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 उचित प्रसव व स्वास्थ्य प्रबंधन से मातृ-शिशु मृत्यु दर होगा कम



- प्रशिक्षित नर्स व चिकित्सकों द्वारा जिले में 83% से अधिक प्रसव, 81% से अधिक हुए संस्थागत प्रसव 

- संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए जननी सुरक्षा योजना के तहत दी जाती है राशि

By amit singh

M v online bihar news/बक्स/ 13 नवंबर। मातृ मृत्यु में कमी लाने के लिए प्रसव पूर्व के साथ प्रसव के दौरान बेहतर देखभाल को महत्वपूर्ण माना जाता है। कोरोना काल में भी जिला स्वास्थ्य समिति ने योजनाओं के कार्यान्वयन को  बेहतर तरीके से संचालित किया है। वहीं, इन योजनाओं के बेहतर कार्यान्वयन के लिए जिला स्तर से लेकर सामुदायिक स्तर पर निरंतर प्रयास भी किए जा रहे हैं। इससे मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में उतरोत्तर सुधार भी देखने को मिला है। जिसमें प्रसव, प्रसव पूर्व देखभाल व प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल को सुनिश्चित करने की चुनौती सबसे अहम है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (2015-16) के अनुसार जिले में 81.6 प्रतिशत प्रसव अस्पतालों में होते हैं। जिसमें 83.6 प्रसव किसी प्रशिक्षित चिकित्सक या नर्स की निगरानी में संपादित होते हैं। जिले में 80.4 प्रतिशत गर्भवती माताएं मातृ एवं बाल सुरक्षा कार्ड प्राप्त करती हैं। लगभग 46.5 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं गर्भधारण के तीन महीने के अंदर प्रसव पूर्व जांच कराती हैं। जबकि केवल 23.3 प्रतिशत महिलाएं हीं 4 प्रसव पूर्व जांच करा पाती हैं।

एएनएम व आशाओं का क्षमता वर्धन भी किया गया है : 

प्रभारी सिविल सर्जन डॉ. नरेश कुमार ने बताया ग्रामीण स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण दिवस (वीएचएसएनडी) पर अधिक से अधिक गर्भवती माताओं के प्रसव पूर्व जांच सुनिश्चित कराने पर बल दिया जा रहा है। इसके लिए सभी एएनएम एवं आशाओं का क्षमता वर्धन भी किया गया है। साथ ही प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों के संबंधित प्रभारी चिकित्सा अधिकारी के साथ क्षेत्रीय कार्यकर्ताओं को भी इसको लेकर विशेष निर्देश दिये गए हैं। उन्होंने बताया कि शिशु मृत्यु दर में कमी के लिए प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल को जरूरी माना जाता है। रैपिड सर्वे ऑन चिल्ड्रेन (यूनिसेफ-2016) के अनुसार जिले में 63.9 प्रतिशत बच्चों का सम्पूर्ण टीकाकारण होता है। जबकि केवल 20.4 प्रतिशत नवजातों की जांच सुनिश्चित हो पाती है। बच्चों के लिए विटामिन ए का डोज़ जरूरी होता है।


योजना को बढ़ावा देने के लिए लाभुकों को दी जाती है राशि

स्वास्थ्य विभाग की ओर से मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए विभिन्न योजनाएं चलायी जा रही हैं। जिसमें संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए जननी सुरक्षा योजना के तहत संस्थागत प्रसव कराने पर शहरी माता को 1200 रुपए एवं ग्रामीण माता को 1400 रुपए दिये जाते हैं। प्रसवोत्तर सेवा को मजबूत करने के लिए जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम भी संचालित किया जा रहा है। जिसमें प्रसव के बाद माता को 48 घंटे अस्पताल में विशेष चिकित्सकीय सुविधा प्रदान करने के साथ निःशुल्क भोजन भी उपलब्ध कराने का प्रावधान है।


कोरोनाकाल में इन बातों का रखें ध्यान : 

- बिना मास्क के घर से बाहर न निकले

- अस्पताल में जांच के लिए जाने पर गर्भवती व प्रसूति महिलाएं उचित दो गज की शारीरिक दूरी बना कर रखें

- जांच के दौरान चिकित्सकों व स्वास्थ्य कर्मियों से भी दो गज की शारीरिक दूरी रखें

- बच्चों को गोद में लेने से पूर्व साबुन से अच्छे हाथ धोएं

- घर में बाहर से आने वालों से गर्भवती महिलाओं व बच्चों को सीधे संपर्क में न आने दें ।

