सर्दियों में डिहाइड्रेशन शिशुओं के साथ सभी के लिए हो सकता है नुकसानदायक
- ठंड के कारण पानी पीने में कमी लाना दे सकता है कोल्ड डायरिया को न्यौता, गुनगुना पानी का करें सेवन
- बच्चों को ताजा व गर्म भोजन का कराएं सेवन, शिशुओं को नियमित रूप से कराएं स्तनपान
By amit singh
M v online bihar news/बक्सर, जिले में मौसम तेजी से करवट ले रहा है। कभी धूप कभी ठंड से लोग बीमार तो हो रहे थे। लेकिन, अब कुहासों के कारण तापमान में और गिरावट होने लगी है। सुबह में धूप नहीं निकलने के कारण गलन जैसी ठंड से लोग परेशान हो रहे हैं। ऐसे मौसम में लोग ठंड के कारण पानी पीने की मात्रा कम कर देते हैं, जो डिहाइड्रेशन का बड़ा कारण बन जाता है। जिसके कारण लोगों को कोल्ड डायरिया से जूझना पड़ता है। खासतौर से छोटे बच्चे इससे सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। इसको लेकर बच्चों के प्रति ठंड में सावधानी बरतनी चाहिए। कोल्ड डायरिया शिशुओं व बच्चों को उनके शरीर के डिहाइड्रेट होने और सर्दी-जुकाम होने से आसानी से पकड़ लेता है। लेकिन ससमय इसका प्रबंधन व इलाज नहीं होने से यह उनके लिए काफी नुकसानदायक हो सकता है। कोल्ड डायरिया के सबसे ज्यादा मामले शुरुआती ठंड में होते हैं। इस दौरान बरती गई लापरवाही मांसपेशियों को नुकसान पहुंचाती है और संक्रमण के चलते उल्टी-दस्त की समस्या शुरू हो जाती है।
ठंड में निमोनिया की भी समस्या अधिक :
शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. रवि भूषण श्रीवास्तव ने बताया कोल्ड डायरिया में लूज मोशंस, भूख न लगना, कपकपी लगना, बॉडी में पानी की कमी के साथ पैरों में ऐठन, दिन भर सुस्ती बने रहना, पेट में दर्द आदि की समस्याएं बढ़ जाती हैं। वहीं, अधिक ठंड में निमोनिया की भी समस्या काफी हद तक बढ़ जाती हैं। फेफड़ों में इनफेक्शन व लगातार खांसी आना, सीने में खड़खड़ाहट की आवाज आना और सांस तेज चलना, चेहरा नीला पड़ना, पसली चलना व कमजोरी और लगातार फीवर बने रहना। ऐसा होने पर तुरंत डॉक्टर से सम्पर्क करना चाहिए। ठंड में पानी कम पीना और लगातार दस्त होने पर डिहाइड्रेशन की समस्या पैदा होती है। इसलिए 6 माह से ऊपर के बच्चों को ओरल रीहाइड्रेशन सलूशन (ओआरएस) एवं जिंक का घोल अवश्य पिलाएं। डायरिया होने पर जितनी जल्दी इसे पिलाना शुरू करेंगे बच्चे के स्वास्थ्य के लिए उतना अच्छा होगा। बच्चों के उम्र के अनुसार सही मात्रा और स्वच्छ पानी में ओआरएस का घोल देना आवश्यक है।
शिशुओं को डिहाइड्रेशन और ठंड से बचाएं :
डॉ. श्रीवास्तव ने बताया शिशुओं में दस्त होने के कई कारण होते हैं। जमीन से कुछ उठा कर खाने, दूषित पानी या उससे बने भोजन, जीवाणु संक्रमण से या सर्दी-जुकाम से दस्त हो सकता है। जिसे नजरअंदाज न करें और चिकित्सक से संपर्क करें तथा शिशुओं को डिहाइड्रेशन और ठंड से बचाएं। छह माह से कम उम्र के बच्चों को डायरिया व डिहाइड्रेशन से बचाने के लिए स्तनपान का कोई विकल्प नहीं है। मां के दूध में वो सभी तत्व उपलब्ध होते हैं। जो शिशु को निर्जलीकरण से बचाने और स्वास्थ्य के लिए जरूरी है। इसलिए उन्हें अधिक से अधिक बार स्तनपान कराएं। इस मौसम में शिशुओं को डायरिया होने की सबसे बड़ी वजह उन्हें ठंड लगना है। इसलिए उनको हमेशा पूरे कपड़े पहना कर रखें। बाहर खेलने जाते समय भी स्वेटर, टोपी, मोजे और दस्ताने जरूर पहना कर रखें। वहीं, गुनगुना पानी व गर्म भोजन कराने से उनमें ठंड लगने की संभावनाएं कम हो जाएंगी। उनके सामने छींकने या खांसने से बचें।

