ग्रामीण इलाकों में नहीं है करोना का भय, बिना मास्क लगता है बाजारों में भीड़ उड़ रही है। सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां
By admin
M v online bihar news/बक्सर/सिमरी/जिले में कोरोना संक्रमण काफी तेजी के साथ अपना दूसरा चरण शुरू किया है और लोगों को संक्रमित कर रहा है। जिसके कारण संक्रमित मरीजों की संख्या में बेतहाशा वृद्धि हो रही है। संक्रमण की इस तेज रफ्तार को कम करने के लिए सबसे जरूरी है कि लोग सावधानी बरतना शुरू करें ताकि जिले में बढ़ रहा है कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या में गिरावट आ सके और ऐसी घातक बीमारी से निजात मिले। बल्कि इसे कम करने के लिए सरकार के द्वारा अलग-अलग हथकंडे भी अपनाया जा रहा है। लेकिन वह केवल शहरों में पूर्णतः दिखाई दे रहा है,बात करें ग्रामीण इलाकों की तो यह पूरी तरह से धरातल पर फेल होता हुआ दिखाई दे रहा है। जी हां हम बात कर रहे हैं सिमरी प्रखंड के विभिन्न बाजारों की जहां करोना से लोगों में तनिक भी डर नहीं है। लेकिन बात की जाए तो शाहरो की अपेक्षा गांव के लोग ज्यादातर दूसरे राज्यों में काम करने के लिए जाया करते हैं। ऐसे में अगर आने वाले लोगों की जांच और सरकारी नियमों का हवाला नहीं दिया जाए तो कोरोना अपना प्रचंड रूप दिखाने में तनिक भी कोई कसर नहीं छोड़ेगा।
क्या है गांव के बाजार की हाल
सिमरी प्रखंड के नियाज़ीपुर बाजार में ऐसी तस्वीरें सामने निकलकर करके आई जहां लोगों में कोरोना जैसी घातक बिमारी का तनिक भी डर देखने को नहीं मिला। लोग यहां आपस में मिलकरके एक दूसरे के संपर्क में आकर बाजार में अनावश्यक रूप से भीड लगा रहे हैं। हालांकि दुकानों की बात की जाए तो कई दुकानधारक ऐसे हैं। जो मास्को को तो कुछ जानते ही नहीं, उन्हें लगता है कि मास्क तो एक बहना है हम इसे क्यों पहने। और साहब यहां दो गज दूरी के तो आप भूल ही जाइए।
नहीं होता है नियमों का पालन
बिहार सरकार और केंद्र सरकार के द्वारा गाइडलाइन जारी की गई थी कि शाम 6 बजे सभी दुकानों को बंद कर दी जाएगी लेकिन यहां पर 6 बजे की वजह 8 बजे दुकाने बंद हुआ करती है, और प्रशासनिक अधिकारी आते हैं और अपने डंडा हिला कर के वापस चले जाते हैं। अगर ऐसी रवैया रही तो क्या हम बढ़ रहे कोरोना संक्रमण बीमारी को विलुप्त कर सकते हैं,या इसे कम कर सकते हैं। अभी एक ऐसा मामला जिले से सामने आया जहां कोरोना से एक महिला की मौत हो जाती है। तो वही जिन मां ने उस बेटे को इस धरती पर लाई और चलना सिखाइ है।आज वही उनकी मृत शरीर को छूने से इंकार कर दिया तो अगर इस तरीके की सोच हमारे समाज में रही तो हम कभी विकास नहीं कर सकेंगे।



