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 बेवजह घर से बाहर न निकलें, लक्षण आने पर खुद की गतिविधि पर रखें नजर 


- स्वयं की ट्रैवेल हिस्ट्री का कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग के माध्यम से अपनों को संक्रमित होने से बचायें

By admin

M v online bihar news/बक्सर| कोरोना संक्रमण के बढ़ते प्रसार को देखते हुए जिला प्रशासन व स्वास्थ्य समिति के अधिकारी व कर्मी अलर्ट मोड पर काम कर रहे हैं। संक्रमित लोगों के इलाज से लेकर गंभीर अवस्था के मरीजों को ऑक्सीजन  सप्लाई के साथ साथ दवाओं की उपलब्ध कराने को लेकर अधिकारी दिन रात जुटे हुए हैं। लोगों को संक्रमण से बचने के लिए जिलाधिकारी अमन समीर ने जिलेवासियों से बेवजह घर से बाहर न निकलने की अपील की है। उन्होंने कहा है जब तक कोई विशेष कारण न हो, लोग घरों से बाहर न निकलें। साथ ही, उन्होंने सभी अधिकारियों को संक्रमित लोगों की शत-प्रतिशत कॉन्टैक्ट  ट्रेसिंग व ट्रैवेल हिस्ट्री रखने का निर्देश दिया है। जिससे संक्रमण प्रसार की चेन को चिह्नित  कर लोगों को सुरक्षित रखा जा सके।

लोगों के कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग की समझ जरूरी :

सिविल सर्जन डॉ. जितेंद्र नाथ ने बताया संक्रमितों की संख्या में बेतहाशा वृद्धि दर्ज की गई है। साथ ही, 50 से अधिक लोगों को अपनी जान गवानी पड़ी है। संक्रमण प्रसार के ऐसे समय में सुरक्षा के विभिन्न पैमानों को सख्ती से अपनाना महत्वपूर्ण है। वर्तमान समय में संक्रमण के प्रसार को समझने व रोकथाम के लिए लोगों को भी कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग की समझ जरूरी है। उन्होंने बताया कोरोना संक्रमण का फैलाव एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक होता है, इसलिए संक्रमितों के संपर्क में आने वाले लोगों पर नजर रखना जरूरी होता है। विशेषकर संक्रमितों के संपर्क में आये अधिक जोखिम वाले समूह जैसे ह्रदय रोग, मधुमेह तथा अन्य गंभीर रोग से ग्रसित व्यक्ति, गर्भवती महिलाएं व शिशुओं आदि लोगों की ट्रेसिंग बहुत जरूरी है।   

मरीज के सम्पर्क में आने के बाद गतिविधियों को ट्रैक करना अनिवार्य :

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार संक्रमितों की पहचान करने और संक्रमण के प्रसार की कड़ी को तोड़ने की एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग है। इस प्रक्रिया के तहत वैसे लोगों की पहचान और इलाज का प्रबंधन करना है, जो संक्रमित के संपर्क में आये हों या ऐसे लक्षण वाले लोगों से मिलने की संभावना रही हो। कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग में कोविड संक्रमित लोगों के संपर्क में आने का अंदेशा के बाद व्यक्ति को दो दिन से 14 दिन तक आइसोलेट कर उनमें संक्रमण के लक्षणों पर नजर रखा जाता है। कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग के दौरान ऐसे लोगों को अपनी गतिविधियों को ट्रैक करने के लिए भी कहा जाता है जिसके अंतर्गत उनके विभिन्न स्थानों पर जाने और मिलने वाले लोगों पर भी खुद नजर रखने के लिए कहा जाता है। 

लक्षण दिखने पर 14 दिनों के लिए स्वयं को अलग कर लें

डीपीएम संतोष कुमार ने बताया यदि कोई व्यक्ति संभावित संक्रमित मरीज के कांटेक्ट हैं , तो वह पहले फोन के माध्यम से अपने क्षेत्र के स्वास्थ्यकर्मियों को इसकी सूचना दें। यदि कोई संक्रमित के संपर्क में निश्चित रूप से आया है, तो वह स्वयं को 14 दिनों तक यानि लक्षण दिखने तक सबसे अलग कर लें। इस दौरान अपने स्वास्थ्य और बीमारी के लक्षणों पर नजर रखेंगे। उन्होंने कहा कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग में हिस्सा लेकर आप संक्रमण की रोकथाम में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा रहे होते हैं। इसकी मदद से वैसे लोग जिनके  संक्रमण के प्रति अधिक चपेट में आने की संभावना हो उनका बचाव होता है।

