anish जहा अपनी पहचान खो बैठा डुमरी गांव का पोखरा,वही सिमरी प्रोग्राम अफसर अनिल दास थपथपा रहे है अपनी पीठ - . "body"

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 जहा अपनी पहचान खो बैठा डुमरी गांव का पोखरा,वही सिमरी प्रोग्राम अफसर अनिल दास थपथपा रहे है अपनी पीठ   

by admin

m v online bihar news/बक्सर/सिमरी प्रखंड अंतर्गत डुमरी गांव में चक्की जाने वाली सड़क पर बना पोखरा कूड़े कचरे के कारण अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है पर्यावरण के संतुलन के लिए जलाशय एवं बाग बगीचों का अपना अपना  महत्व है इसी को देखते हुए सरकार ने हर पंचायत में मनरेगा द्वारा pokhara khudwan ka कार्य किया है पोखरा से भूमिगत जल की भरपाई होती है जोकि पानी ना इकट्ठा होने के कारण इसकी भरपाई नहीं हो पाती है प्राकृतिक प्रेमी कहते हैं कि सरकारी प्रयास के से अधिक महत्वपूर्ण है ग्रामीणों का पर्यावरण के प्रति जागरूकता पैदा करना डुमरी के पोखरे को देखने से पता चलता है कि अपने समय का अव्वल पोखरा रहा होगा lekin समय के अनुसार आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है छठ आने पर सरकार द्वारा पोखरो की सफाई कराई जाती है लेकिन पोखरे को देखने पर प्रतीत होता है कि दशकों से इस पोखरे की नहीं मरम्मत हुई है नहीं सफाई पानी भी अपना रंग बदल चुका है इस पानी को न आदमी ही और ना ही जानवर पानी को पीते हैं और ना ही सिंचाई के काम में लिया जाता है लाखों की लागत से बना पोखरा गंदगी के कारण उपेक्षित पड़ा है इस तरफ जब तुम जनप्रतिनिधियों का भी ध्यान नहीं है पोखरे के पास रहने वाले ग्रामीण पोखरी की जमीन में गोबर रखते हैं साथ ही खेती का अन्य सामान्य चीज भी रखते हैं। 

                                        

क्या कहते हैं प्रोग्राम अफसर

सिमरी प्रोग्राम अफसर अनिल दास ने बताया कि पोखरा के निर्माण  व सफाई का कार्य पंचायत रोजगार सेवक द्वारा कराया जाता है अगर कार्य नहीं हुआ है तो तत्काल कार्य कराने पर विचार किया जाएगा 


जहा अपनी पहचान खो बैठा डुमरी गांव का पोखरा,वही सिमरी प्रोग्राम अफसर अनिल दास थपथपा रहे है अपनी पीठ

 जहा अपनी पहचान खो बैठा डुमरी गांव का पोखरा,वही सिमरी प्रोग्राम अफसर अनिल दास थपथपा रहे है अपनी पीठ   

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m v online bihar news/बक्सर/सिमरी प्रखंड अंतर्गत डुमरी गांव में चक्की जाने वाली सड़क पर बना पोखरा कूड़े कचरे के कारण अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है पर्यावरण के संतुलन के लिए जलाशय एवं बाग बगीचों का अपना अपना  महत्व है इसी को देखते हुए सरकार ने हर पंचायत में मनरेगा द्वारा pokhara khudwan ka कार्य किया है पोखरा से भूमिगत जल की भरपाई होती है जोकि पानी ना इकट्ठा होने के कारण इसकी भरपाई नहीं हो पाती है प्राकृतिक प्रेमी कहते हैं कि सरकारी प्रयास के से अधिक महत्वपूर्ण है ग्रामीणों का पर्यावरण के प्रति जागरूकता पैदा करना डुमरी के पोखरे को देखने से पता चलता है कि अपने समय का अव्वल पोखरा रहा होगा lekin समय के अनुसार आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है छठ आने पर सरकार द्वारा पोखरो की सफाई कराई जाती है लेकिन पोखरे को देखने पर प्रतीत होता है कि दशकों से इस पोखरे की नहीं मरम्मत हुई है नहीं सफाई पानी भी अपना रंग बदल चुका है इस पानी को न आदमी ही और ना ही जानवर पानी को पीते हैं और ना ही सिंचाई के काम में लिया जाता है लाखों की लागत से बना पोखरा गंदगी के कारण उपेक्षित पड़ा है इस तरफ जब तुम जनप्रतिनिधियों का भी ध्यान नहीं है पोखरे के पास रहने वाले ग्रामीण पोखरी की जमीन में गोबर रखते हैं साथ ही खेती का अन्य सामान्य चीज भी रखते हैं। 

                                        

क्या कहते हैं प्रोग्राम अफसर

सिमरी प्रोग्राम अफसर अनिल दास ने बताया कि पोखरा के निर्माण  व सफाई का कार्य पंचायत रोजगार सेवक द्वारा कराया जाता है अगर कार्य नहीं हुआ है तो तत्काल कार्य कराने पर विचार किया जाएगा