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 सरकारी अस्पतालों में सुधार के लिए किया जा रहा है  निरीक्षण


- सिविल सर्जन और डीआईओ ने किया पीएचसी और स्वास्थ्य संस्थानों का दौरा

- अस्पताल में दवा की उपलब्धता और उसके वितरण की जांच कर दिये जा रहे दिशा निर्देश

- भवन और परिसर के रख-रखाव को लेकर भी दिखाई जा रही सख्ती

By amit singh

M v onli e bihar news/बक्सर/जिले के सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों की व्यवस्था में सुधार के लिए जिला स्वास्थ्य समिति ने कड़ा रुख अपनाना शुरू कर दिया है। सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था और अन्य सुविधाओं की जांच के लिए गत दिनों प्रखंडों में स्थित सरकारी अस्पतालों के निरीक्षण शुरू किया गया है। सिविल सर्जन डॉ. जितेंद्र नाथ स्वयं इसकी निगरानी कर रहे हैं। इस क्रम में सिविल सर्जन सदर अनुमंडल स्थित अस्पतालों का निरीक्षण रहे हैं। वहीं, जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. राज किशोर सिंह को डुमरांव अनुमंडल स्थित सरकारी अस्पतालों की व्यवस्थाओं की जांच का जिम्मा दिया गया। जांच के क्रम में अस्पतालों की सभी सेवाओं, सुविधाओं और व्यवस्था की पूरी तरह जांच की जा रही हैताकि, किसी भी स्तर पर गड़बड़ी न हो सके। 


दवाओं की सूची नोटिस बोर्ड पर प्रदर्श करना अनिवार्य :

डीपीएम संतोष कुमार ने बताया स्वास्थ्य सेवाओं को जिला स्तर से लेकर प्रखंड स्तर पर सुदृढ़ बनाने के लिए ही सिविल सर्जन ने यह निर्णय लिया हैताकि, किसी भी स्तर पर मरीजों व लाभुकों को परेशानी का सामना नहीं करना पड़े। डीपीएम ने बताया जांच के क्रम में सबसे पहले दवा की उपलब्धता व उसके लिस्ट की जांच की जा रही हैताकि, यह सुनिश्चित किया जा सके कि उक्त अस्पताल में दवा है या नहीं। साथ ही, उपलब्ध दवाओं की सूची को सार्वजनिक करने के लिए नोटिस बोर्ड पर सूचना प्रदर्श करने का भी निर्देश दिया जा रहा है। इसके अलावा यह भी देखा जा रहा है कि मरीजों के जांच के बाद उन्हें दवा मिल रही है या नहीं। यदि किसी दवा का स्टॉक खत्म हो गया है, तो संबंधित चिकित्सक पर्ची पर यह जरूर लिखेंगे कि उक्त दवा अस्पताल में नहीं है और मरीज को उसे बाहर लेना होगा। 


लेबर रूम, ओटी और ओपीडी में उपकरणों की हो रही है जांच :

डीपीएम ने बताया जांच के क्रम में ओपीडी और लेबर रूम की सेवाओं का निरीक्षण किया जा रहा है। साथ ही, उसकी साफ-सफाई पर भी ध्यान दिया जा रहा है। इसके अलावा ओपीडी, ओटी और लेबर रूम में आवश्यकता के अनुसार उपकरणों की स्थापना को लेकर रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया गया है। ताकि, पता चल सके कि किसी अस्पताल में कौन से उपकरण खराब हैं या उसकी जरूरत है। उसके बाद उक्त उपकरण की ख़रीददारी की जा सकेगी। साथ ही, अस्पताल परिसर की साफ-सफाई और उसके सौंदर्यीकरण को लेकर दिशा-निर्देश दिए जा रहे हैंजिससे अस्पताल परिसर व उसके भवन की सुंदरता बढ़ाई जा सके।

शिकायत के लिए नंबर प्रदर्श करने का दिया निर्देश :

डीपीएम ने बताया कई बार सूचना मिलती है कि अस्पताल में गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी के बाद उनसे या उनके परिजनों से रुपये मांगे जाते हैं। जो सरासर गलत है। पूर्व में किसी प्रसूती महिला के परिजन खुशी से बच्चा होने पर रुपये देते हैं, जो बाद में वसूली का रूप ले लेता है। ऐसे मामलों पर नकेल कसने के साथ अन्य शिकायतों के लिए सभी अस्पतालों में वरीय अधिकारियों का मोबाइल नंबर प्रदर्श करने का भी निर्देश दिया जा रहा हैताकि, अस्पताल के कर्मचारियों की कार्यशैली में सुधार किया जा सके।

