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 प्रकृतिक को बचाने के लिए करे दीपावली  में मिट्टी के बने दियो का उपयोग -सिमरी थानाध्यक्ष राहुल कुमार 


by admin

m v online bihar news/बक्सर/ सिमरी थानाध्यक्ष राहुल कुमार ने  लोगो से अपील करते हुए कहा की दीपावली का त्यौहार मनाये जाने को लेकर ग्रामीण क्षेत्र से लेकर शहरी क्षेत्रों में भी धूमधाम से तैयारी चल रही है। दीपावली पर्व के नजदीक आने से कुम्हार कारीगरों द्वारा मिट्टी के दिए एवं घरौंदे बनाने का काम उत्साह के साथ किया जा रहा है। कारीगरों को उम्मीद है कि लॉकडाउन में उन्हें जो नुकसान हुआ है उसकी भरपाई दीपावली में हो जाएगी । शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्र में मिट्टी के दिए दीपावली के पर्व पर जलाए जाने की परंपरा है। इस पर्व पर लोग मिट्टी के दीए के साथ-सथ बच्चों के खेलने के लिए खिलौने सहित अन्य पूजा पाठ से संबंधित मिट्टी के बर्तन कुम्हार कारीगर से खरीदारी करते हैं। ऐसे में कारीगर इस उम्मीद में उत्साह के साथ मिट्टी के बर्तन एवं दिए को बना रहे हैं कि इस दिवाली में लॉकडाउन में हुए नुकसान की भरपाई हो पाएगी। लॉक डाउन की वजह से कारीगरों का व्यवसाय पूरी तरह से ठप पड़ गया था। लेकिन दीपावली  आने पर  में एक आशा की नई किरण के साथ-साथ उमीद जगी हुई है, की लॉकडाउन की मार से निजात मिलेगी !

ग्रामीण इलाको में इसकी बात 
ग्रामीणों की माने तो वह पुरी तरह से इस दीपावली पर चीनी आइटमों का बहिष्कार करेंगे और अपने देश की मिट्टी से बने दीये से घरों को रौशन करेंगे।हालांकि मिट्टी के दीए जलाने की परंपरा आज भी बरकरार है। पूजा पाठ से लेकर लोग घरों को सजाने में भी मिट्टी के दीए का इस्तेमाल अधिक करते हैं। बहन अपने भाई की भाइयों के लिए घरौंदा पूजन करती हैं तथा कई तरह के मिट्टी के पात्र में सजाया जाता है। घरौंदा पूजन में विभिन्न विभिन्न प्रकार के चुका कुल्हीयामिट्टी के छोटे-छोटे बर्तन खिलाने के सजावट में उपयोग करते हैं। लिए भी कई प्रकार के बनाए जाते हैं जिसमें छोटे एवं बड़े दिए का प्रयोग पूजा पाठ के लिए किया जाता है। छोटे दिए का प्रयोग गौरव को सजाने के लिए किया जाता है कारीगर अपनी परंपरा के अनुसार मिट्टी के बर्तन एवं दिए बनाकर लोगों के बीच उत्साह के साथ उपलब्ध कराते हैं। वही यह  कहा की आपसी भाई चारो का परिचय देते हुए इस पर्व को  मनाए !

प्रकृतिक को बचाने के लिए करे दीपावली में मिट्टी के बने दियो का उपयोग -सिमरी थानाध्यक्ष राहुल कुमार

 प्रकृतिक को बचाने के लिए करे दीपावली  में मिट्टी के बने दियो का उपयोग -सिमरी थानाध्यक्ष राहुल कुमार 


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m v online bihar news/बक्सर/ सिमरी थानाध्यक्ष राहुल कुमार ने  लोगो से अपील करते हुए कहा की दीपावली का त्यौहार मनाये जाने को लेकर ग्रामीण क्षेत्र से लेकर शहरी क्षेत्रों में भी धूमधाम से तैयारी चल रही है। दीपावली पर्व के नजदीक आने से कुम्हार कारीगरों द्वारा मिट्टी के दिए एवं घरौंदे बनाने का काम उत्साह के साथ किया जा रहा है। कारीगरों को उम्मीद है कि लॉकडाउन में उन्हें जो नुकसान हुआ है उसकी भरपाई दीपावली में हो जाएगी । शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्र में मिट्टी के दिए दीपावली के पर्व पर जलाए जाने की परंपरा है। इस पर्व पर लोग मिट्टी के दीए के साथ-सथ बच्चों के खेलने के लिए खिलौने सहित अन्य पूजा पाठ से संबंधित मिट्टी के बर्तन कुम्हार कारीगर से खरीदारी करते हैं। ऐसे में कारीगर इस उम्मीद में उत्साह के साथ मिट्टी के बर्तन एवं दिए को बना रहे हैं कि इस दिवाली में लॉकडाउन में हुए नुकसान की भरपाई हो पाएगी। लॉक डाउन की वजह से कारीगरों का व्यवसाय पूरी तरह से ठप पड़ गया था। लेकिन दीपावली  आने पर  में एक आशा की नई किरण के साथ-साथ उमीद जगी हुई है, की लॉकडाउन की मार से निजात मिलेगी !

ग्रामीण इलाको में इसकी बात 
ग्रामीणों की माने तो वह पुरी तरह से इस दीपावली पर चीनी आइटमों का बहिष्कार करेंगे और अपने देश की मिट्टी से बने दीये से घरों को रौशन करेंगे।हालांकि मिट्टी के दीए जलाने की परंपरा आज भी बरकरार है। पूजा पाठ से लेकर लोग घरों को सजाने में भी मिट्टी के दीए का इस्तेमाल अधिक करते हैं। बहन अपने भाई की भाइयों के लिए घरौंदा पूजन करती हैं तथा कई तरह के मिट्टी के पात्र में सजाया जाता है। घरौंदा पूजन में विभिन्न विभिन्न प्रकार के चुका कुल्हीयामिट्टी के छोटे-छोटे बर्तन खिलाने के सजावट में उपयोग करते हैं। लिए भी कई प्रकार के बनाए जाते हैं जिसमें छोटे एवं बड़े दिए का प्रयोग पूजा पाठ के लिए किया जाता है। छोटे दिए का प्रयोग गौरव को सजाने के लिए किया जाता है कारीगर अपनी परंपरा के अनुसार मिट्टी के बर्तन एवं दिए बनाकर लोगों के बीच उत्साह के साथ उपलब्ध कराते हैं। वही यह  कहा की आपसी भाई चारो का परिचय देते हुए इस पर्व को  मनाए !