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 बेहतर मातृ पोषण के लिए आहार विविधता है जरूरी





पोषण के सन्देश में समानता करेगी व्यवहार  परिवर्तन में मदद- डॉ. जगताप 

कार्यशाला के माध्यम से मातृ एवं शिशु पोषण पर दी गई जानकारी

by amit kumar 

m v online bihar news/पटना, 12 फ़रवरी| अलाइव एंड थराइव के सहयोग से इंदिरा गाँधी आयुर्विज्ञान संस्थान ,पटना के कम्युनिटी मेडिसिन शाखा में चिकित्सकों एवं नर्सों की मातृ,शिशु एवं छोटे बच्चों के पोषण पर प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गयी| कार्यशाला के माध्यम से मातृत्व के प्रथम 1000 दिन में पोषण की महता पर विस्तार से जानकारी दी गई|  

कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए इंदिरा गाँधी आयुर्विज्ञान संस्थान के निदेशक डॉ.एन.आर.बिसवास ने कहा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के लिए चिकित्सीय सुविधा के साथ बेहतर परामर्श भी अत्यावश्यक है| उन्होंने बताया कि गर्भवती महिला का सही पोषण उसके एवं उसके गर्भस्थ शिशु के जीवन पर दूरगामी प्रभाव डालता है| अलाइव एंड थराइव के सहयोग से आयोजित प्रशिक्षण से चिकित्सकों एवं नर्सों को पोषण का सटीक और प्रभावी सन्देश समुदाय तक पहुंचाने में सहायता मिलेगी| 

कार्यक्रम की शुरुआत प्रवीण कुमार शर्मा , परियोजना निदेशक, अलाइव एंड थराइव ने कार्यक्रम के उद्देश्यों और  अलाइव एंड थराइव के सहयोग के बारे में बताकर की. उन्होंने राज्य में संस्था द्वारा आयोजित की गयी पर्शिक्षण कार्यक्रमों के बारे में सभी को अवगत कराया.

पोषण के संदेशों में एकरूपता जरूरी :

इस अवसर पर अलाइव एंड थराइव के तकनीकी एवं कार्यक्रम परामर्शदाता डॉ. शैलेश जगताप ने कहा  कि मातृ, शिशु एवं छोटे बच्चों के पोषण में सुधार लाने के लिए चिकित्सकीय सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार आवश्यक है.|इसके लिए पोषण के बारे में दिए दी जा रहे ही संदेशों में एकरूपता होनी चाहिए ताकि समुदाय तक एक ही सन्देश हमेशा सामान रूप से पहुंचे.| हर चिकित्सीय संस्थान में आने वाली गर्भवती एवं धात्री माताओं को पोषण के बारे में पूरी जानकारी दी जानी चाहिए.| सन्देश में समानता समुदाय में पोषण को लेकर व्यवहार व्यव्हार परिवर्तन लाने में मदद करेगी.|

बेहतर मातृ एवं शिशु पोषण के लिए आयरन और कैल्सियम कैल्शियम की गोली आवश्यक:

एम्स पटना की के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. मोनिका अनंत ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान महिला को 180 दिन तक प्रतिदिन आयरन एवं फॉलिक एसिड की एक गोली के साथ कैल्सियम की दो गोली प्रतिदिन लेनी चाहिए.| प्रसव के उपरांत भी 180 दिन तक प्रतिदिन आयरन एवं फॉलिक एसिड की एक गोली के साथ कैल्सियम की दो गोली लेनी चाहिए.| एक गर्भवती महिला को अधिक से अधिक आहार सेवन में विविधता लानी चहिए.| इससे महिला को सभी जरूरी रुरी पोषक तत्वों की प्राप्ति हो जाती है|.माता के वजन से गर्भस्थ शिशु का स्वास्थ्य स्वास्थ प्रभावित होता है| इसलिए गर्भावस्था के दौरान निश्चित अंतराल पर माता का वजन जरूर रुर करना चाहिए ताकि ज्ञात हो सके कि बच्चे का विकास हो रहा है.| 

शुरूआती 6 महीने तक सिर्फ स्तनपान है पोषित जीवन कुंजी:

डॉ. मोनिका ने बताया जन्म के अन्दर माँ का पहला पीला गाढ़ा दूध एवं 6 महीनों तक सिर्फ स्तनपान एक सुपोषित और स्वस्थ जीवन की आधारशीला रखता है. नियमित स्तनपान नवजात को कई बिमारियों से सुरक्षा देने के साथ माता के स्वास्थ्य को भी ठीक रखता है.

