लागतार कम होते वजन से थे चिंतित, जांच में हुई टीबी की पुष्टि
तुरंत इलाज और नियमित दवा सेवन से अब बिल्कुल स्वस्थ हैं मीर
लक्षणों को छुपाकर नहीं, इलाज से दूर होगा यक्ष्मा
By amit kumar
M v online bihar news/बक्सर / 8, फरवरी- “सेहत से बड़ी कोई दौलत नहीं. मुझसे बेहतर यह बातें और कौन समझ सकता है। पिछले 2 सालों से लगातार टीबी से जंग लड़ कर आखिरकार मैंने उसे हराया है। यकीन मानिए टीबी पूरी तरह ठीक हो सकता है. बशर्ते आप अफ्ना पूरा इलाज करवाएँ ना कि उसे बीच में ही छोड़ दें’’। यह कहना है राजपुर प्रखंडके बन्नी गांव के 43 वर्षीय -मीर शुकरुल्लाह का जो टीबी को मात देकर अब एक स्वस्थ जीवन व्यतीत कर रहे हैं.
तेजी से कम हो रहा था वजन,जांच कराया तो निकला टीबी:
राजपुर प्रखंडके बन्नी गांव के 43 वर्षीय मीर शुकरुल्लाह पेशे से ट्रक ड्राईवर रह चुके हैं। वह बताते हैं लगभग 2 साल पहले अगस्त,माह 2018 के दौरान अचानक से उन्हें शारीरिक कमजोरी होने लगी और उनका वजन भी कमने लगा। इसी दौरान उन्हें हल्की खांसी और सीने में दर्द भी रहता था। चूंकि पहले से मधुमेह होने के कारण उन्होंने इन बातों को भी मधुमेह का लक्षण ही समझा था।लेकिन जांच के दौरान अस्पताल में बताया गया कि उन्हें टीबी हो गया है। कुछ समय के लिए उनको पैरों तले जमीन खिसकती नजर आई। लेकिन अस्पताल कर्मियों ने काफी हौसला दिया और बताया की टीबी लाइलाज नहीं है। इसके लिए सरकार की तरफ से मुफ्त में जांच और इलाज उपलव्ध है और नियमित रूप से दवा खाने से पूरा ठीक हो जाता है। तब उनका हौसला बढ़ा और उन्होने तुरंत इलाज शुरू करवाया।
कुछ दिनों के इलाज से ही दिखने लगा फर्क, मिली आर्थिक सहायता भी :
टीबी का इलाज शुरू होने से पहले तक उनका स्वास्थ्य और वजन काफी तेजी से नीचे गिर रहा था। एक औसत कद होते हुये भी उनका वजन 48 किलोग्राम से भी नीचे आ चुका था। लेकिन इलाज शुरू होते ही वजन का गिरना तुरंत बंद हो गया । केवल 10 दिन दवा खाने के बाद जब फिर से वजन कराया तो उनका वजन तेजी से बढ़कर 50 किलोग्राम से भी ज्यादा हो गया तथा अब 27 महीने के बाद उनका वजन बढ़कर 65 किलोग्राम है। मीर शुकरुल्लाह कहते हैं अस्पताल कर्मियों के हमेशा हिम्मत देते रहने और मदद के कारण आज वह बिल्कुल स्वस्थ और खुशहाल हैं। यही नहीं मुफ्त इलाज के साथ सरकार की तरफ से उन्हें ईलाज के दौरान उनके बेहतर पोषण के लिए प्रति माह 500 रूपये की सहायता राशि भी दी गयी.
लक्षणों को ना छिपाएँ, ससमय इलाज कराएं :
वरीय यक्ष्मा पर्यवेक्षक गौरव कुमार का मानना है मीर शुकरुल्लाह के पूरी तरह ठीक होने का सबसे बड़ा कारण है कि उन्होंने अपने रोग को छुपाया नहीं। जांच में टीबी ग्रसित होने की पुष्टि होने पर शुरू में वह घबरा गए थे. लेकिन जब उन्हें समझाया गया तो वह तुरंत इलाज के लिए तैयार हो गए। साथ ही चिकित्सकीय परामर्श को ध्यान में रखते हुये अपना समुचित इलाज होने तक दवा के नियमित सेवन में कोई लापरवाही नहीं बरती। टीबी लाइलाज नहीं है और न ही यह छूने से फैलता है। इसलिए यदि किसी व्यक्ति में या उसके आस-पड़ोस के किसी व्यक्ति में टीबी के लक्षण दिखे तो तो उसे घृणा की नजर से ना देखेँ। तुरंत नजदीकी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर जाएँ और अपने बलगम की मुफ्त में जांच कराएं तथा चिन्हित होने पर तत्काल इलाज शुरू करायेँ। टीबी का इलाज निशुल्क है ताकि सामुदायिक भागीदारी से देश को 2025 तक टीबी मुक्त किया जा सके।

