anish चीनी मिल के अभाव में किसान परेशान,संकट में पड़ी गन्ने की खेती,कभी मिठास के लिए जाना जाता था यह इलाका । - . "body"

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चीनी मिल के अभाव में किसान परेशान,संकट में पड़ी गन्ने की खेती,कभी मिठास के लिए जाना जाता था यह  इलाका ।

 by satendra yadav

m v online bihar news/बक्सर/डुमरांव/अनुमंडल क्षेत्र के गाँवों की मिट्टी गन्ना के लिए उपयुक्त है,परंतु किसानों की समस्या यह है कि अपने खेत में लगे गन्ने की  उत्पादन को किस चीनी मिल में ले जायें, बल्कि इलाके के दो सौ किलोमिटर के दायरे में एक भी चीनी मिल नहीं है,ऐसे में किसान चाह कर भी गन्ने की खेती से परहेज़ कर रहे है । और खेती नहीं कर पा रहे है !ऐसे में सरकरी मदद भी नहीं मिल रही है !

मिठास के लिए चर्चित है इलाका:अनुमंडल क्षेत्र के छतनवार,अरियांव,लाखनडीहरा,खेवली ,केसठ व चौगाइ के इलाके में इलाके में एक दसक पूर्व गन्ने का उत्पादन बडे पैमाने पर होता था ,इन इलाकों में गन्ने की पेराई से बनें गुड से खुशबू दुर दूर तक फैलती थी , मिठास के लिए पहचान बनाने वाले इलाके में गन्ने का उत्पादन बंद के कगार पर है,कृषि मिल न होने से पैदावार में कमी आयी है,

कहते है किसान  :

आपको बता दू की  इन सभी,सच्चिदानंद सिंह,कृष्ण देव सिंह,देवानंद कुशवाहा,मधुसूदन उपाध्याय सहित अन्य किसानों का कहना है कि गुड एवं चीनी के बढती कीमत के लिए सरकार गन्ने के कम पैदावार का बहाना बनाती है ,इन इलाकों में चीनी मिल नहीं होने के कारण  किसानों ने गन्ना की खेती बंद कर दी ,

सोवां,सरौरा,धरहरा,मनपा,धगौली सहित अन्य गाँवों के किसानों का कहना है कि गन्ने  की उपज से  पहले आर्थिक लाभ होता था,जो आज नहीं मिल पा रहा है, शाहाबाद में चीनी मिल नहीं है ,पटना प्रमंडल में एक मात्र चीनी मिल बिहटा में था वह भी बंद  हो गया है, गन्ने की खपत  नहीं होने से से चिन्तित किसान गन्ने की खेती से मुंह मोड रहे है ।

कहते है कृषि अधिकारी 

जब इसके बारे में हम ने प्रखंड कृषि पदाधिकारी कृष्ण मोहन चौधरी से पूछा तो उन्होंने हमें बताया  की गन्ने की खेती के पैदावार बढाने के लिए सरकार द्वारा  पहल कि जा रही है  ताकि किसानों को लाभ मिल सकें । और अपनी जीवन यापन कर सके !


चीनी मिल के अभाव में किसान परेशान,संकट में पड़ी गन्ने की खेती,कभी मिठास के लिए जाना जाता था यह इलाका ।

चीनी मिल के अभाव में किसान परेशान,संकट में पड़ी गन्ने की खेती,कभी मिठास के लिए जाना जाता था यह  इलाका ।

 by satendra yadav

m v online bihar news/बक्सर/डुमरांव/अनुमंडल क्षेत्र के गाँवों की मिट्टी गन्ना के लिए उपयुक्त है,परंतु किसानों की समस्या यह है कि अपने खेत में लगे गन्ने की  उत्पादन को किस चीनी मिल में ले जायें, बल्कि इलाके के दो सौ किलोमिटर के दायरे में एक भी चीनी मिल नहीं है,ऐसे में किसान चाह कर भी गन्ने की खेती से परहेज़ कर रहे है । और खेती नहीं कर पा रहे है !ऐसे में सरकरी मदद भी नहीं मिल रही है !

मिठास के लिए चर्चित है इलाका:अनुमंडल क्षेत्र के छतनवार,अरियांव,लाखनडीहरा,खेवली ,केसठ व चौगाइ के इलाके में इलाके में एक दसक पूर्व गन्ने का उत्पादन बडे पैमाने पर होता था ,इन इलाकों में गन्ने की पेराई से बनें गुड से खुशबू दुर दूर तक फैलती थी , मिठास के लिए पहचान बनाने वाले इलाके में गन्ने का उत्पादन बंद के कगार पर है,कृषि मिल न होने से पैदावार में कमी आयी है,

कहते है किसान  :

आपको बता दू की  इन सभी,सच्चिदानंद सिंह,कृष्ण देव सिंह,देवानंद कुशवाहा,मधुसूदन उपाध्याय सहित अन्य किसानों का कहना है कि गुड एवं चीनी के बढती कीमत के लिए सरकार गन्ने के कम पैदावार का बहाना बनाती है ,इन इलाकों में चीनी मिल नहीं होने के कारण  किसानों ने गन्ना की खेती बंद कर दी ,

सोवां,सरौरा,धरहरा,मनपा,धगौली सहित अन्य गाँवों के किसानों का कहना है कि गन्ने  की उपज से  पहले आर्थिक लाभ होता था,जो आज नहीं मिल पा रहा है, शाहाबाद में चीनी मिल नहीं है ,पटना प्रमंडल में एक मात्र चीनी मिल बिहटा में था वह भी बंद  हो गया है, गन्ने की खपत  नहीं होने से से चिन्तित किसान गन्ने की खेती से मुंह मोड रहे है ।

कहते है कृषि अधिकारी 

जब इसके बारे में हम ने प्रखंड कृषि पदाधिकारी कृष्ण मोहन चौधरी से पूछा तो उन्होंने हमें बताया  की गन्ने की खेती के पैदावार बढाने के लिए सरकार द्वारा  पहल कि जा रही है  ताकि किसानों को लाभ मिल सकें । और अपनी जीवन यापन कर सके !