anish ठंड में नवजात शिशुओं को विशेष देखभाल की जरूरत, छह माह तक सिर्फ मां का दूध अनिवार्य - . "body"

    hedar kana

      MVONLINEBIHARNEWS के GOOGLE पेज पर आप सभी का स्वागत है. विज्ञापन या खबर देने के लिए दिए गए नंबर पर संपर्क करे 7050488221 आप हमें YOUTUBE और FACEBOOK पर भी देख सकते हैं।

     

 ठंड में नवजात शिशुओं को विशेष देखभाल की जरूरत, छह माह तक सिर्फ मां का दूध अनिवार्य


- शिशु को छह माह तक कोई भी ऊपरी आहार न दें, सुबह की गुनगुनी धूप बच्चों के लिए लाभकारी

- तापमान में अंतर आने से बढ़ जाती है बच्चों के बीमार होने की संभावना

 by amit singh

m v online bihar news/बक्सर/ जिले में ठंड की शुरुआत हो चुकी है। ऐसे में बदलते मौसम के मद्देनजर नवजात शिशुओं की विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है। तापमान में गिरावट के कारण मौसम के साथ रहन-सहन की शैली में भी परिवर्तन आ जाता है और इस दौरान ज्यादा सावधानी बरतनी पड़ती है। बड़ों की अपेक्षा बच्चे ज्यादा नाजुक होते है। इसलिए सर्दियों के मौसम में बच्चों की देखभाल ज़्यादा करनी पड़ती है। बच्चों के लिए हल्की ठंड भी नुकसान दायक है, जिसको नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। मौसम में परिवर्तन की शुरुआत से ही बच्चों को गर्म कपड़े और मोजे पहनाना शुरू कर देना चाहिए। साथ ही, यह ध्यान दें कि बच्चों की त्वचा काफ़ी नाजुक भी होती है, जिस ऊनी कपड़ों का आप इस्तेमाल कर रहे हैं वो साफ हो। इसलिए ऊनी कपड़ों का इस्तेमाल करने से पहले उन्हें अच्छे लिक्विड डिटर्जेंट से धोएं, ताकि स्किन एलर्जी न हो।

धूप से मिलने वाला विटामिन-डी बहुत लाभकारी :

सदर अस्पताल के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. रवि भूषण श्रीवास्तव ने बताया ठंड में शिशु को छह माह तक सिर्फ मां का ही दूध पिलाना चाहिए। स्तनपान कराते समय शिशु को सही तरीके से गोद में लेना चाहिए। शिशु को दिन की तरह रात में भी कुछ समय अंतराल पर दूध पिलाना चाहिए। शिशु को छह माह तक कोई भी ऊपरी आहार नहीं देना चाहिए। उन्होंने बताया कि नावजात शिशु के लिए धूप से मिलने वाला विटामिन-डी बहुत लाभकारी होता है, खासकर जब मौसम सर्दी का हो। रोजाना शिशु को लगभग 15 से 20 मिनट तक धूप में रखने से जॉन्डिस (पीलिया) जैसी बीमारी से बचाया जा सकता है। साथ ही सुबह की धूप दिखाने से शिशु का इम्यून सिस्टम भी अच्छा होता है, और बच्चे को अच्छी नींद भी आती है। लेकिन अगर आपके शिशु की त्वचा संवेदनशील है तो उसे धूप में न ले जाएं साथ ही धूप से आंखों को हमेशा बचाएं।

नवजात को हाइपोथर्मिया का खतरा अधिक :

सिविल सर्जन डॉ. जितेंद्र नाथ ने बताया ठंड के मौसम में नवजात को हाइपोथर्मिया का खतरा अधिक रहता है। इससे बचाव के लिए कंगारू मदर केयर एक सरल एवं प्रभावी उपाय है। इससे शिशु को गर्माहट मिलती है। साथ ही कम वजन वाले नवजात के वजन में भी बढ़ोतरी होती है। कंगारू मदर केयर से कमजोर बच्चे का वजन बढ़ता है। उसे ठंड से बचाया जा सकता है। बच्चे के शरीर का तापमान स्थिर रहता है। वहीं, नवजात शिशु के लिए तो मालिश बहुत जरूरी होती है, जिससे उनके शरीर को आराम के साथ मजबूती भी मिलती है। सर्दियों में मालिश और भी जरूरी हो जाती है, क्योंकि तेल मालिश त्वचा में नमी बरकरार रहती है और त्वचा रूखी नहीं होती।

कोरोनाकाल मे इन जरूरी बातें का रखें ख्याल : 

