anish युवाओं को जागरूक करके ही संभव हो सकता है एड्स पर नियंत्रण - . "body"

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 युवाओं को जागरूक करके ही संभव हो सकता है एड्स पर नियंत्रण


- गर्भवती महिलाओं में एड्स की जांच के लिए जिले में 11 कैम्प का होगा संचालन

- पहले दिन बक्सर व इटाढ़ी प्रखंड में जांच शिविर का हुआ आयोजन

By amit singh

M v online bihar news/बक्सर/एड्स (एक्वायर्ड इम्यून डेफिशिएंसी सिंड्रोम) के रोकथाम के साथ उसकी पहचान के लिए जिले में जांच शिविर का आयोजन किया गया। पहले दिन बक्सर व इटाढ़ी प्रखंड में शिविर का आयोजन किया गया,जहां पर गर्भवती महिलाओं के साथ यक्ष्मा, कालाजार और उच्च गंभीर बीमारियों से ग्रसित मरीजों की जांच की जा रही है। 2030 तक राज्य से एड्स के उन्मूलन के लिए राज्य सरकार संकल्पित है। युवाओं को जागरूक कर और उन्हें विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम में शामिल कर एड्स पर नियंत्रण संभव है। राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक मनोज कुमार के निर्देश पर युवाओं की भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से कालेज स्तर पर 'सेहत सेंटर' खोलने की योजना तैयार की जा रही है,जहां पर एड्स के साथ अन्य बीमारियों व स्वास्थ्य सुविधाओं पर खुले मंच से चर्चा की जा सके।

जिले में 11 कैम्प का होगा अयोजन : 

प्रभारी एसीएमओ सह सीडीओ डॉ. नरेश कुमार ने बताया जिले में 29 दिसंबर से लेकर 11 जनवरी तक 11 शिविर का आयोजन किया जाना है। यदि जरूरत पड़ी तो इसे आगे बढ़ाते हुए शिविरों की संख्या बढ़ाई भी जा सकती है।उन्होंने बताया एड्स सामान्यतः असुरक्षित यौन सम्बंध, एड्स पीड़ित महिला से उसके गर्भस्थ शिशु, संक्रमित इंजेक्शन आदि से होता है। सरकार एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा एड्स उन्मूलन के लिए कई कार्यक्रम चलाये जा रहे हैं और हर स्तर पर जागरूकता फैलाने की कोशिश की जा रही है। एड्स लाइलाज बीमारी है तथा जानकारी एवं शिक्षा ही इससे बचाव का सबसे सशक्त जरिया है। सभी गर्भवती माता को नियमपूर्वक एड्स की जांच करानी चाहिए तथा यह सुविधा प्रखंड से लेकर जिला अस्पतालों तक निःशुल्क उपलब्ध है।


तीन महीनों तक नहीं आती है जांच की सही रिपोर्ट : 

प्रभारी एसीएमओ डॉ. कुमार ने बताया यदि कोई एचआईवी महिला गर्भवती है तो, उनके गर्भस्थशिशु में भी इस बीमारी के पनपने प्रबल सम्भवना होती है। जिस पर अंकुश लगाने के लिए गर्भावस्था शुरू होने से प्रसूति होने तक प्रत्येक तीन महीनों पर जिला एड्स नियंत्रण सोसाइटी की ओर से मुफ्त एचआईवी जांच का निर्णय लिया गया है। यह बीमारी पीड़ित मरीज से स्वास्थ्य शरीर में रक्त चढ़ाने, संक्रमित सूई का प्रयोग करने या किसी भी अन्य कारण से अगर एचआईवी का कीटाणू शरीर में प्रवेश करता है। इसके कीटाणू तीन महीने बाद सक्रीय होते हैं। जिसे विंडो पीरियड के नाम से जाना जाता है। इस दौरान एचआईवी की जांच रिपोर्ट सहीं नहीं आती है। इसके मद्दे नजर प्रत्येक तीन महीने पर जांच करने का निर्णय लिया गया है।

शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता हो जाती है समाप्त :

सदर प्रखंड के महदह में जांच शिविर का आयोजन कर रहे प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. सुधीर कुमार ने बताया एड्स शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को पूरी तरह समाप्त कर देता है। जिससे पीड़ित अन्य गंभीर बीमारियों जैसे टीबी, कैंसर व अन्य संक्रामक बीमारियों से प्रभावित हो जाता है। एड्स से बचाव के लिए जीवनसाथी के अलावा किसी से यौन संबंध नहीं बनायें। यौन संपर्क के दौरान कंडोम का इस्तेमाल करें।एड्स पीड़ित महिलाएं गर्भधारण से पहले चिकित्सीय सलाह लें। बिना जांच के या अनजान व्यक्ति से रक्त न लें। वहीं डिस्पोजेबल सीरिंज व सुई उपयोग में लायें। दूसरों के प्रयोग में लाये गये ब्लेड आदि को इस्तेमाल में नहीं लायें। वहीं, दूसरी ओर शिविर में एड्स की जांच कराने के लिए आसपास की पंचायतों से गर्भवती महिलाओं समेत अन्य लोग जुटे। मौके पर बीसीएम प्रिंस कुमार के अलावा अन्य स्वस्थ्य कर्मी मौजूद रहे।

