anish एमडीआर टीबी को मात देकर किरण ने तय किया चैंपियन बनने तक का सफर - . "body"

    hedar kana

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एमडीआर टीबी  को मात देकर  किरण ने तय किया चैंपियन बनने तक का सफर 



-रोग के खिलाफ समुदाय में जगा रही अब जागरूकता की लहर 

by amit kumar

m v online bihar news/बक्सर,11 फरवरी| यक्ष्मा (टीबी) को हराने के लिए दो बातें सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। पहला ससमय इलाज शुरू हो जाए और दवा का सेवन नियमित किया जाय। इससे अधिक गंभीर एमडीआर टीबी ग्रसित मरीज भी पूरी तरह ठीक होकर सामान्य जीवन जी सकता है। कुछ ऐसा ही संदेश दे रही हैं जिले की  टीबी चैंपियन किरण कुमारी। सदर प्रखण्ड के स्टेशन रोड पर रहने वाली 25 वर्षीय किरण कभी खुद एमडीआर टीबी से ग्रसित थीं।  लेकिन नियमित दवाओं के सेवन से ना सिर्फ उन्होंने  खुद को पूरी तरह टीबी मुक्त कर लिया बल्कि समाज में इस रोग के खिलाफ मुहिम भी छेड़ रखा है। 

शुरुआत में लक्षणों को किया गया नजरंदाज: 

आँखों में यक्ष्मा को हराने की चमक और आत्मविश्वास से लबरेज किरण की मानसिक स्थिति सात साल पहले कुछ और ही थी। वो बताती हैं कि टीबी का पता चलने पर वह दुखी होने के बदले खुश थीं क्योंकि उनके लाख प्रयास करने के बाद भी उनके अपनों ने उनकी लगातार गिरते स्वास्थ्य को गंभीरता से नहीं लिया था। इसलिए वो बिलकुल वेजार हो चुकी थी और स्वस्थ होना नहीं चाहती थीं।लेकिन अस्पताल के डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों तथा मौसा के दोस्त जो खुद एक डॉक्टर हैं, के समझाने पर तथा एकमात्र बच्चे का मुंह देख कर उन्होंने उन्होने अपना इलाज करना शुरू करवाया। कुछ दिनों तक दवा लगातार खाने के बाद स्वास्थ्य में सुधार होने लगा। इससे थोड़ी उम्मीद जागी । इसके बाद वह दवा का सेवन और  नियमित अंतराल पर अस्पताल जाकर अपनी ना जांच भी कराने लगी। 2017 के शुरू  होने तक वो पूरी तरह ठीक भी हो चुकी  थीं। 

जिला टीबी मुक्त वाहिनी  से जुड़ कर लोगों को किया जागरूक :

स्वस्थ होकर किरण ने ये संकल्प किया कि की वो दूसरे टीबी मरीजों को भी अपने समान रोग को मात देने में मदद करेंगी।इसलिए वो  जिला टीबी मुक्त वाहिनी से एक सक्रिय सदस्य  के तौर पर जुड़ीं। उन्होंने समुदाय में टीबी के खिलाफ जागरूकता लाना अपने जीवन का उद्देश्य बना लिया। आज वो जिले के हर टीबी ग्रसित मरीज के लिए एक प्रेरणा बन चुकी हैं। कई रोगी उनकी बात सुनकर अपना पूरा इलाज करा स्वस्थ हो चुके हैं। 

दवा को नियमित खाने की है जरूरत 

किरण कहती हैं, जैसे खंडहर को टूटने से बचाने के लिए  हल्की लीपापोती नहीं वरन उचित मरम्मत की जरूरत होती है। उसी तरह टीबी को भी जड़ से उखाड़ने के लिए कुछ समय तक नहीं वरन दवा का पूरा कोर्स पूरा करने की जरूरत है। यदि किसी कारण से बीच में दवा खाना छोड़ दिया जाय तो सामान्य टीबी  को भी गंभीर एमडीआर टीबी में बदलने में देर नहीं लगेगी। फिर उसको ठीक होने में काफी समय और मुश्किलें आ सकती हैं, जैसा कि  उनके साथ हुआ था। 

टीबी  के लक्षण दिखे तो तत्काल अस्पताल आएं:  

जिला वरीय  यक्ष्मा पर्यवेक्षक कुमार गौरव ने  बताया कि टीबी  का इलाज संभव है।  सरकार की तरफ से इलाज बिल्कुल मुफ्त है।  इसलिए टीबी के लक्षण दिखे तो संकोच नहीं करें।  तत्काल अस्पताल आकर अपनी जांच करवाएं।  जांच में अगर टीबी होने की पुष्टि होती है तो दवा लेकर तत्काल इलाज शुरू करवा लें।  इससे आप जल्द स्वस्थ हो जाएंगे।  जितना देर कीजिएगा ठीक होने में उतनी देरी होगी। इसलिए लक्षण दिखने पर तत्काल जांच कराने के लिए अस्पताल आ जाएं|

