anish गिरते तापमान में शिशुओं को हाइपोथर्मिया से पीड़ित होने की रहती है,संभावना - . "body"

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गिरते तापमान में शिशुओं को हाइपोथर्मिया से पीड़ित होने की रहती है,संभावना 

- शरीर में तापमान की गिरावट की स्थिति में शिशुओं व बच्चों का तत्काल कराना होगा इलाज 

- उचित देखभाल के अभाव में कई बार हाइपोथर्मिया जानलेवा भी साबित हो सकता है

By amit singh

M v online bihar news/बक्सर/ लगातार तापमान में गिरावट हो रही है। साथ ही अधिकतम व न्यूनतम तापमान में भी अंतर बढ़ता जा रहा है। जिसका असर लोगों के स्वास्थ्य पर भी दिखने लगा है। तापमान में अंतर बढ़ने से सबसे अधिक परेशानी बच्चों व बुजुर्गों को होती है। ऐसे में खासकर नवजात बच्चों की विशेष देखभाल की जरूरत होती है। नवजात शिशुओं की त्वचा मुलायम होती है और सर्दी में शुष्क हवाएं शरीर की नमी सोख लेती हैं। सामान्यत नवजातों के शरीर का तापमान 36.5 डिग्री तक होना चाहिए। ज्यादा ठंड पड़ने से उनके शरीर का तापमान गिरने लगता है। इसको ही हाइपोथर्मिया कहते हैं। इससे बचाने के लिए शिशुओं को बेबी वॉर्मर में 30-32 डिग्री के बीच तापमान पर रखा जाता है। जहां बेबी वॉर्मर उपलब्ध नहीं हैं। वहां चिकित्सक अभिभावकों को नवजात बच्चों को कंगारू मदर केअर की भी सलाह देते हैं जिससे बच्चों के शरीर का तापमान सामान्य रखा जा सके।

देखभाल के अभाव में जानलेवा साबित हो सकता है हाइपोथर्मिया :

सदर अस्पताल के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. रवि भूषण श्रीवास्तव ने बताया ज्यादा ठंड नहीं सहन कर सकने वाले लोगों के हाथ-पैर ठंडे पड़ने लगते है। साथ ही पेट दर्द भी होने लगता है। बुजुर्गों और बच्चों का शरीर कमजोर होता है, जिस कारण ज्यादा ठंड नहीं झेल पाते। कमजोरी के कारण शरीर तापमान संतुलन नहीं कर पाता, इसलिए परेशानी बढ़ जाती है। उचित देखभाल के अभाव में कई बार हाइपोथर्मिया जानलेवा भी साबित हो सकता है। हाइपोथर्मिया होने पर शरीर का तापमान सामान्य 37 डिग्री से कम होने लगता है। साथ ही रोगी की आवाज धीमी होने के साथ-साथ उसे नींद आने लगती है। शरीर कांपने लगता है और हाथ-पैर जकड़ने लगते हैं। दिमाग का शरीर से नियंत्रण कम होने लगता है।

हाइपोथर्मियो से बचने के लिए सावधनी बेहतर विकल्प :

प्रभारी अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. नरेश कुमार ने बताया हाइपोथर्मिया के लक्षण दिखे तो तत्काल डॉक्टर को दिखाएं। अगर बच्चे को कम सांस आ रही है तो गंभीर लक्षण हैं। उसे गर्म कमरे में रखें। सर्द हवाओं से बचाएं व कंबल का प्रयोग करें। उन्होंने बताया कि हाइपोथर्मियो से बचने के लिए सावधनी बेहतर विकल्प है। नवजात को खुली जगह पर न ले जाएं। सर्दी के दिनों में धूप में ले जाते हैं तो हवा का ध्यान रखें। बच्चों को घर से बाहर लेकर जाते समय गर्म कपड़े अवश्य पहनाएं। खाली पेट उन्हें घर से बाहर लेकर न जाएं। खाली पेट से भी इस बीमारी की चपेट में आने की संभावना रहती है। सिर से शरीर को ज्यादा गर्मी मिलती है, इसलिए उनके सिर को टोपी या गर्म कपड़े से ढंककर रखें। अभिभावक बच्चों के लिए जितना हो सके हीटर से दूरी बनाएं।

इन मानकों का रखें ख्याल, कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :

- नियमित रूप से मास्क और सैनिटाइजर का उपयोग करें।

- भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।

- साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें।

- दो गज की शारीरिक दूरी का पालन का ख्याल रखें।

- बार-बार साबुन या अन्य अल्कोहाल युक्त पदार्थों से हाथ धोने की आदत डालें।

गिरते तापमान में शिशुओं को हाइपोथर्मिया से पीड़ित होने की रहती है,संभावना

 


