वीर गति को प्राप्त जेसीओ जग नारायण पाठक को दी गई अंतिम विदाई
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m v online bihar news/बक्सर/ असम राइफल में नौकरी कर रहे सिमरी प्रखण्ड के नियाजीपुर के रहने वाले जग नरायन पाठक जो असम के दिपु में जेसीओ के पद पर तैनात थे. उसी वक्त उनकी तबीयत ख़राब हो गई जिसके बाद उन्हें गोहाटी मलेट्री अस्पताल में भर्ती कराया गया लेकिन उनकी हालत बदतर होती गई उनको डाक्टरों ने बचाने की बहुत कोशिश की लेकिन उन्हें बचाया नहीं गया कहा जा रहा है की उनकी मौत जब वो डियूटी में तैनात थे तभी दिल के दौरा पड़ने के कारण हुई है ! जिसके बाद उनके पैतृक गांव नियाजीपुर लाया गया और सैनिक सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई ! साथ आए सैनिको ने उन्हें सलामी दी ! वही प्रखंड के आलाधिकारियों व राजनेताओ ने पुष्प अर्पित कर उनकी पार्थिक शरिर को श्रद्धांजलि दी !
कहा से कहा
आपको बता दे की शुक्रवार को तक़रीबन 2 बजे पटना एयरपोट पर इनकी पार्थिक शरिर पहुंची जहा पहले से उपस्थित जवानो ने श्रधांजलि दी जिसके बाद उनको सड़क मार्ग के जरिए उनके गांव लाया गया !जिसके बाद गांव ही नहीं आस-पास के लोगो की आँखे नम हो गई और देखने के लिए हुजूम उमड़ गया ! और शहीद के नरो से पूरा इलाका गुज उठा. विरगति को प्राप्त जेसीओ श्री पाठक के शरिर पर लिपटे तिरगे को उनके बड़े भाई पारस नाथ पाठक को सौपा गया आपको बता दे की ये चार भाई थे जिसमे पारस नाथ पाठक बड़े थे श्री पाठक दूसरे नंबर पर थे जो वीर गति को प्राप्त हो गए व मदन पाठक तीसरे तथा चौथे भाई ददन पाठक थे श्री पाठक के दो लड़के और एक लड़की है जबकि बड़े बेटा नूतन पाठक ने उन्हें मुखागिन दी !
मिला था राजयपाल स्वर्ण पदक
3300181 एक्स हवलदार/ 33 असम राइफल्स /जीडी जगनरायन पाठक को दिसंबर 2005 में सेवा करते हुए.सार्थक कर्त्तव्यनिष्ठा एवं कार्य दक्षता का परिचय देने और असम राइफल्स में अन्य व्यक्तियों के लिए मिशाल पेश करने पर राजयपाल स्वर्ण पदक से दिनांक 10 मार्च 2007 में सम्मानित किया गया था !
घटना कैसे हुईभाजपा नेता पारस नाथ पाठक के भाइयो में से दूसरे नंबर पर थे. बताया जा रहा है की 20 नंबर को अपनी छुट्टी से वापस डियूटी पर गए थे बीते बुधवार को उनके सीने में अचानक दर्द होने के बाद उन्हें आर्मी अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया गया जहा इलाज के दौरान ही उनकी मौत हो गई जिसकी सुचना असम राइफल के अधिकारिओ ने फोन के माध्यम से परिवार वालो दी गई जिसके बाद पत्नी उषा देवी का रो-रो के बुरा हाल हो गया है वही परिवार मातमी महौल छा गया है कहा जा रहा है की परिवार को मिला कर के चलने वाले थे






