सरकारी स्कूलों में टीबी मरीजों की पहचान करेगी आरबीएसके की टीम, बच्चों को करेंगे जागरूक
- आरबीएसके के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों पर भी बच्चों के स्वास्थ्य जांच की प्रक्रिया होगी शुरू
- जिले को 2025 तक टीबी से मुक्त करने का निर्धारित किया गया है लक्ष्य
By amit kumar
M v online bihar news/बक्सर, 05 मार्च | जिले के सभी सरकारी व निजी विद्यालय पूर्व की भांति संचालित होने लगे हैं। हालांकि, सरकार के निर्देश पर बच्चों को मास्क व शारीरिक दूरी पालन करने के लिए जागरूक किया जा रहा है। वहीं, स्वास्थ्य विभाग ने स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों के खुलने के बाद बच्चों में बीमारियों की पहचान के लिए पूर्व की भांति स्क्रीनिंग करने का निर्णय लिया है। इसके लिए राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरएसबीके) की टीम को जिम्मेदारी दी गई है जिसमें आरएसबीके की टीम बच्चों में टीबी व कुष्ठ रोग की पहचान के साथ-साथ उन्हें टीबी के लक्षणों की भी जानकारी देगी। जिसके माध्यम से बच्चे भी अपने घरों व आस-पड़ोस में टीबी के मरीजों के लक्षण आसानी से देख सकेंगे।
सामूहिक प्रयास से ही 2025 तक टीबी से मुक्त हो सकेगा बक्सर :
सीडीओ डॉ. नरेश कुमार ने बताया यदि बक्सर जिले को 2025 तक टीबी से मुक्त करना है, तो इसके लिए सामूहिक प्रयास जरूरी है। इसलिए सरकार ने आरबीएसके को नई जिम्मेदारी सौंपी है। इस संबंध में राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक मनोज कुमार ने पत्र भी भेजा है। जिसके आलोक में सिविल सर्जन के द्वारा चलंत दलों को निर्देशित किया जा रहा कि वे संदर्भित कक्षाओं का माइक्रोप्लान तैयार करें । इसके बाद कोविड प्रोटोकॉल का अनुपालन करते हुए बच्चों की स्वास्थ्य जांच गतिविधियां पुनः प्रारंभ की जाएंगी।
बच्चों में टीबी संक्रमण के प्रसार की संभावना प्रबल :
सीडीओ डॉ. नरेश कुमार ने कहा 0-18 साल के बच्चों में सामान्य रोग की तरह टीबी संक्रमण के प्रसार की संभावना प्रबल है। जो काफी चिंता की बात है। ज्यादातर मामलों में गरीब वर्ग के बच्चों में इसकी ज्यादा समस्या देखी जा रही है। इस रोग का सबसे बड़ा कारण रहन- सहन और खान-पान में अनियमितता है। बचाव के लिए पोषक तत्व के साथ पानी पर भी ध्यान दें। शरीर में कभी भी पानी की कमी होने न दें। जागरूकता और जानकारी के अभाव में भी लोग शुरुआती दौर में ही इसकी पहचान नहीं कर पाते हैं। जिसके कारण आगे चलकर यह गम्भीर रूप ले लेता है। उन्होंने कहा कि बच्चों में प्रारंभिक अवस्था में ही इसकी पहचान हो जाने से इसपर नियंत्रण में काफी साहूलियत होगी।
बच्चों की जांच के बाद शुरू होगा इलाज :
जिला स्तर पर विभाग द्वारा मरीज खोजे जा रहे हैं। लेकिन, बच्चों में बढ़ रही टीबी की समस्या को ढूंढने में परेशानी हो रही है। इसलिए आंगनबाड़ी केन्द्र और स्कूलों में आपके द्वारा किए जाने वाले स्क्रीनिंग के दौरान अगर किसी बच्चे में टीबी या कुष्ठ रोग का लक्षण दिखता है, तो उसकी सूचना पीएचसी या जिला स्तर पर दी जाएगी। जिसके बाद चिह्नित बच्चों की जांच की जाएगी। जांच के बाद उन बच्चों का इलाज शुरू किया जाएगा। इस दौरान चिह्नित बच्चों के परिजनों को भी टीबी की जांच के लिए बुलाया जाएगा। जिससे संक्रमण प्रसार की चेन और परिवार में संक्रमित लोगों का पता लगाया जा सकेगा।