सरकारी अस्पतालों में सुधार के लिए किया जा रहा है निरीक्षण

 सरकारी अस्पतालों में सुधार के लिए किया जा रहा है  निरीक्षण


- सिविल सर्जन और डीआईओ ने किया पीएचसी और स्वास्थ्य संस्थानों का दौरा

- अस्पताल में दवा की उपलब्धता और उसके वितरण की जांच कर दिये जा रहे दिशा निर्देश

- भवन और परिसर के रख-रखाव को लेकर भी दिखाई जा रही सख्ती

By amit singh

M v onli e bihar news/बक्सर/जिले के सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों की व्यवस्था में सुधार के लिए जिला स्वास्थ्य समिति ने कड़ा रुख अपनाना शुरू कर दिया है। सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था और अन्य सुविधाओं की जांच के लिए गत दिनों प्रखंडों में स्थित सरकारी अस्पतालों के निरीक्षण शुरू किया गया है। सिविल सर्जन डॉ. जितेंद्र नाथ स्वयं इसकी निगरानी कर रहे हैं। इस क्रम में सिविल सर्जन सदर अनुमंडल स्थित अस्पतालों का निरीक्षण रहे हैं। वहीं, जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. राज किशोर सिंह को डुमरांव अनुमंडल स्थित सरकारी अस्पतालों की व्यवस्थाओं की जांच का जिम्मा दिया गया। जांच के क्रम में अस्पतालों की सभी सेवाओं, सुविधाओं और व्यवस्था की पूरी तरह जांच की जा रही हैताकि, किसी भी स्तर पर गड़बड़ी न हो सके। 


दवाओं की सूची नोटिस बोर्ड पर प्रदर्श करना अनिवार्य :

डीपीएम संतोष कुमार ने बताया स्वास्थ्य सेवाओं को जिला स्तर से लेकर प्रखंड स्तर पर सुदृढ़ बनाने के लिए ही सिविल सर्जन ने यह निर्णय लिया हैताकि, किसी भी स्तर पर मरीजों व लाभुकों को परेशानी का सामना नहीं करना पड़े। डीपीएम ने बताया जांच के क्रम में सबसे पहले दवा की उपलब्धता व उसके लिस्ट की जांच की जा रही हैताकि, यह सुनिश्चित किया जा सके कि उक्त अस्पताल में दवा है या नहीं। साथ ही, उपलब्ध दवाओं की सूची को सार्वजनिक करने के लिए नोटिस बोर्ड पर सूचना प्रदर्श करने का भी निर्देश दिया जा रहा है। इसके अलावा यह भी देखा जा रहा है कि मरीजों के जांच के बाद उन्हें दवा मिल रही है या नहीं। यदि किसी दवा का स्टॉक खत्म हो गया है, तो संबंधित चिकित्सक पर्ची पर यह जरूर लिखेंगे कि उक्त दवा अस्पताल में नहीं है और मरीज को उसे बाहर लेना होगा। 


लेबर रूम, ओटी और ओपीडी में उपकरणों की हो रही है जांच :

डीपीएम ने बताया जांच के क्रम में ओपीडी और लेबर रूम की सेवाओं का निरीक्षण किया जा रहा है। साथ ही, उसकी साफ-सफाई पर भी ध्यान दिया जा रहा है। इसके अलावा ओपीडी, ओटी और लेबर रूम में आवश्यकता के अनुसार उपकरणों की स्थापना को लेकर रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया गया है। ताकि, पता चल सके कि किसी अस्पताल में कौन से उपकरण खराब हैं या उसकी जरूरत है। उसके बाद उक्त उपकरण की ख़रीददारी की जा सकेगी। साथ ही, अस्पताल परिसर की साफ-सफाई और उसके सौंदर्यीकरण को लेकर दिशा-निर्देश दिए जा रहे हैंजिससे अस्पताल परिसर व उसके भवन की सुंदरता बढ़ाई जा सके।

शिकायत के लिए नंबर प्रदर्श करने का दिया निर्देश :

डीपीएम ने बताया कई बार सूचना मिलती है कि अस्पताल में गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी के बाद उनसे या उनके परिजनों से रुपये मांगे जाते हैं। जो सरासर गलत है। पूर्व में किसी प्रसूती महिला के परिजन खुशी से बच्चा होने पर रुपये देते हैं, जो बाद में वसूली का रूप ले लेता है। ऐसे मामलों पर नकेल कसने के साथ अन्य शिकायतों के लिए सभी अस्पतालों में वरीय अधिकारियों का मोबाइल नंबर प्रदर्श करने का भी निर्देश दिया जा रहा हैताकि, अस्पताल के कर्मचारियों की कार्यशैली में सुधार किया जा सके।