उचित प्रसव व स्वास्थ्य प्रबंधन से मातृ-शिशु मृत्यु दर होगा कम

 उचित प्रसव व स्वास्थ्य प्रबंधन से मातृ-शिशु मृत्यु दर होगा कम



- प्रशिक्षित नर्स व चिकित्सकों द्वारा जिले में 83% से अधिक प्रसव, 81% से अधिक हुए संस्थागत प्रसव 

- संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए जननी सुरक्षा योजना के तहत दी जाती है राशि

By amit singh

M v online bihar news/बक्स/ 13 नवंबर। मातृ मृत्यु में कमी लाने के लिए प्रसव पूर्व के साथ प्रसव के दौरान बेहतर देखभाल को महत्वपूर्ण माना जाता है। कोरोना काल में भी जिला स्वास्थ्य समिति ने योजनाओं के कार्यान्वयन को  बेहतर तरीके से संचालित किया है। वहीं, इन योजनाओं के बेहतर कार्यान्वयन के लिए जिला स्तर से लेकर सामुदायिक स्तर पर निरंतर प्रयास भी किए जा रहे हैं। इससे मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में उतरोत्तर सुधार भी देखने को मिला है। जिसमें प्रसव, प्रसव पूर्व देखभाल व प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल को सुनिश्चित करने की चुनौती सबसे अहम है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (2015-16) के अनुसार जिले में 81.6 प्रतिशत प्रसव अस्पतालों में होते हैं। जिसमें 83.6 प्रसव किसी प्रशिक्षित चिकित्सक या नर्स की निगरानी में संपादित होते हैं। जिले में 80.4 प्रतिशत गर्भवती माताएं मातृ एवं बाल सुरक्षा कार्ड प्राप्त करती हैं। लगभग 46.5 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं गर्भधारण के तीन महीने के अंदर प्रसव पूर्व जांच कराती हैं। जबकि केवल 23.3 प्रतिशत महिलाएं हीं 4 प्रसव पूर्व जांच करा पाती हैं।

एएनएम व आशाओं का क्षमता वर्धन भी किया गया है : 

प्रभारी सिविल सर्जन डॉ. नरेश कुमार ने बताया ग्रामीण स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण दिवस (वीएचएसएनडी) पर अधिक से अधिक गर्भवती माताओं के प्रसव पूर्व जांच सुनिश्चित कराने पर बल दिया जा रहा है। इसके लिए सभी एएनएम एवं आशाओं का क्षमता वर्धन भी किया गया है। साथ ही प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों के संबंधित प्रभारी चिकित्सा अधिकारी के साथ क्षेत्रीय कार्यकर्ताओं को भी इसको लेकर विशेष निर्देश दिये गए हैं। उन्होंने बताया कि शिशु मृत्यु दर में कमी के लिए प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल को जरूरी माना जाता है। रैपिड सर्वे ऑन चिल्ड्रेन (यूनिसेफ-2016) के अनुसार जिले में 63.9 प्रतिशत बच्चों का सम्पूर्ण टीकाकारण होता है। जबकि केवल 20.4 प्रतिशत नवजातों की जांच सुनिश्चित हो पाती है। बच्चों के लिए विटामिन ए का डोज़ जरूरी होता है।


योजना को बढ़ावा देने के लिए लाभुकों को दी जाती है राशि

स्वास्थ्य विभाग की ओर से मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए विभिन्न योजनाएं चलायी जा रही हैं। जिसमें संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए जननी सुरक्षा योजना के तहत संस्थागत प्रसव कराने पर शहरी माता को 1200 रुपए एवं ग्रामीण माता को 1400 रुपए दिये जाते हैं। प्रसवोत्तर सेवा को मजबूत करने के लिए जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम भी संचालित किया जा रहा है। जिसमें प्रसव के बाद माता को 48 घंटे अस्पताल में विशेष चिकित्सकीय सुविधा प्रदान करने के साथ निःशुल्क भोजन भी उपलब्ध कराने का प्रावधान है।


कोरोनाकाल में इन बातों का रखें ध्यान : 

- बिना मास्क के घर से बाहर न निकले

- अस्पताल में जांच के लिए जाने पर गर्भवती व प्रसूति महिलाएं उचित दो गज की शारीरिक दूरी बना कर रखें

- जांच के दौरान चिकित्सकों व स्वास्थ्य कर्मियों से भी दो गज की शारीरिक दूरी रखें

- बच्चों को गोद में लेने से पूर्व साबुन से अच्छे हाथ धोएं

- घर में बाहर से आने वालों से गर्भवती महिलाओं व बच्चों को सीधे संपर्क में न आने दें ।