जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों पर किया गया टीएचआर का वितरण
- नवचयनित सेविकाओं व सहायिकाओं को सौंपी गई जिम्मेदारी
By amit kumar
M v online bihar news/बक्सर,| जिला स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित होने वाले कार्यक्रम का सोमवार को समापन हुआ। कार्यक्रम के तहत जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर टीएचआर (टेक होम राशन) वितरण किया गया। वहीं, बिहार दिवस के अवसर पर नवचयनित सेविकाओं व सहायिकाओं को जिम्मेदारी सौंपी गयी। आईसीडीएस की डीपीओ तरणि कुमारी ने बताया जिलाधिकारी अमन समीर के निर्देश पर जिलेभर के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर कार्यरत सेविका व सहायिका ओटीपी वेरिफिकेशन के बाद लाभार्थी के बीच एक किलो चना का वितरण कर रही हैं । इसके लिए सभी सेविका व सहायिका के द्वारा सबसे पहले आंगन मोबाइल एप्प पर लाभार्थी का मोबाइल नंबर रजिस्टर्ड कराया गया। जिसके बाद ओटीपी आने पर उसका वेरिफिकेशन होता है और पोषाहार लिखा हुआ वेरिफिकेशन कोड आने के बाद ही लाभार्थी को पोषाहार दिया गया।
आंगनबाड़ी केंद्रों की भूमिका अहम :
जिले में 138 सेविकाओं व 66 सहायिकाओं का चयन हुआ था। जिनको स्थानीय जनप्रतिनिधियों के द्वारा जिम्मेदारी दिलाई गई। इस दौरान उन्हें बताया गया कि सरकार व सरकारी योजना का लाभ अधिक से अधिक लोगों को मिले। इसके लिए सरकार ने फ्रंट लाइन वर्कर्स की भूमिका निर्धारित की। जिसमें एक वर्ग आंगनबाड़ी केंद्रों का भी है। आंगनबाड़ी योजना मुख्य रूप से मां और बच्चे की देखभाल के लिए चलाई गई सरकारी योजना है। इन योजनाओं का संचालन आंगनबाड़ी केंद्र के माध्यम से किया जाता है। इन केंद्रों पर महिलाओं और बच्चों की स्वास्थ्य जांच के अलावा पुष्टाहार (पौष्टिक खाना) भी वितरित की जाती है। साथ ही, पोषण क्षेत्र में मातृ व शिशु स्वास्थ्य को बेहतर बनाने व कुपोषण को दूर करना ही योजना का मुख्य उद्देश्य है। वहीं, सभी सेविकाओं व सहायिकाओं को सभी कार्य निष्ठापूर्वक निष्पादित करने की शपथ भी दिलाई गई।
आंगनबाड़ी योजना का उद्देश्य :
- 0-6 साल के बच्चों की पोषण और स्वास्थ्य स्थिति में सुधार करना।
- बच्चे के शारीरिक और सामाजिक विकास के लिए नींव रखना।
- मृत्यु दर, रोग, कुपोषण को कम करना।
- बाल विकास को बढ़ावा देना।
- मां को उचित पोषण और स्वास्थ्य की शिक्षा देना।
बिहार दिवस पर विभिन्न कार्यक्रमों का हुआ आयोजन :
डीपीओ तरणि कुमारी ने बताया बिहार दिवस के अवसर पर जिले के सभी केंद्रों पर कई कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। जिसमें पौधरोपण, रंगोली प्रतियोगिता, दीप प्रज्ज्वलन और सबसे अहम शून्य से तीन वर्ष तक के बच्चों का वजन व उनकी लंबाई मापी गयी। उम्र, लंबाई व वजन की रिपोर्ट तैयार करने के बाद कुपोषित बच्चों को चिह्नित किया जाएगा। तत्पश्चात उनके अभिभावकों व परिजनों को कुपोषण से लड़ने के गुर सिखाए जाएंगे।


