कोविड-19 की तरह टीबी मरीजों को भी मास्क पहनना बेहद जरूरी
- मास्क के प्रयोग से घटेगी टीबी संक्रमण की संभावना, लोगों को करना होगा जागरूक
- टीबी भी है संक्रामक बिमारी, सर्तकता है जरूरी
By amit kumar
M v online Bihar news/बक्सर, 01 मार्च| कोरोनाकाल में मास्क और फेस मास्क का प्रयोग काफी बढ़ा है। मास्क के इस्तेमाल से लोग स्वयं को न केवल कोविड-19 के संक्रमण से बचाते रहे हैं। बल्कि, वह टीबी व अन्य संक्रमित बीमारियों से बचते रहे। मास्क टीबी मरीजों के लिए भी उतना ही जरूरी है जितना कि एक कोरोना के मरीज को है। अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी सह सीडीओ डॉ. नरेश कुमार ने बताया खांसने व छींकने से टीबी रोग के लक्षण भविष्य में दिखने लगते हैं । इसके लिए पहले भी मास्क लगाना अनिवार्य था। लेकिन, कोरोनाकाल के दौरान मास्क द्वारा इससे बचाव ज्यादा संभव है। उन्होंने बताया टीबी के मरीज के खांसने और छींकने के दौरान मुंह-नाक से निकलने वाली बारीक बूंदें (वाटर ड्रॉपलेट्स) इन्हें फैलाती हैं। फेफड़ों के अलावा दूसरी कोई टीबी एक से दूसरे में नहीं फैलती। फेस मास्क लगे होने की वजह से लोगों में एक-दूसरे से टीबी नहीं फ़ैल सकती।
टीबी एक संक्रामक बीमारी है :
डॉ. नरेश कुमार ने बताया लोगों में फेस मास्क को लेकर जो जागरूकता बनी है, यदि यह आगे भी कायम रही तो साल 2025 तक भारत से टीबी को खत्म करना आसान हो जाएगा। उन्होंने बताया टीबी एक संक्रामक बीमारी है, जो ट्यूबरक्युेलोसिस बैक्टीरिया के कारण होती है। इस बीमारी का सबसे अधिक प्रभाव फेफड़े पर पड़ता है। फेफड़ों के अलावा यह ब्रेन, यूटरस, मुंह, लिवर, किडनी, गले, हड्डी आदि अंगों को भी प्रभावित करता है। टीबी उन्मूलन से निजात पाने के लिए काफी प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए सरकार द्वारा सरकारी अस्पतालों में छह माह दवा नि:शुल्क दी जाती है। टीबी से ग्रसित मरीज को पांच सौ रुपये प्रतिमाह सहायता राशि दी जाती है। पौष्टिक आहार द्वारा टीबी के अलावा अन्य गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है।
टीबी और कोरोना दोनों से बचाता है मास्क:
डॉ. नरेश कुमार ने बताया खांसी और छींक से टीबी और कोविड-19 के संक्रमण प्रसार की संभावना सबसे अधिक होती है। इस क्रम में यदि हम मास्क लगाते हैं, तो वह कोरोना से हमारी रक्षा करने के साथ ही टीबी से भी बचाएगा। दोनों बीमारियों के लक्षण में बहुत समानता है। ऐसे में आम जनता के साथ स्वास्थ्यकर्मियों को भी गलतफहमी हो सकती है। इससे बचने के लिए मरीजों की जांच कराते समय सावधानी बरतने की जरूरत है। जिससे लोगों को अलर्ट किया जा सके।
दो हफ्ते से ज्यादा खांसी होने पर कराएं टीबी की जांच :
टीबी से बचने के लिए भी लगभग यही तरीके अपनाने की सलाह दी जाती है, जैसे- खांसने या छींकने पर अपने मुंह और नाक को अपनी मुड़ी हुई कोहनी या कपड़े से ढकें, रोग प्रतिरोधक क्षमता बनाये रखने के लिए पोषक आहार का सेवन करें। उचित वायु संचार बनाये रखें और यदि दो हफ्ते से ज्यादा खांसी हो तो टीबी की जांच कराएं।
टीबी के लक्षण:
• लगातार 3 हफ्तों से खांसी का आना और आगे भी जारी रहना।
• खांसी के साथ खून का आना।
• छाती में दर्द और सांस का फूलना।
• वजन का कम होना व ज्यादा थकान महसूस होना।
• शाम को बुखार का आना और ठंड लगना।