कार्यक्रम में प्रतिभागियों का स्वागत एवं परिचय तथा संचालन अलाइव एंड थराइव, पटना की वरीय कार्यक्रम प्रबंधक डॉ अनुपम श्रीवास्तव ने किया|. इस अवसर पर इंदिरा गाँधी आयुर्विज्ञान संस्थान संसथान के कई चिकित्सक, नर्स एवं छात्रों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर प्रशिक्षण का लाभ उठाया.|

बेहतर मातृ पोषण के लिए आहार विविधता है जरूरी

 बेहतर मातृ पोषण के लिए आहार विविधता है जरूरी





पोषण के सन्देश में समानता करेगी व्यवहार  परिवर्तन में मदद- डॉ. जगताप 

कार्यशाला के माध्यम से मातृ एवं शिशु पोषण पर दी गई जानकारी

by amit kumar 

m v online bihar news/पटना, 12 फ़रवरी| अलाइव एंड थराइव के सहयोग से इंदिरा गाँधी आयुर्विज्ञान संस्थान ,पटना के कम्युनिटी मेडिसिन शाखा में चिकित्सकों एवं नर्सों की मातृ,शिशु एवं छोटे बच्चों के पोषण पर प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गयी| कार्यशाला के माध्यम से मातृत्व के प्रथम 1000 दिन में पोषण की महता पर विस्तार से जानकारी दी गई|  

कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए इंदिरा गाँधी आयुर्विज्ञान संस्थान के निदेशक डॉ.एन.आर.बिसवास ने कहा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के लिए चिकित्सीय सुविधा के साथ बेहतर परामर्श भी अत्यावश्यक है| उन्होंने बताया कि गर्भवती महिला का सही पोषण उसके एवं उसके गर्भस्थ शिशु के जीवन पर दूरगामी प्रभाव डालता है| अलाइव एंड थराइव के सहयोग से आयोजित प्रशिक्षण से चिकित्सकों एवं नर्सों को पोषण का सटीक और प्रभावी सन्देश समुदाय तक पहुंचाने में सहायता मिलेगी| 

कार्यक्रम की शुरुआत प्रवीण कुमार शर्मा , परियोजना निदेशक, अलाइव एंड थराइव ने कार्यक्रम के उद्देश्यों और  अलाइव एंड थराइव के सहयोग के बारे में बताकर की. उन्होंने राज्य में संस्था द्वारा आयोजित की गयी पर्शिक्षण कार्यक्रमों के बारे में सभी को अवगत कराया.

पोषण के संदेशों में एकरूपता जरूरी :

इस अवसर पर अलाइव एंड थराइव के तकनीकी एवं कार्यक्रम परामर्शदाता डॉ. शैलेश जगताप ने कहा  कि मातृ, शिशु एवं छोटे बच्चों के पोषण में सुधार लाने के लिए चिकित्सकीय सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार आवश्यक है.|इसके लिए पोषण के बारे में दिए दी जा रहे ही संदेशों में एकरूपता होनी चाहिए ताकि समुदाय तक एक ही सन्देश हमेशा सामान रूप से पहुंचे.| हर चिकित्सीय संस्थान में आने वाली गर्भवती एवं धात्री माताओं को पोषण के बारे में पूरी जानकारी दी जानी चाहिए.| सन्देश में समानता समुदाय में पोषण को लेकर व्यवहार व्यव्हार परिवर्तन लाने में मदद करेगी.|

बेहतर मातृ एवं शिशु पोषण के लिए आयरन और कैल्सियम कैल्शियम की गोली आवश्यक:

एम्स पटना की के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. मोनिका अनंत ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान महिला को 180 दिन तक प्रतिदिन आयरन एवं फॉलिक एसिड की एक गोली के साथ कैल्सियम की दो गोली प्रतिदिन लेनी चाहिए.| प्रसव के उपरांत भी 180 दिन तक प्रतिदिन आयरन एवं फॉलिक एसिड की एक गोली के साथ कैल्सियम की दो गोली लेनी चाहिए.| एक गर्भवती महिला को अधिक से अधिक आहार सेवन में विविधता लानी चहिए.| इससे महिला को सभी जरूरी रुरी पोषक तत्वों की प्राप्ति हो जाती है|.माता के वजन से गर्भस्थ शिशु का स्वास्थ्य स्वास्थ प्रभावित होता है| इसलिए गर्भावस्था के दौरान निश्चित अंतराल पर माता का वजन जरूर रुर करना चाहिए ताकि ज्ञात हो सके कि बच्चे का विकास हो रहा है.| 

शुरूआती 6 महीने तक सिर्फ स्तनपान है पोषित जीवन कुंजी:

डॉ. मोनिका ने बताया जन्म के अन्दर माँ का पहला पीला गाढ़ा दूध एवं 6 महीनों तक सिर्फ स्तनपान एक सुपोषित और स्वस्थ जीवन की आधारशीला रखता है. नियमित स्तनपान नवजात को कई बिमारियों से सुरक्षा देने के साथ माता के स्वास्थ्य को भी ठीक रखता है.

कार्यक्रम में प्रतिभागियों का स्वागत एवं परिचय तथा संचालन अलाइव एंड थराइव, पटना की वरीय कार्यक्रम प्रबंधक डॉ अनुपम श्रीवास्तव ने किया|. इस अवसर पर इंदिरा गाँधी आयुर्विज्ञान संस्थान संसथान के कई चिकित्सक, नर्स एवं छात्रों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर प्रशिक्षण का लाभ उठाया.|