युवाओं को जागरूक करके ही संभव हो सकता है एड्स पर नियंत्रण

 युवाओं को जागरूक करके ही संभव हो सकता है एड्स पर नियंत्रण


- गर्भवती महिलाओं में एड्स की जांच के लिए जिले में 11 कैम्प का होगा संचालन

- पहले दिन बक्सर व इटाढ़ी प्रखंड में जांच शिविर का हुआ आयोजन

By amit singh

M v online bihar news/बक्सर/एड्स (एक्वायर्ड इम्यून डेफिशिएंसी सिंड्रोम) के रोकथाम के साथ उसकी पहचान के लिए जिले में जांच शिविर का आयोजन किया गया। पहले दिन बक्सर व इटाढ़ी प्रखंड में शिविर का आयोजन किया गया,जहां पर गर्भवती महिलाओं के साथ यक्ष्मा, कालाजार और उच्च गंभीर बीमारियों से ग्रसित मरीजों की जांच की जा रही है। 2030 तक राज्य से एड्स के उन्मूलन के लिए राज्य सरकार संकल्पित है। युवाओं को जागरूक कर और उन्हें विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम में शामिल कर एड्स पर नियंत्रण संभव है। राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक मनोज कुमार के निर्देश पर युवाओं की भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से कालेज स्तर पर 'सेहत सेंटर' खोलने की योजना तैयार की जा रही है,जहां पर एड्स के साथ अन्य बीमारियों व स्वास्थ्य सुविधाओं पर खुले मंच से चर्चा की जा सके।

जिले में 11 कैम्प का होगा अयोजन : 

प्रभारी एसीएमओ सह सीडीओ डॉ. नरेश कुमार ने बताया जिले में 29 दिसंबर से लेकर 11 जनवरी तक 11 शिविर का आयोजन किया जाना है। यदि जरूरत पड़ी तो इसे आगे बढ़ाते हुए शिविरों की संख्या बढ़ाई भी जा सकती है।उन्होंने बताया एड्स सामान्यतः असुरक्षित यौन सम्बंध, एड्स पीड़ित महिला से उसके गर्भस्थ शिशु, संक्रमित इंजेक्शन आदि से होता है। सरकार एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा एड्स उन्मूलन के लिए कई कार्यक्रम चलाये जा रहे हैं और हर स्तर पर जागरूकता फैलाने की कोशिश की जा रही है। एड्स लाइलाज बीमारी है तथा जानकारी एवं शिक्षा ही इससे बचाव का सबसे सशक्त जरिया है। सभी गर्भवती माता को नियमपूर्वक एड्स की जांच करानी चाहिए तथा यह सुविधा प्रखंड से लेकर जिला अस्पतालों तक निःशुल्क उपलब्ध है।


तीन महीनों तक नहीं आती है जांच की सही रिपोर्ट : 

प्रभारी एसीएमओ डॉ. कुमार ने बताया यदि कोई एचआईवी महिला गर्भवती है तो, उनके गर्भस्थशिशु में भी इस बीमारी के पनपने प्रबल सम्भवना होती है। जिस पर अंकुश लगाने के लिए गर्भावस्था शुरू होने से प्रसूति होने तक प्रत्येक तीन महीनों पर जिला एड्स नियंत्रण सोसाइटी की ओर से मुफ्त एचआईवी जांच का निर्णय लिया गया है। यह बीमारी पीड़ित मरीज से स्वास्थ्य शरीर में रक्त चढ़ाने, संक्रमित सूई का प्रयोग करने या किसी भी अन्य कारण से अगर एचआईवी का कीटाणू शरीर में प्रवेश करता है। इसके कीटाणू तीन महीने बाद सक्रीय होते हैं। जिसे विंडो पीरियड के नाम से जाना जाता है। इस दौरान एचआईवी की जांच रिपोर्ट सहीं नहीं आती है। इसके मद्दे नजर प्रत्येक तीन महीने पर जांच करने का निर्णय लिया गया है।

शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता हो जाती है समाप्त :

सदर प्रखंड के महदह में जांच शिविर का आयोजन कर रहे प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. सुधीर कुमार ने बताया एड्स शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को पूरी तरह समाप्त कर देता है। जिससे पीड़ित अन्य गंभीर बीमारियों जैसे टीबी, कैंसर व अन्य संक्रामक बीमारियों से प्रभावित हो जाता है। एड्स से बचाव के लिए जीवनसाथी के अलावा किसी से यौन संबंध नहीं बनायें। यौन संपर्क के दौरान कंडोम का इस्तेमाल करें।एड्स पीड़ित महिलाएं गर्भधारण से पहले चिकित्सीय सलाह लें। बिना जांच के या अनजान व्यक्ति से रक्त न लें। वहीं डिस्पोजेबल सीरिंज व सुई उपयोग में लायें। दूसरों के प्रयोग में लाये गये ब्लेड आदि को इस्तेमाल में नहीं लायें। वहीं, दूसरी ओर शिविर में एड्स की जांच कराने के लिए आसपास की पंचायतों से गर्भवती महिलाओं समेत अन्य लोग जुटे। मौके पर बीसीएम प्रिंस कुमार के अलावा अन्य स्वस्थ्य कर्मी मौजूद रहे।