सही उपचार से ही हो सकता है टीबी का ईलाज
- वर्ष 2025 तक टीबीउन्मूलन का है लक्ष्य, बेहतर पोषण से टीबी से बचाव संभव
By amit singh
M v online Bihar news/बक्सर /टीबी बैक्टीरिया से होनेवाली बीमारी है. यह आमतौर पर फेफड़ों से शुरू होती है, लेकिन यह ब्रेन, यूटरस, मुंह, लिवर, किडनी, गला, हड्डी आदि शरीरके किसी भी हिस्से में हो सकती है. टीबी का बैक्टीरिया हवा के जरिए फैलता है. खांसने और छींकने के दौरान मुंह-नाक से निकलने वाली बारीक बूंदों सेयह संक्रमण फैलता है. दो हफ्ते से ज्यादा लगातार खांसी, खांसी के साथ बलगम का आना, कभी-कभी बलगम के साथ खून का आना, भूख कम लगना, लगातार वजन कम होना, शाम या रात के वक्त बुखार आना, सर्दी में भी पसीना आना, सांस उखड़ना या सांस लेते हुए सीने में दर्द होना इत्यादि टीबी के लक्षण हो सकते हैं. ऐसे लक्षण दिखाई देने पर मरीज को सरकारी अस्पताल आकर बलगम की जाँच जरुर करानी चाहिए. टीबी लाईलाज रोग नहीं है. इसका सम्पूर्ण निःशुल्क ईलाज सरकारी अस्पतालों पर उपलब्ध है.
दवाओं के पूरे डोज नहीं लेने से एमडीआर की संभावना:
प्रभारी अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी सह सीडीओ डॉ. नरेश कुमार ने बताया टीबी का इलाज पूरी तरह मुमकिन है. सरकारी अस्पतालों और डॉट्स सेंटरों मेंइसका निशुल्क इलाज होता है. टीबी से ग्रसित मरीज़ों द्वारा टीबी के दवा का पूरा कोर्स नहीं करने के कारण एमडीआर टीबी होने का खतरा बढ़ जाता है. अनियमित टीबी दवा का सेवन करना, बिना चिकित्सीय परामर्श के दवा दुकानों से टीबी का दवा लेना एवं टीबी के दवा खाने से पहले ड्रग सेंसटिविटी जांच नहीं होने से भी एमडीआरटीबी होने का ख़तरा बढ़ जाता है. टीबी का सम्पूर्ण एवं सटीक ईलाज सरकारी स्वास्थ्य विभाग के पास उपलब्ध है एवं सीबीनेट जैसे नवीन उपकरणों के सहायता से सरकारी क्षय रोग विभाग टीबी के खिलाफ़ मजबूती से लड़ने के लिए सक्षम भी है. राज्य सरकार ने राज्य से 2025 तक टीबी उन्मूलन का लक्ष्य रखा है. टीबी पीड़ितों के बेहतर पोषण के लिए सरकार द्वारा 500 रूपये की सहायता राशि भी दी जा रही है. इसके लिए टीबी पीड़ितों को टीबी अस्पताल में पंजीकरण कराना जरुरी है.
बेहतर पोषण से हो सकता है बचाव :
बेहतर पोषण के माध्यम से रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत कर टीबी जैसे गंभीर रोग से बचा जा सकता है. इसके लिए खासकर प्रोटीन युक्त आहार का सेवन करना चाहिए. सोयाबीन, दालें, मछली, अंडा, पनीर आदि में प्रोटीन की काफ़ी मात्रा होती है जो शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है. कमजोर इम्युनिटी से टीबी के बैक्टीरिया के सक्रिय होने की संभावना अधिक होती है. टीबी काबैक्टीरिया शरीर में ही होता है,लेकिन अच्छी इम्युनिटी से इसे सक्रिय होने से रोका जा सकता है.

