बक्सर में मानवता हुई शर्मसार गंगा नदी में बहते मिले कई शव
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M v online bihar news/Buxar-बक्सर में इंसानियत को शर्मशार करने वाली दिखी तस्वीर चौसा के महदेवा घाट पर लाशो का लगा अम्बार ..जिला प्रसासन ने झाड़ा पल्ला कहा ये मेरी नही उत्तर प्रदेश की लाशें है जो यहाँ बह कर आ गई है..गंगा नदी में बहते मिले शव बिहार में बढ़ते कोरोना संकट के बीच बिहार के बक्सर जिले से एक ऐसी खबर आ रही है जिसमें इंसानियत को शर्मसार करने की तस्वीर सामने आई है। बताते चलें कि जिले के चरित्रवन में शवदाह करने की जगह नहीं बची। गांवों में पिछले एक-डेढ़ महीने से मौतें अचानक बढ़ गई हैं। मरने वाले सभी खांसी-बुखार से पीड़ित थे। वही चौसा श्मशान घाट पर आने वाले अधिकतर शवों को गंगा में डाल दिया जा रहा है। इनमें से सैकड़ों शव गंगा किनारे पर सड़ रहे हैं।
जलती रहती है चिताएं है।
चरित्रवन और चौसा श्मशान घाट पर दिन-रात चिताएं जल रही हैं। कब्रिस्तानों में भी भीड़ लगी रहती है। पहले जहां चौसा श्मशान घाट पर प्रतिदिन दो से पांच चिताएं जलती थीं, वहीं अब 40 से 50 चिताएं जलाई जा रही हैं। बक्सर में यह आंकड़ा औसतन 90 है। हालांकि इसको लेकर के प्रशासन के द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है ऐसे में संक्रमण बीमारी काफी तेज खेल सकती है जिसे रोकना काफी कठिन भी हो सकता है।
नदी में तैरते मिले कइ शव
कोरोना के इस महाकाल में बक्सर जिला के चौसा पास इस्थित महादेव घाट की तस्वीरों ने एक बार पुनः बिचलित कर दिया जब लाशों अम्बार ने गंगा में इस्थित महदेवा घाट को ढक दिया .. हालांकि इस घटना का जैसे ही वीडियो सामने आया जिला प्रसासन के कान खड़े हो गए और लाशो के अम्बार पर गोल गोल जब दे डाला .. चौसा के bdo अशोक कुमार ने बताया कि ये करीब 40 से 45 लाशें होंगी जो अलग अलग जगहों से बह कर महदेवा घाट पर आ कर लगा गई है..बीडीओ साहब ने बताया कि ये लाशें हमारी नही है चुकी हम लोगो ने एक चौकीदार लगा रखा हैं लोग अपनी लाशों को जलाए ऐसे में ये लाशें उत्तरप्रदेश से बह कर आ रही और यहाँ पर लग जा रही है चुकी यूपी की लाशो को रोकने का कोई उपाय नही है ऐसे में हम इन लाशों के निष्पादन की तैयारी में है...
बचते हुए दिखाई दिए अधिकारी
जबकि इस मामले की दूसरे पहलू पर गौर करे तो कोरोना बक्सर सहित अनेक जिलो में महामारी का रूप ले चुकी है इस बात को बताते हुवे पवनी निवास नरेंद्र कुमार मौर्य बताते है कि चौसा घाट की इस्थित काफी दयनीय है कोरोना संक्रमण के कारण यहाँ रोज 100 से 200 लोग आते है और लकड़ी की ब्यवस्था नही होने के कारण लाशें गंगा में ही फेक देते है जिससे कोरोना संक्रमण फैलने का डर बना हुवा जबकि प्रसासन की कोई भी मदद नही है...
क्या कहें सदर एसडीओ
हालांकि sdoसदर kk उपाध्याय ने भी ये कहा कि ये बिहार की नही up की लाशें हो सकती है क्यो की हमारे यहाँ लाशें जलाने की परंपरा है...बहरहाल लोगो का सीधा आरोप प्रसानिक नाकामी को तरफ है जबकि लाश up की है या बिहार ये अलग बहस है जबकि ग्रामीणों के बातों के अनुसार मौत के आंकड़ा प्रसासनिक आंकड़े की सच्चाई से बिल्कुल अलग है जो गंगा में लाशो के अम्बार से साफ दिखता है..





