बिहार में 2 हजार से ज्यादा मुखिया जांच के घेरे में! 12 पर बर्खास्तगी की तलवार, जानिए क्या है पूरा मामला
BY ADMIN
MV BIHAR NEWS
पटना: बिहार की ग्राम पंचायतों से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। राज्य में 2 हजार से ज्यादा मुखिया जांच के दायरे में आ गए हैं। वहीं इनमें से 12 मुखियाओं पर बर्खास्तगी की कार्रवाई की कार्रवाई शुरू हो गई है। इस खबर के सामने आने के बाद पंचायत स्तर पर हलचल तेज हो गई है। मिली जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री ग्रामीण सोलर स्ट्रीट लाइट योजना, नल-गली, नल-जल और स्वच्छता योजनाओं में गड़बड़ी के आरोप लगे हैं. वही नियमों की अनदेखी और लापरवाही से जुड़े मामलों की जांच की जा रही है। जांच के दौरान जिन पंचायतों में गड़बड़ी या नियमों के उल्लंघन की शिकायतें सामने आई हैं, वहां जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। रिपोर्ट के मुताबिक, बड़ी संख्या में मुखियाओं के खिलाफ अलग-अलग मामलों में जांच चल रही है। वहीं 12 मामलों में कार्रवाई इतनी गंभीर स्थिति तक पहुंच गई है कि संबंधित मुखियाओं को पद से हटाए जाने की संभावना बन गई है।
पंचाय अस्तर पर कराई गई जाँच
प्रमंडलीय आयुक्तों के स्तर से कराई गई जांच में कई पंचायतों में नियमों की अनदेखी और सरकारी राशि के दुरुपयोग के मामले सामने आए हैं. इसके बाद 2,000 से अधिक मुखिया पंचायती राज विभाग की जांच के दायरे में आ गए हैं. वहीं, गंभीर अनियमितताओं के आरोप में 12 मुखियाओं को पद से हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. इनके खिलाफ विभागीय स्तर पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा रही है.
ये रहे 12 वो मुखिया का नाम
1. इम्तियाज अंसारी- काजीपुर सिमरी, बक्सर
2. दीपनारायण सिंह- पहरी सिमरी, बक्सर
3. बटोरन कुमार- डोमा, बख्तियारपुर, पटना
4. अजय कुमार- बरिसवन, शाहपुर, भोजपुर
5. शिवशंकर सिंह- रामपुर डीह, हनुमान नगर, दरभंगा
6. रमेश मांझी- श्रीपुर गाहर पश्चिमी, खानपुर, समस्तीपुर
7. मोहम्मद नदीमुर रहमान- ठिकही, कटरा, मुजफ्फरपुर
8. किरण बाला - अखलासपुर, कैमूर
9. अखिलेश रजक- भीखनपुरा, देसरी, वैशाली
10. रामानंद सिंह- पिंजौरा, जहानाबाद
11. अंजली कुमारी- सहाजितपुर, सारण
12. आजाद शाह- मोकरमपुर, मधुबनी
इन सभी पर आरोप है कि ये
2. सोलर लाइट योजना में भी गंभीर गड़बड़ियां की है।
3. वही इनके यहां एस्टीमेट और मेजरमेंट बुक तक नहीं मिली
पंचायती राज विभाग ने स्पष्ट किया है कि किसी भी विकास योजना में सरकारी राशि के दुरुपयोग को गंभीरता से लिया जाएगा. जांच में आरोप सही पाए जाने पर संबंधित जनप्रतिनिधियों को पद से हटाया जा सकता है. साथ ही पांच साल तक पंचायत चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है. पंचायतों में विकास कार्यों के लिए आने वाली सरकारी राशि के इस्तेमाल और योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता को लेकर प्रशासन की सख्ती के बीच यह मामला बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।