एमडीआर टीबी को मात देकर किरण ने तय किया चैंपियन बनने तक का सफर

एमडीआर टीबी  को मात देकर  किरण ने तय किया चैंपियन बनने तक का सफर 



-रोग के खिलाफ समुदाय में जगा रही अब जागरूकता की लहर 

by amit kumar

m v online bihar news/बक्सर,11 फरवरी| यक्ष्मा (टीबी) को हराने के लिए दो बातें सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। पहला ससमय इलाज शुरू हो जाए और दवा का सेवन नियमित किया जाय। इससे अधिक गंभीर एमडीआर टीबी ग्रसित मरीज भी पूरी तरह ठीक होकर सामान्य जीवन जी सकता है। कुछ ऐसा ही संदेश दे रही हैं जिले की  टीबी चैंपियन किरण कुमारी। सदर प्रखण्ड के स्टेशन रोड पर रहने वाली 25 वर्षीय किरण कभी खुद एमडीआर टीबी से ग्रसित थीं।  लेकिन नियमित दवाओं के सेवन से ना सिर्फ उन्होंने  खुद को पूरी तरह टीबी मुक्त कर लिया बल्कि समाज में इस रोग के खिलाफ मुहिम भी छेड़ रखा है। 

शुरुआत में लक्षणों को किया गया नजरंदाज: 

आँखों में यक्ष्मा को हराने की चमक और आत्मविश्वास से लबरेज किरण की मानसिक स्थिति सात साल पहले कुछ और ही थी। वो बताती हैं कि टीबी का पता चलने पर वह दुखी होने के बदले खुश थीं क्योंकि उनके लाख प्रयास करने के बाद भी उनके अपनों ने उनकी लगातार गिरते स्वास्थ्य को गंभीरता से नहीं लिया था। इसलिए वो बिलकुल वेजार हो चुकी थी और स्वस्थ होना नहीं चाहती थीं।लेकिन अस्पताल के डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों तथा मौसा के दोस्त जो खुद एक डॉक्टर हैं, के समझाने पर तथा एकमात्र बच्चे का मुंह देख कर उन्होंने उन्होने अपना इलाज करना शुरू करवाया। कुछ दिनों तक दवा लगातार खाने के बाद स्वास्थ्य में सुधार होने लगा। इससे थोड़ी उम्मीद जागी । इसके बाद वह दवा का सेवन और  नियमित अंतराल पर अस्पताल जाकर अपनी ना जांच भी कराने लगी। 2017 के शुरू  होने तक वो पूरी तरह ठीक भी हो चुकी  थीं। 

जिला टीबी मुक्त वाहिनी  से जुड़ कर लोगों को किया जागरूक :

स्वस्थ होकर किरण ने ये संकल्प किया कि की वो दूसरे टीबी मरीजों को भी अपने समान रोग को मात देने में मदद करेंगी।इसलिए वो  जिला टीबी मुक्त वाहिनी से एक सक्रिय सदस्य  के तौर पर जुड़ीं। उन्होंने समुदाय में टीबी के खिलाफ जागरूकता लाना अपने जीवन का उद्देश्य बना लिया। आज वो जिले के हर टीबी ग्रसित मरीज के लिए एक प्रेरणा बन चुकी हैं। कई रोगी उनकी बात सुनकर अपना पूरा इलाज करा स्वस्थ हो चुके हैं। 

दवा को नियमित खाने की है जरूरत 

किरण कहती हैं, जैसे खंडहर को टूटने से बचाने के लिए  हल्की लीपापोती नहीं वरन उचित मरम्मत की जरूरत होती है। उसी तरह टीबी को भी जड़ से उखाड़ने के लिए कुछ समय तक नहीं वरन दवा का पूरा कोर्स पूरा करने की जरूरत है। यदि किसी कारण से बीच में दवा खाना छोड़ दिया जाय तो सामान्य टीबी  को भी गंभीर एमडीआर टीबी में बदलने में देर नहीं लगेगी। फिर उसको ठीक होने में काफी समय और मुश्किलें आ सकती हैं, जैसा कि  उनके साथ हुआ था। 

टीबी  के लक्षण दिखे तो तत्काल अस्पताल आएं:  

जिला वरीय  यक्ष्मा पर्यवेक्षक कुमार गौरव ने  बताया कि टीबी  का इलाज संभव है।  सरकार की तरफ से इलाज बिल्कुल मुफ्त है।  इसलिए टीबी के लक्षण दिखे तो संकोच नहीं करें।  तत्काल अस्पताल आकर अपनी जांच करवाएं।  जांच में अगर टीबी होने की पुष्टि होती है तो दवा लेकर तत्काल इलाज शुरू करवा लें।  इससे आप जल्द स्वस्थ हो जाएंगे।  जितना देर कीजिएगा ठीक होने में उतनी देरी होगी। इसलिए लक्षण दिखने पर तत्काल जांच कराने के लिए अस्पताल आ जाएं|