गिरते तापमान में शिशुओं को हाइपोथर्मिया से पीड़ित होने की रहती है,संभावना 

- शरीर में तापमान की गिरावट की स्थिति में शिशुओं व बच्चों का तत्काल कराना होगा इलाज 

- उचित देखभाल के अभाव में कई बार हाइपोथर्मिया जानलेवा भी साबित हो सकता है

By amit singh

M v online bihar news/बक्सर/ लगातार तापमान में गिरावट हो रही है। साथ ही अधिकतम व न्यूनतम तापमान में भी अंतर बढ़ता जा रहा है। जिसका असर लोगों के स्वास्थ्य पर भी दिखने लगा है। तापमान में अंतर बढ़ने से सबसे अधिक परेशानी बच्चों व बुजुर्गों को होती है। ऐसे में खासकर नवजात बच्चों की विशेष देखभाल की जरूरत होती है। नवजात शिशुओं की त्वचा मुलायम होती है और सर्दी में शुष्क हवाएं शरीर की नमी सोख लेती हैं। सामान्यत नवजातों के शरीर का तापमान 36.5 डिग्री तक होना चाहिए। ज्यादा ठंड पड़ने से उनके शरीर का तापमान गिरने लगता है। इसको ही हाइपोथर्मिया कहते हैं। इससे बचाने के लिए शिशुओं को बेबी वॉर्मर में 30-32 डिग्री के बीच तापमान पर रखा जाता है। जहां बेबी वॉर्मर उपलब्ध नहीं हैं। वहां चिकित्सक अभिभावकों को नवजात बच्चों को कंगारू मदर केअर की भी सलाह देते हैं जिससे बच्चों के शरीर का तापमान सामान्य रखा जा सके।

देखभाल के अभाव में जानलेवा साबित हो सकता है हाइपोथर्मिया :

सदर अस्पताल के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. रवि भूषण श्रीवास्तव ने बताया ज्यादा ठंड नहीं सहन कर सकने वाले लोगों के हाथ-पैर ठंडे पड़ने लगते है। साथ ही पेट दर्द भी होने लगता है। बुजुर्गों और बच्चों का शरीर कमजोर होता है, जिस कारण ज्यादा ठंड नहीं झेल पाते। कमजोरी के कारण शरीर तापमान संतुलन नहीं कर पाता, इसलिए परेशानी बढ़ जाती है। उचित देखभाल के अभाव में कई बार हाइपोथर्मिया जानलेवा भी साबित हो सकता है। हाइपोथर्मिया होने पर शरीर का तापमान सामान्य 37 डिग्री से कम होने लगता है। साथ ही रोगी की आवाज धीमी होने के साथ-साथ उसे नींद आने लगती है। शरीर कांपने लगता है और हाथ-पैर जकड़ने लगते हैं। दिमाग का शरीर से नियंत्रण कम होने लगता है।

हाइपोथर्मियो से बचने के लिए सावधनी बेहतर विकल्प :

प्रभारी अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. नरेश कुमार ने बताया हाइपोथर्मिया के लक्षण दिखे तो तत्काल डॉक्टर को दिखाएं। अगर बच्चे को कम सांस आ रही है तो गंभीर लक्षण हैं। उसे गर्म कमरे में रखें। सर्द हवाओं से बचाएं व कंबल का प्रयोग करें। उन्होंने बताया कि हाइपोथर्मियो से बचने के लिए सावधनी बेहतर विकल्प है। नवजात को खुली जगह पर न ले जाएं। सर्दी के दिनों में धूप में ले जाते हैं तो हवा का ध्यान रखें। बच्चों को घर से बाहर लेकर जाते समय गर्म कपड़े अवश्य पहनाएं। खाली पेट उन्हें घर से बाहर लेकर न जाएं। खाली पेट से भी इस बीमारी की चपेट में आने की संभावना रहती है। सिर से शरीर को ज्यादा गर्मी मिलती है, इसलिए उनके सिर को टोपी या गर्म कपड़े से ढंककर रखें। अभिभावक बच्चों के लिए जितना हो सके हीटर से दूरी बनाएं।

इन मानकों का रखें ख्याल, कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :

- नियमित रूप से मास्क और सैनिटाइजर का उपयोग करें।

- भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।

- साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें।

- दो गज की शारीरिक दूरी का पालन का ख्याल रखें।

- बार-बार साबुन या अन्य अल्कोहाल युक्त पदार्थों से हाथ धोने की आदत डालें।