कालाजार उन्मूलन का 28 अक्टूबर से सदर प्रखंड के पड़री में चलेगा कार्यक्रम, आशा करेंगी जागरूक
M V ONLINE BIHAR NEWS/बक्सर/ : जिले में कालाजार उन्मूलन कार्यक्रम लगातार चालू है। गत दिनों जिले के नावानगर प्रखंड के गिरिधर बरांव में 25 सितंबर से दवाओं का छिड़काव का काम शुरू है। कार्यक्रम की सारी निगरानी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी डॉ. प्रेमचंद प्रसाद कर रहे हैं। बुधवार को जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. शैलेन्द्र कुमार ने छिड़काव का जायजा लिया। उन्होंने दवाओं की मात्रा व उसके छिड़काव की जांच की। डॉ. शैलेन्द्र कुमार ने बताया कि कालाजार उन्मूलन के लिए स्वास्थ्य विभाग मिशन के तहत काम कर रहा है तथा जल्द ही इस दिशा में कामयाबी मिलेगी। बताया कि गिरिधर बरांव में दूसरे चक्र का छिड़काव खत्म होने के बाद सदर प्रखंड के पड़री में 28 अक्टूबर, चक्की प्रखंड के चंदा पंचायत स्थित परसियां में दो नवंबर व अंतिम में सदर प्रखंड स्थित छोटका नुआंव में चार नवंबर से अभियान की शुरुआत हागी।
2018 में मिला था गिरिधर बार में पहला मरीज :
डॉ सुरेंद्र कुमार ने बताया गिरिधर बरांव में 2018 में कालाजार का पहला मरीज मिला था। जिसके बाद सघन रूप से जांच अभियान चलाया गया। जांच में किसी अन्य ग्रामीण की संक्रमित होने की पुष्टि नहीं हुई। लेकिन स्वास्थ्य विभाग के गाइडलाइन के अनुसार प्रत्येक साल में चिन्हित गांव व वार्ड में दो चरण में दवाओं का छिड़काव किया जाता है। इसके लिए गिरिधर बरांव के 1479 घरों को चिन्हित किया गया है। जिनमें 5834 कमरों में 7685 लोग निवास करते हैं। गांव में दवाओं के छिड़काव के लिए एक 3 सदस्य टीम बनाई गई है, जो 22 दिनों में 72.08 किलोग्राम एसपी पाउडर का छिड़काव करेंगे।
संक्रमण के 15 से 20 दिनों बाद दिखते हैं लक्षण :
डॉ. शैलेन्द्र ने बताया कालाजार धीरे-धीरे विकसित होने वाली बीमारी है जो मादा फ्लैबोटामस अर्जेंटाइप्स (बालू मक्खी) के काटने से होता है। मक्खी के काटने के 15 से 20 दिन बाद व्यक्ति में कालाजार के लक्षण दिखाई देने लगते हैं। उन्हें बार-बार बुखार आने लगता है। इसके साथ-साथ भूख में कमी, वजन का घटना, थकान महसूस होना, पेट का बढ़ जाना आदि इसके लक्षण के रूप में दिखाई देने लगते हैं। ऐसे व्यक्ति को तुरंत नजदीक के अस्पताल में जाकर अपनी जांच करवानी चाहिए। ठीक होने के बाद भी कुछ व्यक्ति के शरीर पर चकता या दाग होने लगता है। ऐसे व्यक्तियों को भी अस्पताल जाकर अपनी जांच करानी चाहिए।