- हाथों की नियमित साबुन से सफाई जरूर करें

- मां को खांसी है तो मास्क लगाकर स्तनपान करायें

- घर से बाहर जाते समय मास्क का इस्तेमाल करें

- शिशुओं के पास सर्दी जुकाम वाले व्यक्ति नहीं जायें

- शिशुओं का भीड़-भाड़ वाले जगह न ले जाएं

ठंड में नवजात शिशुओं को विशेष देखभाल की जरूरत, छह माह तक सिर्फ मां का दूध अनिवार्य

 ठंड में नवजात शिशुओं को विशेष देखभाल की जरूरत, छह माह तक सिर्फ मां का दूध अनिवार्य


- शिशु को छह माह तक कोई भी ऊपरी आहार न दें, सुबह की गुनगुनी धूप बच्चों के लिए लाभकारी

- तापमान में अंतर आने से बढ़ जाती है बच्चों के बीमार होने की संभावना

 by amit singh

m v online bihar news/बक्सर/ जिले में ठंड की शुरुआत हो चुकी है। ऐसे में बदलते मौसम के मद्देनजर नवजात शिशुओं की विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है। तापमान में गिरावट के कारण मौसम के साथ रहन-सहन की शैली में भी परिवर्तन आ जाता है और इस दौरान ज्यादा सावधानी बरतनी पड़ती है। बड़ों की अपेक्षा बच्चे ज्यादा नाजुक होते है। इसलिए सर्दियों के मौसम में बच्चों की देखभाल ज़्यादा करनी पड़ती है। बच्चों के लिए हल्की ठंड भी नुकसान दायक है, जिसको नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। मौसम में परिवर्तन की शुरुआत से ही बच्चों को गर्म कपड़े और मोजे पहनाना शुरू कर देना चाहिए। साथ ही, यह ध्यान दें कि बच्चों की त्वचा काफ़ी नाजुक भी होती है, जिस ऊनी कपड़ों का आप इस्तेमाल कर रहे हैं वो साफ हो। इसलिए ऊनी कपड़ों का इस्तेमाल करने से पहले उन्हें अच्छे लिक्विड डिटर्जेंट से धोएं, ताकि स्किन एलर्जी न हो।

धूप से मिलने वाला विटामिन-डी बहुत लाभकारी :

सदर अस्पताल के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. रवि भूषण श्रीवास्तव ने बताया ठंड में शिशु को छह माह तक सिर्फ मां का ही दूध पिलाना चाहिए। स्तनपान कराते समय शिशु को सही तरीके से गोद में लेना चाहिए। शिशु को दिन की तरह रात में भी कुछ समय अंतराल पर दूध पिलाना चाहिए। शिशु को छह माह तक कोई भी ऊपरी आहार नहीं देना चाहिए। उन्होंने बताया कि नावजात शिशु के लिए धूप से मिलने वाला विटामिन-डी बहुत लाभकारी होता है, खासकर जब मौसम सर्दी का हो। रोजाना शिशु को लगभग 15 से 20 मिनट तक धूप में रखने से जॉन्डिस (पीलिया) जैसी बीमारी से बचाया जा सकता है। साथ ही सुबह की धूप दिखाने से शिशु का इम्यून सिस्टम भी अच्छा होता है, और बच्चे को अच्छी नींद भी आती है। लेकिन अगर आपके शिशु की त्वचा संवेदनशील है तो उसे धूप में न ले जाएं साथ ही धूप से आंखों को हमेशा बचाएं।

नवजात को हाइपोथर्मिया का खतरा अधिक :

सिविल सर्जन डॉ. जितेंद्र नाथ ने बताया ठंड के मौसम में नवजात को हाइपोथर्मिया का खतरा अधिक रहता है। इससे बचाव के लिए कंगारू मदर केयर एक सरल एवं प्रभावी उपाय है। इससे शिशु को गर्माहट मिलती है। साथ ही कम वजन वाले नवजात के वजन में भी बढ़ोतरी होती है। कंगारू मदर केयर से कमजोर बच्चे का वजन बढ़ता है। उसे ठंड से बचाया जा सकता है। बच्चे के शरीर का तापमान स्थिर रहता है। वहीं, नवजात शिशु के लिए तो मालिश बहुत जरूरी होती है, जिससे उनके शरीर को आराम के साथ मजबूती भी मिलती है। सर्दियों में मालिश और भी जरूरी हो जाती है, क्योंकि तेल मालिश त्वचा में नमी बरकरार रहती है और त्वचा रूखी नहीं होती।

कोरोनाकाल मे इन जरूरी बातें का रखें ख्याल : 

- हाथों की नियमित साबुन से सफाई जरूर करें

- मां को खांसी है तो मास्क लगाकर स्तनपान करायें

- घर से बाहर जाते समय मास्क का इस्तेमाल करें

- शिशुओं के पास सर्दी जुकाम वाले व्यक्ति नहीं जायें

- शिशुओं का भीड़-भाड़ वाले जगह न ले जाएं