बच्चों के लिए यह अति आवश्यक है| 6 से 8 माह के बच्चों को दिन भर में 2 से 3 बार एवं 9 से 11 माह के बच्चों को 3 से 4 बार पूरक आहार तथा 12 माह से 2 साल तक के बच्चों को घर में पकने वाला भोजन भी देना चाहिए। इस दौरान शरीर एवं दिमाग का विकास तेजी से होना शुरू होता है। जिसके लिए स्तनपान के साथ ऊपरी आहार की भी जरूरत होती है।
घर में उपलब्ध सामग्रियों से ही शिशु को पूरी तरह पोषित रखा जा सकता-
जिला के डुमरांव प्रखंड के आंगनबाड़ी केंद्र संख्या 14 की सेविका संगीता कुमारी ने बताया सभी बच्चों की माताओं को अनुपूरक आहार के महत्त्व के बारे में जानकारी दी गयी। उन्हें बताया गया कि घर में उपलब्ध सामग्रियों से ही शिशु को पूरी तरह पोषित रखा जा सकता है। माताओं को नियमित स्तनपान कराने की सलाह भी दी गयी।
ऐसे दें बच्चों को पूरक आहार :
6 माह से 8 माह के बच्चों के लिए नरम दाल, दलिया, दाल -चावल, दाल में रोटी मसलकर अर्ध ठोस (चम्मच से गिराने पर सरके, बहे नहीं), खूब मसले साग एवं फल प्रतिदिन दो बार 2 से 3 भरे हुए चम्मच से देना चाहिए। ऐसे ही 9 माह से 11 माह तक के बच्चों को प्रतिदिन 3 से 4 बार एवं 12 माह से 2 वर्ष की अवधि में घर पर पका पूरा खाना तथा धुले व कटे फल को प्रतिदिन भोजन एवं नास्ते में देना चाहिए।
पूरक पोषाहार है जरूरी :
समेकित बाल विकास योजना के अंतर्गत 6 वर्ष से कम आयु के बच्चों के बेहतर पोषण के लिए पोषाहार वितरित किया जाता है। पूरक पोषाहार के विषय में सामुदायिक जागरूकता के अभाव आभाव में बच्चे कुपोषण का शिकार होते हैं। इससे बच्चे की शारीरिक विकास के साथ मानसिक विकास भी अवरुद्ध होती ता है एवं अति कुपोषित होने से शिशु मृत्यु दर में भी बढ़ोतरी होती है। इस दौरान आंगनबाड़ी केंद्र की सहायिका के साथ अन्य धात्री माताएं एवं शिशु उपस्थित थे।