बेवजह घर से बाहर न निकलें, लक्षण आने पर खुद की गतिविधि पर रखें नजर

 बेवजह घर से बाहर न निकलें, लक्षण आने पर खुद की गतिविधि पर रखें नजर 


- स्वयं की ट्रैवेल हिस्ट्री का कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग के माध्यम से अपनों को संक्रमित होने से बचायें

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M v online bihar news/बक्सर| कोरोना संक्रमण के बढ़ते प्रसार को देखते हुए जिला प्रशासन व स्वास्थ्य समिति के अधिकारी व कर्मी अलर्ट मोड पर काम कर रहे हैं। संक्रमित लोगों के इलाज से लेकर गंभीर अवस्था के मरीजों को ऑक्सीजन  सप्लाई के साथ साथ दवाओं की उपलब्ध कराने को लेकर अधिकारी दिन रात जुटे हुए हैं। लोगों को संक्रमण से बचने के लिए जिलाधिकारी अमन समीर ने जिलेवासियों से बेवजह घर से बाहर न निकलने की अपील की है। उन्होंने कहा है जब तक कोई विशेष कारण न हो, लोग घरों से बाहर न निकलें। साथ ही, उन्होंने सभी अधिकारियों को संक्रमित लोगों की शत-प्रतिशत कॉन्टैक्ट  ट्रेसिंग व ट्रैवेल हिस्ट्री रखने का निर्देश दिया है। जिससे संक्रमण प्रसार की चेन को चिह्नित  कर लोगों को सुरक्षित रखा जा सके।

लोगों के कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग की समझ जरूरी :

सिविल सर्जन डॉ. जितेंद्र नाथ ने बताया संक्रमितों की संख्या में बेतहाशा वृद्धि दर्ज की गई है। साथ ही, 50 से अधिक लोगों को अपनी जान गवानी पड़ी है। संक्रमण प्रसार के ऐसे समय में सुरक्षा के विभिन्न पैमानों को सख्ती से अपनाना महत्वपूर्ण है। वर्तमान समय में संक्रमण के प्रसार को समझने व रोकथाम के लिए लोगों को भी कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग की समझ जरूरी है। उन्होंने बताया कोरोना संक्रमण का फैलाव एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक होता है, इसलिए संक्रमितों के संपर्क में आने वाले लोगों पर नजर रखना जरूरी होता है। विशेषकर संक्रमितों के संपर्क में आये अधिक जोखिम वाले समूह जैसे ह्रदय रोग, मधुमेह तथा अन्य गंभीर रोग से ग्रसित व्यक्ति, गर्भवती महिलाएं व शिशुओं आदि लोगों की ट्रेसिंग बहुत जरूरी है।   

मरीज के सम्पर्क में आने के बाद गतिविधियों को ट्रैक करना अनिवार्य :

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार संक्रमितों की पहचान करने और संक्रमण के प्रसार की कड़ी को तोड़ने की एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग है। इस प्रक्रिया के तहत वैसे लोगों की पहचान और इलाज का प्रबंधन करना है, जो संक्रमित के संपर्क में आये हों या ऐसे लक्षण वाले लोगों से मिलने की संभावना रही हो। कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग में कोविड संक्रमित लोगों के संपर्क में आने का अंदेशा के बाद व्यक्ति को दो दिन से 14 दिन तक आइसोलेट कर उनमें संक्रमण के लक्षणों पर नजर रखा जाता है। कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग के दौरान ऐसे लोगों को अपनी गतिविधियों को ट्रैक करने के लिए भी कहा जाता है जिसके अंतर्गत उनके विभिन्न स्थानों पर जाने और मिलने वाले लोगों पर भी खुद नजर रखने के लिए कहा जाता है। 

लक्षण दिखने पर 14 दिनों के लिए स्वयं को अलग कर लें

डीपीएम संतोष कुमार ने बताया यदि कोई व्यक्ति संभावित संक्रमित मरीज के कांटेक्ट हैं , तो वह पहले फोन के माध्यम से अपने क्षेत्र के स्वास्थ्यकर्मियों को इसकी सूचना दें। यदि कोई संक्रमित के संपर्क में निश्चित रूप से आया है, तो वह स्वयं को 14 दिनों तक यानि लक्षण दिखने तक सबसे अलग कर लें। इस दौरान अपने स्वास्थ्य और बीमारी के लक्षणों पर नजर रखेंगे। उन्होंने कहा कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग में हिस्सा लेकर आप संक्रमण की रोकथाम में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा रहे होते हैं। इसकी मदद से वैसे लोग जिनके  संक्रमण के प्रति अधिक चपेट में आने की संभावना हो उनका बचाव होता है।